पालघर में 300 मिमी बारिश से नालासोपारा में ट्रैक जलमग्न, वसई-विरार के बीच ट्रेन सेवाएं ठप
सारांश
मुख्य बातें
पालघर जिले के नालासोपारा में 6 जुलाई को कुछ ही घंटों में 300 मिमी से अधिक बारिश दर्ज होने के बाद रेलवे ट्रैक पर पानी भर गया, जिससे वसई, नालासोपारा और विरार के बीच लोकल व एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बंद हो गया। महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और पालघर समेत कई जिलों में जारी भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, जहाँ पुणे में हाईवे और रेलवे ट्रैक दोनों बाधित हो गए हैं।
बारिश की स्थिति और ट्रैक पर जलभराव
वेस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने बताया कि पिछले दो दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच बारिश और तेज हो गई, जिसके चलते पालघर में कुछ ही घंटों में 300 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई। नालासोपारा में स्थिति इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि शहर का जलस्तर और रेलवे ट्रैक का जलस्तर एक ही सतह पर आ गए हैं, जिससे ट्रैक से पानी बाहर नहीं निकल पा रहा।
ट्रेन सेवाओं पर असर
अभिषेक के अनुसार, चर्चगेट से वसई रोड तक लोकल ट्रेनें देरी से चल रही हैं, जबकि डहाणू रोड से विरार के बीच भी सीमित सेवा जारी है। हालाँकि, विरार-नालासोपारा-वसई के बीच का खंड सबसे अधिक प्रभावित है और यहाँ परिचालन पूरी तरह ठप है। मुंबई आने वाली मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों को नियंत्रित गति से लाया जा रहा है।
कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को पालघर, विरार, वापी और वलसाड पर ही शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया गया है, जबकि कुछ ट्रेनों के समय-सारणी में बदलाव किया गया है। रेलवे का प्रयास है कि ट्रेनें दो स्टेशनों के बीच न रुकें, ताकि यात्रियों को स्टेशन पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
यात्रियों को राहत देने की कोशिश
अभिषेक ने बताया कि वरिष्ठ रेलवे अधिकारी मौके पर तैनात हैं और कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही है। प्रभावित ट्रेनों की जानकारी सोशल मीडिया, समाचार माध्यमों और स्टेशन पर की जा रही घोषणाओं के ज़रिए यात्रियों तक पहुँचाई जा रही है।
परिचालन कब होगा सामान्य
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रैक पर जमा पानी का स्तर कम होने के बाद ही वसई-नालासोपारा-विरार खंड पर ट्रेन सेवाएं फिर से शुरू हो सकेंगी। बारिश की तीव्रता और जल-निकासी की गति को देखते हुए सामान्य स्थिति की समय-सीमा अभी अनिश्चित है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के चरम पर पश्चिमी रेलवे नेटवर्क पर यात्री दबाव सबसे अधिक होता है।