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विट्ठलभाई पटेल की 400 बैठकों का 89 खंडों में संकलन जारी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया लोकार्पण

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विट्ठलभाई पटेल की 400 बैठकों का 89 खंडों में संकलन जारी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया लोकार्पण

सारांश

भारत के पहले निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल की अध्यक्षता में हुई लगभग 400 बैठकों सहित 1924–1930 की केंद्रीय विधानसभा कार्यवाहियाँ अब 89 खंडों में सार्वजनिक हैं। यह संकलन साबित करता है कि भारत की लोकतांत्रिक जड़ें संविधान से भी पहले की हैं।

मुख्य बातें

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 28 मई 2026 को दिल्ली विधानसभा परिसर में केंद्रीय विधानसभा की 1924–1930 की कार्यवाहियों का संकलन जारी किया।
संकलन 89 खंडों में तैयार है, जिसमें विट्ठलभाई पटेल की अध्यक्षता में हुई लगभग 400 बैठकों का पूरा दस्तावेज़ है।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इसे देश की लोकतांत्रिक विरासत संरक्षण का बड़ा प्रयास बताया।
दिल्ली विधानसभा परिसर में एक संग्रहालय स्थापित करने की योजना भी घोषित की गई।
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने बताया कि ब्रिटिश काल में भी भारतीय नेताओं ने इसी सदन में जनविरोधी विधेयक गिराए थे।

नई दिल्ली के दिल्ली विधानसभा परिसर में 28 मई 2026 को एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में केंद्रीय विधानसभा की 1924 से 1930 तक की कार्यवाहियों का विस्तृत संकलन सार्वजनिक किया गया। यह संकलन 89 खंडों में तैयार किया गया है, जिसमें उस दौर की संसदीय बहसों, परंपराओं और ऐतिहासिक निर्णयों का पूरा दस्तावेज़ीकरण है। इस संकलन का लोकार्पण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया।

संकलन का महत्व और विरासत

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल पुस्तकों का विमोचन नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक विरासत को सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बताया कि विट्ठलभाई पटेल देश के पहले भारतीय निर्वाचित अध्यक्ष थे और उनकी अध्यक्षता में लगभग 400 बैठकों का संचालन हुआ था। यह संकलन नई पीढ़ी को भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की गहराई और प्राचीनता से परिचित कराएगा।

डिजिटल भविष्य के साथ ऐतिहासिक संरक्षण

विजेंद्र गुप्ता ने यह भी बताया कि दिल्ली विधानसभा आज पूरी तरह पेपरलेस और डिजिटाइज्ड हो चुकी है और सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही विधानसभा परिसर में एक संग्रहालय स्थापित करने की योजना है, जहाँ इस ऐतिहासिक भवन और भारतीय लोकतंत्र से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाएगा।

सांसद मनोज तिवारी की प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि विजेंद्र गुप्ता के विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद से इस ऐतिहासिक भवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि जहाँ आज दिल्ली विधानसभा स्थित है, वहाँ कभी देश का केंद्रीय सचिवालय हुआ करता था और विट्ठलभाई पटेल जैसे नेता इसकी अध्यक्षता करते थे।

ब्रिटिश शासन में भारतीय प्रतिरोध

तिवारी ने इन दस्तावेज़ों के हवाले से बताया कि अंग्रेज़ी शासनकाल में भी भारतीय नेताओं ने जनविरोधी विधेयकों का डटकर विरोध किया और कई बार ब्रिटिश सरकार के प्रस्तावित विधेयक इसी सदन में गिरा दिए गए। उन्होंने कहा कि उस समय पूरी दुनिया में ब्रिटेन का वर्चस्व था, फिर भी भारतीय नेताओं ने इसी भवन में लोकतांत्रिक शक्ति का परिचय दिया।

संविधान से पहले की लोकतांत्रिक जड़ें

तिवारी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत को संविधान 1950 में मिला, परंतु लोकतांत्रिक सोच और संसदीय परंपराएँ उससे कहीं पहले से जड़ें जमा चुकी थीं। विट्ठलभाई पटेल जैसे नेताओं ने उस कठिन दौर में भी लोकतांत्रिक मूल्यों को जीवंत रखा। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। यह संकलन भारतीय संसदीय इतिहास के शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह आज के जनप्रतिनिधियों के लिए एक मानक है, न केवल एक स्मृति। सवाल यह है कि क्या यह संकलन केवल प्रतीकात्मक गर्व का साधन बनेगा, या इसे पाठ्यक्रम और नीति-निर्माण प्रशिक्षण में वास्तविक रूप से शामिल किया जाएगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विट्ठलभाई पटेल कौन थे और उनका संसदीय योगदान क्या था?
विट्ठलभाई पटेल भारत के पहले निर्वाचित भारतीय विधानसभा अध्यक्ष थे, जिन्होंने 1925 में केंद्रीय विधानसभा की अध्यक्षता संभाली। उनकी अध्यक्षता में लगभग 400 बैठकों का संचालन हुआ और उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ किया।
28 मई को जारी 89 खंडों के संकलन में क्या है?
इस संकलन में 1924 से 1930 तक की केंद्रीय विधानसभा की कार्यवाहियाँ, संसदीय बहसें, ऐतिहासिक निर्णय और उस दौर की विधायी परंपराओं का विस्तृत दस्तावेज़ है। यह 89 खंडों में तैयार किया गया है और शोधकर्ताओं व नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत है।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से प्रमुख नेता उपस्थित थे?
कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संकलन का लोकार्पण किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और भाजपा सांसद मनोज तिवारी सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
दिल्ली विधानसभा परिसर में प्रस्तावित संग्रहालय क्या होगा?
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि विधानसभा परिसर में एक संग्रहालय स्थापित करने की योजना है, जहाँ इस ऐतिहासिक भवन और भारतीय लोकतंत्र से जुड़ी दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाएगा।
भारत की लोकतांत्रिक परंपराएँ संविधान से पहले कैसी थीं?
इस संकलन से स्पष्ट होता है कि भारत की संसदीय परंपराएँ 1950 के संविधान से बहुत पहले, 1920 के दशक में ही सक्रिय थीं। ब्रिटिश शासनकाल में भी भारतीय नेताओं ने केंद्रीय विधानसभा में जनविरोधी विधेयकों को गिराकर लोकतांत्रिक शक्ति का प्रदर्शन किया था।
राष्ट्र प्रेस
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