ऑपरेशन महादेव: पहलगाम के आतंकवादियों का 250 किमी पीछा कर किया गया निष्कासित
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पिछले वर्ष 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस घटना में 26 निर्दोष लोगों की अविचल हत्या की गई, जिनमें से 25 पर्यटक थे। आतंकियों ने पहचान पूछकर इनकी बर्बर हत्या की, जिससे मानवता पर कलंक लगा और देश में आक्रोश फैल गया।
भारतीय सेना ने इस घटना के बाद 93 दिनों तक ऑपरेशन महादेव चलाया, जिसमें आतंकियों का घेराबंदी किया गया। पैरा स्पेशल फोर्सेस की एक टीम ने कठिन रास्तों पर चलते हुए आतंकियों का करीब 250 किलोमीटर तक पीछा किया।
28 जुलाई 2025 को इस ऑपरेशन का समापन हुआ और आतंकियों को निष्क्रिय किया गया। अंतिम चरण में 10 घंटे में 3 किलोमीटर की पैदल घेराबंदी की गई, जिसके परिणामस्वरूप तीनों आतंकियों को नष्ट कर दिया गया।
इस प्रकार, 93 दिनों तक चलने वाले इस ऑपरेशन में न्याय का सुनिश्चित किया गया। आतंकवादी हमले के तुरंत बाद भारतीय सेना की टीमें घटना स्थल पर पहुंच गईं और जांच की प्रक्रिया शुरू की।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और एक सैन्य अधिकारी की जानकारी के आधार पर तीन पाकिस्तानी आतंकियों की पहचान की गई। खुफिया तंत्र, मानव इंटेलिजेंस, तकनीकी इनपुट और हमले में बचे लोगों की मदद से आतंकियों के नाम सामने आए।
आतंकियों के नाम थे सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान भाई, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे। इसके बाद सेना ने आतंकियों की तलाश में एक व्यापक अभियान शुरू किया।
सुरक्षा बलों ने भागने के सभी संभावित रास्तों को सील कर दिया और आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखी। समय, स्थान और संसाधनों के विश्लेषण के आधार पर ऑपरेशन को लगातार अपडेट किया गया। इस बीच, पता चला कि ये आतंकवादी दक्षिण कश्मीर के हापटनार, बुगमार और त्राल से होते हुए दाचीगाम के घने जंगलों और महादेव रिज की ओर बढ़ रहे थे। यह क्षेत्र घने जंगलों और ऊंचाई के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण था।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, मई के अंत तक सुरक्षा एजेंसियों के पास एक स्पष्ट दृष्टिकोण आ चुका था। इसके साथ ही, आगामी यात्रा को देखते हुए खतरा बढ़ गया था। इसलिए ऑपरेशन का दायरा बढ़ाया गया और विशेष बलों, विशेषकर पैरा स्पेशल फोर्सेस को शामिल किया गया। यह ऑपरेशन पूरी तरह से बहु-एजेंसी समन्वय का उदाहरण बना।
भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और खुफिया एजेंसियों ने मिलकर काम किया। शुरुआत में 300 वर्ग किलोमीटर में फैले ऑपरेशन क्षेत्र को धीरे-धीरे 25 वर्ग किलोमीटर तक सीमित किया गया। इस दौरान आधुनिक तकनीक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ड्रोन, रिमोट पायलटेड एयरक्राफ्ट, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और अन्य निगरानी उपकरणों का व्यापक उपयोग किया गया। लगातार निगरानी से आतंकियों पर दबाव बना रहा और उनके भागने के रास्ते बंद होते गए।
10 जुलाई 2025 को सेना का यह ऑपरेशन निर्णायक चरण में पहुंच गया। लिडवास, हरवन और दाचीगाम क्षेत्रों में बड़े स्तर पर घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया गया।
सुरक्षा बलों ने सभी संभावित रास्तों को बंद कर आतंकियों को सीमित क्षेत्र में कैद कर दिया। अंततः 28 जुलाई 2025 को ऑपरेशन अपने अंतिम चरण में पहुंचा। पैरा स्पेशल फोर्सेस की एक टीम ने कठिन रास्तों पर चलकर पैदल घेराबंदी की और सटीक कार्रवाई में तीनों आतंकियों को मार गिराया गया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन महादेव भारतीय सेना की दृढ़ता, रणनीतिक कौशल और देश की सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि जब खुफिया एजेंसियां, सुरक्षा बल और आधुनिक तकनीक एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी निर्णायक सफलता हासिल की जा सकती है।
इस ऑपरेशन ने देशवासियों का भरोसा मजबूत किया है। सेना ने यह साबित कर दिया कि आतंक फैलाने वाले चाहे कहीं भी छिप जाएं, उन्हें न्याय के कटघरे तक लाया जाएगा।