12 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पद्मश्री डॉ. रजनीकांत बोले — मोदी के 12 वर्षों में जीआई टैगिंग और डिजिटल इंडिया ने बदली भारत की वैश्विक पहचान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पद्मश्री डॉ. रजनीकांत बोले — मोदी के 12 वर्षों में जीआई टैगिंग और डिजिटल इंडिया ने बदली भारत की वैश्विक पहचान

सारांश

मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल पर 'जीआई मैन' पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का स्पष्ट संदेश — जीआई टैगिंग, डिजिटल इंडिया और DBT ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी है। 20 से अधिक जीआई उत्पाद राष्ट्राध्यक्षों को उपहार में देना उन्होंने भारत की ब्रांडिंग का अद्भुत उदाहरण बताया।

मुख्य बातें

रजनीकांत ने 26 मई को प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल की सराहना की।
प्रधानमंत्री की हालिया विदेश यात्रा में 20 से अधिक जीआई उत्पाद राष्ट्राध्यक्षों को उपहार स्वरूप दिए गए।
रजनीकांत ने DBT को बिचौलियों की भूमिका खत्म करने का प्रमुख ज़रिया बताया।
वाराणसी में नमो घाट , रोप-वे और बेहतर यातायात व्यवस्था को विश्वस्तरीय पर्यटन का आधार बताया।
रजनीकांत को 25 जनवरी की मध्यरात्रि में पद्म पुरस्कार सूची में नाम मिला; नामांकनकर्ता की जानकारी उन्हें आज तक नहीं।
ओडिशा की कला, शिल्प और विरासत को भी नई पहचान मिलने की बात उन्होंने रेखांकित की।

भुवनेश्वर में 26 मई 2026 को 'जीआई मैन' के नाम से विख्यात पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया, जीआई टैगिंग और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने भारत की वैश्विक छवि को नई ऊँचाई दी है। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जो पहचान मिली है, वह पहले कभी नहीं मिली थी।

जीआई टैगिंग और वैश्विक ब्रांडिंग

डॉ. रजनीकांत ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया था कि काशी समेत देशभर के जीआई टैग वाले उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री की पाँच देशों की विदेश यात्रा के दौरान 20 से अधिक जीआई उत्पाद विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को उपहार स्वरूप भेंट किए गए। उनके अनुसार, यह भारत की ब्रांडिंग का अद्भुत उदाहरण है, जिससे लाखों कारीगरों, बुनकरों, शिल्पियों और किसानों को रोज़गार और पहचान मिल रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जीआई टैग यह सुनिश्चित करता है कि कोई उत्पाद किस राज्य और किस क्षेत्र से संबंधित है। डॉ. रजनीकांत ने प्रधानमंत्री मोदी को जीआई टैग का सबसे बड़ा ब्रांड एंबेसडर बताते हुए कहा कि उनके प्रयासों से भारतीय उत्पाद कानूनी सुरक्षा के साथ दुनिया के बाज़ारों तक पहुँच रहे हैं।

वाराणसी का कायाकल्प और धार्मिक पर्यटन

वाराणसी में हुए विकास कार्यों की सराहना करते हुए डॉ. रजनीकांत ने कहा कि नमो घाट समेत पूरे शहर में व्यापक बदलाव दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि घाटों की सफाई, महिलाओं के लिए सुविधाएँ और बेहतर यातायात व्यवस्था ने वाराणसी को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र बना दिया है। एयरपोर्ट से शहर पहुँचने में अब बहुत कम समय लगता है और रोप-वे जैसी आधुनिक सुविधाओं का विकास भी किया जा रहा है।

उन्होंने सोमनाथ, विश्वनाथ, महाकाल और केदारनाथ जैसे धार्मिक स्थलों के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि ये स्थल अब केवल आस्था के केंद्र नहीं रहे, बल्कि पर्यटन और रोज़गार के नए अवसर भी बन रहे हैं।

डिजिटल इंडिया और पारदर्शी शासन

डॉ. रजनीकांत ने कहा कि डिजिटल इंडिया, उज्ज्वला योजना और मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने देश के विकास को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि कोविड काल और नोटबंदी जैसे कठिन दौर में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और सरकारी लाभ सीधे लोगों के बैंक खातों तक पहुँचने लगे। उनके अनुसार, आज भारत के डिजिटल मॉडल को पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है।

उन्होंने वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के मंत्र पर ज़ोर देते हुए कहा कि जीआई टैगिंग से स्वदेशी उत्पादों को वैश्विक बाज़ार में ठोस पहचान मिली है।

पद्म पुरस्कार प्रक्रिया पर विचार

डॉ. रजनीकांत ने पद्म पुरस्कार की नई प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि अब बिना प्रचार-प्रसार के समाज के लिए काम करने वाले लोगों को भी सम्मान मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें आज तक यह जानकारी नहीं है कि किसने उनका नामांकन किया था। 25 जनवरी की मध्यरात्रि में जब उन्हें पद्म पुरस्कार सूची में अपना नाम मिला तो वह भावुक हो गए।

ओडिशा और राष्ट्रीय विकास का संदर्भ

ओडिशा का उल्लेख करते हुए डॉ. रजनीकांत ने कहा कि यहाँ की कला, शिल्प, विरासत और खान-पान को भी नई पहचान मिल रही है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी से उनकी पहली मुलाकात 2014 में हुई थी और उसके बाद लगातार संवाद बना रहा। उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों की ओर से प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके फैसलों का दूरगामी प्रभाव देश के विकास पर दिखाई देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इन टैग्स से कारीगरों की आय में मापनीय वृद्धि हुई है या नहीं — यह आँकड़ा अभी सार्वजनिक रूप से व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। DBT की पारदर्शिता की प्रशंसा वैध है, किंतु नोटबंदी के दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों पर अर्थशास्त्रियों में अभी भी मतभेद हैं। वाराणसी के विकास की तस्वीर आकर्षक है, पर यह सवाल भी उतना ही ज़रूरी है कि इस विकास का लाभ स्थानीय छोटे व्यापारियों और नाविकों तक किस हद तक पहुँचा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्मश्री डॉ. रजनीकांत कौन हैं और उन्हें 'जीआई मैन' क्यों कहा जाता है?
पद्मश्री डॉ. रजनीकांत भुवनेश्वर स्थित जीआई (भौगोलिक संकेत) विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने भारतीय उत्पादों को जीआई टैग दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी कारण उन्हें 'जीआई मैन' के नाम से जाना जाता है और उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया है।
जीआई टैगिंग से भारतीय कारीगरों को क्या फायदा होता है?
जीआई टैग यह कानूनी रूप से प्रमाणित करता है कि कोई उत्पाद किस राज्य और क्षेत्र से संबंधित है, जिससे नकल रोकी जाती है और उत्पाद को वैश्विक बाज़ार में विशिष्ट पहचान मिलती है। डॉ. रजनीकांत के अनुसार, इससे लाखों कारीगरों, बुनकरों, शिल्पियों और किसानों को रोज़गार और पहचान मिल रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश यात्रा में कितने जीआई उत्पाद उपहार में दिए?
डॉ. रजनीकांत के अनुसार, हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी की पाँच देशों की यात्रा के दौरान 20 से अधिक जीआई उत्पाद विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को उपहार स्वरूप भेंट किए गए। उन्होंने इसे भारत की वैश्विक ब्रांडिंग का अद्भुत उदाहरण बताया।
वाराणसी में मोदी सरकार के कार्यकाल में क्या प्रमुख बदलाव हुए?
डॉ. रजनीकांत के अनुसार, वाराणसी में नमो घाट सहित पूरे शहर में व्यापक बदलाव आया है। घाटों की सफाई, महिलाओं के लिए सुविधाएँ, बेहतर यातायात और रोप-वे जैसी आधुनिक सुविधाओं ने वाराणसी को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र बना दिया है।
पद्म पुरस्कार नामांकन प्रक्रिया में क्या बदलाव आया है?
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि अब कोई भी नागरिक किसी योग्य व्यक्ति को पद्म पुरस्कार के लिए नामित कर सकता है, जिससे बिना राजनीतिक पहुँच के समाज के लिए काम करने वाले लोगों को भी सम्मान मिल रहा है। डॉ. रजनीकांत को स्वयं 25 जनवरी की मध्यरात्रि में अपना नाम सूची में मिला और उन्हें आज तक नामांकनकर्ता की जानकारी नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 4 महीने पहले