ओडिशा विजिलेंस ने ITDA इंजीनियर को किया गिरफ्तार: ₹2.04 करोड़ नकद, 6 इमारतें और 14 प्लॉट बरामद
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा विजिलेंस ने रविवार, 7 जून 2026 को कंधमाल जिले के बालीगुड़ा स्थित इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसी (ITDA) के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बैकुंठनाथ बेहरा को आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया। जांच में उनकी पत्नी के बैंक लॉकरों से ₹2.04 करोड़ नकद और 552 ग्राम सोने के आभूषण समेत करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ।
छापेमारी का घटनाक्रम
विशेष न्यायाधीश (विजिलेंस), भुवनेश्वर द्वारा जारी सर्च वारंट के आधार पर शनिवार को विजिलेंस की नौ टीमों ने एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इन टीमों का नेतृत्व दो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP), पाँच उप पुलिस अधीक्षक (DSP) और छह निरीक्षकों ने किया।
यह कार्रवाई भुवनेश्वर, मयूरभंज जिले के बारीपदा, जाजपुर जिले के धर्मशाला और कंधमाल जिले के बालीगुड़ा — कुल नौ स्थानों पर एक साथ की गई, जिनमें बेहरा के घर, उनके रिश्तेदारों के आवास और कार्यालय शामिल थे।
बरामद संपत्ति का ब्यौरा
जांच में सामने आया कि बेहरा और उनके परिवार के पास छह आलीशान बहुमंजिला भवन हैं — जिनमें से पाँच भुवनेश्वर के प्रमुख इलाकों में स्थित हैं। इसके अलावा 14 प्लॉट मिले हैं: आठ भुवनेश्वर में, पाँच जाजपुर के धर्मशाला में और एक मयूरभंज के बारीपदा में।
पत्नी के दो बैंक लॉकरों से ₹2.04 करोड़ नकद बरामद हुए, जिसे अधिकारियों के अनुसार हाल के वर्षों की सबसे बड़ी नकद बरामदगियों में से एक माना जा रहा है। इसके साथ ही ₹45 लाख की बैंक जमा राशि, 552 ग्राम सोने के आभूषण, एक चारपहिया वाहन और ₹44.35 लाख मूल्य का घरेलू सामान भी जब्त किया गया।
कानूनी कार्रवाई
विजिलेंस सेल थाने में बैकुंठनाथ बेहरा और उनकी पत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 13(2), 13(1)(बी) और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह मामला एक सरकारी इंजीनियर द्वारा जनजातीय विकास निधियों से जुड़े पद पर रहते हुए कथित तौर पर संपत्ति अर्जित करने का है, जो इसे और गंभीर बनाता है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा विजिलेंस राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान तेज कर रही है। गौरतलब है कि ITDA जैसी एजेंसियाँ आदिवासी कल्याण के लिए केंद्र और राज्य से भारी अनुदान प्राप्त करती हैं, और इन निधियों के दुरुपयोग की जाँच अब जांच एजेंसियों की प्राथमिकता बन गई है। आगे की जाँच जारी है और संपत्तियों का पूरा मूल्यांकन होना अभी बाकी है।