विक्रमशिला-कटरिया नई रेल लाइन: पूर्व मध्य रेलवे महाप्रबंधक ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया, ₹2,549 करोड़ की परियोजना
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने सोमवार, 15 जून 2026 को बिहार में विक्रमशिला-कटरिया नई रेल लाइन परियोजना के निर्माण स्थल का सीधे जाकर निरीक्षण किया। इससे पहले उन्होंने पाटलिपुत्र-शाहपुर पटोरी-बरौनी-नौगछिया रेलखंड का विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण भी किया, जिसमें स्टेशनों, पुल-पुलियों, ओएचई प्रणाली और ट्रैक की सुरक्षा व मजबूती की समीक्षा की गई। यह निरीक्षण ₹2,549 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया।
निरीक्षण का क्रम और मुख्य स्थल
महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह पहले नौगछिया स्टेशन पहुँचे और वहाँ से कटरिया के ऊपरी हिस्से के निर्माण स्थल का जायज़ा लिया। इसके बाद उन्होंने भागलपुर की ओर स्थित निर्माण स्थल और नए प्रस्तावित स्टेशन साइट का भी निरीक्षण किया। इस प्रकार एक ही दिन में परियोजना के दोनों सिरों — कटरिया और विक्रमशिला — की स्थिति का प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया गया।
गंगा पर 2.44 किमी का ऐतिहासिक रेल पुल
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत गंगा नदी पर 2.44 किमी लंबी डबल रेल लाइन वाले पुल का निर्माण किया जाएगा। इस पुल की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मुख्य पुल का डिज़ाइन और ड्राइंग कार्य अगले तीन महीनों में पूरा करने का लक्ष्य है, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। यह पुल वाई (Y) आकार का होगा, जो उत्तर में कटरिया व नवगछिया और दक्षिण में विक्रमशिला व शिवनारायणपुर स्टेशनों को जोड़ेगा।
भूमि अधिग्रहण की स्थिति
परियोजना के लिए पुल के दोनों ओर रेल लाइन बिछाने हेतु 180 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें से आधे से अधिक निजी भूमि है, जिसके अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह भूमि अधिग्रहण परियोजना की समयसीमा के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है, क्योंकि भारत में बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में भूमि विवाद अक्सर देरी का कारण बनते हैं।
परियोजना का महत्व और क्षेत्रीय प्रभाव
26 किमी लंबी यह नई रेल लाइन विक्रमशिला स्टेशन (भागलपुर-साहिबगंज रेलखंड) को कटरिया स्टेशन (कटिहार-बरौनी रेलखंड) से जोड़ेगी। इस परियोजना के पूरा होने पर बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र का अंग क्षेत्र से सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा — एक ऐसा जुड़ाव जो दशकों से इन क्षेत्रों की माँग रही है। गौरतलब है कि कोसी और सीमांचल क्षेत्र बाढ़ की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं और बेहतर रेल संपर्क आपदा प्रबंधन में भी सहायक होगा।
आगे की राह
मुख्य पुल का डिज़ाइन कार्य तीन माह में पूरा होने के बाद निर्माण का अगला चरण शुरू होगा। 180 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की गति परियोजना की समग्र प्रगति तय करेगी। पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, सभी प्रक्रियाएँ निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।