पद्मश्री डॉ. रजनीकांत बोले — मोदी के 12 वर्षों में जीआई टैगिंग और डिजिटल इंडिया ने बदली भारत की वैश्विक पहचान
सारांश
मुख्य बातें
भुवनेश्वर में 26 मई 2026 को 'जीआई मैन' के नाम से विख्यात पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया, जीआई टैगिंग और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने भारत की वैश्विक छवि को नई ऊँचाई दी है। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जो पहचान मिली है, वह पहले कभी नहीं मिली थी।
जीआई टैगिंग और वैश्विक ब्रांडिंग
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया था कि काशी समेत देशभर के जीआई टैग वाले उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री की पाँच देशों की विदेश यात्रा के दौरान 20 से अधिक जीआई उत्पाद विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को उपहार स्वरूप भेंट किए गए। उनके अनुसार, यह भारत की ब्रांडिंग का अद्भुत उदाहरण है, जिससे लाखों कारीगरों, बुनकरों, शिल्पियों और किसानों को रोज़गार और पहचान मिल रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जीआई टैग यह सुनिश्चित करता है कि कोई उत्पाद किस राज्य और किस क्षेत्र से संबंधित है। डॉ. रजनीकांत ने प्रधानमंत्री मोदी को जीआई टैग का सबसे बड़ा ब्रांड एंबेसडर बताते हुए कहा कि उनके प्रयासों से भारतीय उत्पाद कानूनी सुरक्षा के साथ दुनिया के बाज़ारों तक पहुँच रहे हैं।
वाराणसी का कायाकल्प और धार्मिक पर्यटन
वाराणसी में हुए विकास कार्यों की सराहना करते हुए डॉ. रजनीकांत ने कहा कि नमो घाट समेत पूरे शहर में व्यापक बदलाव दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि घाटों की सफाई, महिलाओं के लिए सुविधाएँ और बेहतर यातायात व्यवस्था ने वाराणसी को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र बना दिया है। एयरपोर्ट से शहर पहुँचने में अब बहुत कम समय लगता है और रोप-वे जैसी आधुनिक सुविधाओं का विकास भी किया जा रहा है।
उन्होंने सोमनाथ, विश्वनाथ, महाकाल और केदारनाथ जैसे धार्मिक स्थलों के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि ये स्थल अब केवल आस्था के केंद्र नहीं रहे, बल्कि पर्यटन और रोज़गार के नए अवसर भी बन रहे हैं।
डिजिटल इंडिया और पारदर्शी शासन
डॉ. रजनीकांत ने कहा कि डिजिटल इंडिया, उज्ज्वला योजना और मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने देश के विकास को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि कोविड काल और नोटबंदी जैसे कठिन दौर में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और सरकारी लाभ सीधे लोगों के बैंक खातों तक पहुँचने लगे। उनके अनुसार, आज भारत के डिजिटल मॉडल को पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है।
उन्होंने वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के मंत्र पर ज़ोर देते हुए कहा कि जीआई टैगिंग से स्वदेशी उत्पादों को वैश्विक बाज़ार में ठोस पहचान मिली है।
पद्म पुरस्कार प्रक्रिया पर विचार
डॉ. रजनीकांत ने पद्म पुरस्कार की नई प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि अब बिना प्रचार-प्रसार के समाज के लिए काम करने वाले लोगों को भी सम्मान मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें आज तक यह जानकारी नहीं है कि किसने उनका नामांकन किया था। 25 जनवरी की मध्यरात्रि में जब उन्हें पद्म पुरस्कार सूची में अपना नाम मिला तो वह भावुक हो गए।
ओडिशा और राष्ट्रीय विकास का संदर्भ
ओडिशा का उल्लेख करते हुए डॉ. रजनीकांत ने कहा कि यहाँ की कला, शिल्प, विरासत और खान-पान को भी नई पहचान मिल रही है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी से उनकी पहली मुलाकात 2014 में हुई थी और उसके बाद लगातार संवाद बना रहा। उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों की ओर से प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके फैसलों का दूरगामी प्रभाव देश के विकास पर दिखाई देगा।