विट्ठलभाई पटेल की 400 बैठकों का 89 खंडों में संकलन जारी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया लोकार्पण
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के दिल्ली विधानसभा परिसर में 28 मई 2026 को एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में केंद्रीय विधानसभा की 1924 से 1930 तक की कार्यवाहियों का विस्तृत संकलन सार्वजनिक किया गया। यह संकलन 89 खंडों में तैयार किया गया है, जिसमें उस दौर की संसदीय बहसों, परंपराओं और ऐतिहासिक निर्णयों का पूरा दस्तावेज़ीकरण है। इस संकलन का लोकार्पण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया।
संकलन का महत्व और विरासत
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल पुस्तकों का विमोचन नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक विरासत को सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बताया कि विट्ठलभाई पटेल देश के पहले भारतीय निर्वाचित अध्यक्ष थे और उनकी अध्यक्षता में लगभग 400 बैठकों का संचालन हुआ था। यह संकलन नई पीढ़ी को भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की गहराई और प्राचीनता से परिचित कराएगा।
डिजिटल भविष्य के साथ ऐतिहासिक संरक्षण
विजेंद्र गुप्ता ने यह भी बताया कि दिल्ली विधानसभा आज पूरी तरह पेपरलेस और डिजिटाइज्ड हो चुकी है और सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही विधानसभा परिसर में एक संग्रहालय स्थापित करने की योजना है, जहाँ इस ऐतिहासिक भवन और भारतीय लोकतंत्र से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाएगा।
सांसद मनोज तिवारी की प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि विजेंद्र गुप्ता के विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद से इस ऐतिहासिक भवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि जहाँ आज दिल्ली विधानसभा स्थित है, वहाँ कभी देश का केंद्रीय सचिवालय हुआ करता था और विट्ठलभाई पटेल जैसे नेता इसकी अध्यक्षता करते थे।
ब्रिटिश शासन में भारतीय प्रतिरोध
तिवारी ने इन दस्तावेज़ों के हवाले से बताया कि अंग्रेज़ी शासनकाल में भी भारतीय नेताओं ने जनविरोधी विधेयकों का डटकर विरोध किया और कई बार ब्रिटिश सरकार के प्रस्तावित विधेयक इसी सदन में गिरा दिए गए। उन्होंने कहा कि उस समय पूरी दुनिया में ब्रिटेन का वर्चस्व था, फिर भी भारतीय नेताओं ने इसी भवन में लोकतांत्रिक शक्ति का परिचय दिया।
संविधान से पहले की लोकतांत्रिक जड़ें
तिवारी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत को संविधान 1950 में मिला, परंतु लोकतांत्रिक सोच और संसदीय परंपराएँ उससे कहीं पहले से जड़ें जमा चुकी थीं। विट्ठलभाई पटेल जैसे नेताओं ने उस कठिन दौर में भी लोकतांत्रिक मूल्यों को जीवंत रखा। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। यह संकलन भारतीय संसदीय इतिहास के शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत बनेगा।