लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 28 मई को 'विधान-चेतना' और केंद्रीय विधानसभा के 89 खंडों का करेंगे विमोचन
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 28 मई को नई दिल्ली में दिल्ली विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका 'विधान-चेतना' का पहला अंक लॉन्च करेंगे। इसके साथ ही वे केंद्रीय विधानसभा (1924–1930) की कार्यवाही के 89 खंडों के ऐतिहासिक संकलन का भी विमोचन करेंगे। यह दोहरा शुभारंभ भारत की संसदीय विरासत और समकालीन विधायी विमर्श को एक मंच पर लाने का प्रयास है।
कार्यक्रम का स्वरूप और प्रमुख उपस्थिति
इस समारोह की अध्यक्षता दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता करेंगे। आधिकारिक बयान के अनुसार, संसदीय मामलों और अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में दिल्ली के विधायी मामलों के मंत्री प्रवेश सिंह, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधायकगण, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, इतिहास के शिक्षक और विद्वान भी शामिल होंगे।
केंद्रीय विधानसभा कार्यवाही के 89 खंडों का महत्व
केंद्रीय विधानसभा (1924–1930) की कार्यवाही के 89 खंडों का यह संकलन स्वतंत्रता-पूर्व भारतीय शासन के एक परिवर्तनकारी युग को सावधानीपूर्वक संग्रहित करता है। इसमें उस दौर के प्रारंभिक भारतीय सांसदों की तीखी बहस और मूलभूत तर्कों को संरक्षित किया गया है। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह संकलन शोधकर्ताओं, सांसदों और नागरिकों के लिए समान रूप से गहरा ऐतिहासिक और बौद्धिक महत्व रखता है।
'विधान-चेतना' पत्रिका की भूमिका
'विधान-चेतना' राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विधायी मामलों, संवैधानिक शासन और लोकतांत्रिक प्रथाओं के विश्लेषण के लिए समर्पित एक नया बौद्धिक मंच है। यह त्रैमासिक पत्रिका ऐतिहासिक विद्वता और समकालीन विधायी चिंतन को एक साथ प्रस्तुत करेगी। दिल्ली विधानसभा सचिवालय के अनुसार, इसका उद्देश्य सूचित लोकतांत्रिक संवाद और संसदीय परंपराओं के साथ सार्वजनिक जुड़ाव को बढ़ावा देना है।
संस्थागत महत्व और आगे की राह
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह समारोह आधुनिक लोकतांत्रिक संवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ संस्थागत इतिहास को संरक्षित करने की गहरी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब देशभर में संसदीय विरासत के दस्तावेज़ीकरण पर नए सिरे से ज़ोर दिया जा रहा है। इस दोहरे विमोचन से दिल्ली विधानसभा के शोध और विधायी शिक्षा के प्रयासों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।