ललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन: पन्ना अलाइनमेंट का पुनः तकनीकी परीक्षण, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिए निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 28 मई 2026 को रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिए कि ललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन के पन्ना जिले से गुजरने वाले खंड के वर्तमान अलाइनमेंट का पुनः तकनीकी परीक्षण कराया जाए। यह परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली एक महत्वाकांक्षी रेल कनेक्टिविटी पहल है, जो बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के दूरस्थ इलाकों को मुख्यधारा के रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। वैष्णव ने परियोजना से जुड़े ड्रोन फोटोग्राफ्स और टोपो शीट का विस्तृत अध्ययन करने के बाद यह निर्देश जारी किए।
पुनः परीक्षण की आवश्यकता क्यों
रेल लाइन का यह खंड पन्ना के सघन जंगल क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिससे वन संपदा और पर्यावरण के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। सतना से खजुराहो के बीच चल रहे निर्माण कार्य की गति अपेक्षाकृत धीमी बताई जा रही है। इन परिस्थितियों को देखते हुए रेल मंत्री ने विशेषज्ञों की टीम गठित कर सभी संभावित अलाइनमेंट विकल्पों का अध्ययन करने का आदेश दिया है, ताकि पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर
रेल मंत्री वैष्णव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परियोजना के प्रभावित क्षेत्र में जितने पेड़ काटे जाएंगे, उनसे दोगुने से अधिक पेड़ आगामी मानसून से पूर्व लगाए जाएं। यह कदम भारतीय रेल की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने पर बल दिया जाता है। गौरतलब है कि पन्ना का वन क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।
परियोजना का महत्व
ललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन परियोजना का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। यह परियोजना मध्य प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र को झांसी–भोपाल मुख्य रेल मार्ग से जोड़ेगी, जिससे क्षेत्रीय संपर्क, रोजगार सृजन और आवागमन को नई गति मिलने की संभावना है। बुंदेलखंड और विंध्य जैसे पिछड़े क्षेत्रों के लिए यह परियोजना आर्थिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
आगे की राह
विशेषज्ञ दल के गठन के बाद पुनः तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी और सभी संभावित विकल्पों की समीक्षा के बाद नया अलाइनमेंट तय किया जाएगा। रेलवे का लक्ष्य है कि निर्माण गति बनाए रखते हुए वन क्षेत्र को अधिकतम सुरक्षा प्रदान की जाए। मानसून से पूर्व वृक्षारोपण अभियान इस दिशा में पहला ठोस कदम होगा।