16 जुलाई 2026
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चतरा-गया रेल लाइन: सांसद कालीचरण सिंह बोले — ₹531 करोड़ जारी, जमीन अधिग्रहण होगा तेज

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चतरा-गया रेल लाइन: सांसद कालीचरण सिंह बोले — ₹531 करोड़ जारी, जमीन अधिग्रहण होगा तेज

सारांश

चतरा की ७५ साल पुरानी रेल माँग अब हकीकत के करीब है — ₹531 करोड़ जारी, 'विशेष रेल परियोजना' का दर्जा मिला, और सांसद कालीचरण सिंह ने जमीन अधिग्रहण में तेज़ी का वादा किया। 75.1 किमी लंबी यह लाइन बिहार और झारखंड को जोड़ेगी।

मुख्य बातें

चतरा-गया रेल लाइन को रेल मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से 'विशेष रेल परियोजना' का दर्जा दिया है।
परियोजना के लिए ₹531 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है।
परैया-चतरा नई रेल लाइन की कुल लंबाई 75.1 किलोमीटर होगी और यह बिहार व झारखंड को जोड़ेगी।
BJP सांसद कालीचरण सिंह ने जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया तेज करने और बाधाएँ दूर करने का आश्वासन दिया।
चतरा जिले की यह माँग आज़ादी के बाद से 75-78 वर्षों से लंबित थी।
चिरमिरी रेल लाइन परियोजना की अधिसूचना भी जारी; अगले 2-3 महीनों में फ्लाईओवर टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद।

झारखंड के चतरा संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद कालीचरण सिंह ने 29 मई को घोषणा की कि चतरा-गया रेल लाइन परियोजना को 'विशेष रेल परियोजना' का दर्जा मिल चुका है और इसके लिए ₹531 करोड़ की राशि जारी कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर तेज किया जाएगा और इस दौरान आने वाली हर बाधा को दूर किया जाएगा।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

परैया-चतरा नई रेल लाइन परियोजना बिहार और झारखंड को जोड़ने वाली एक रणनीतिक रेलवे योजना है, जिसकी कुल लंबाई 75.1 किलोमीटर होगी। रेल मंत्रालय ने इसे आधिकारिक रूप से 'विशेष रेल परियोजना' घोषित किया है। सांसद कालीचरण सिंह के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चतरा की दशकों पुरानी माँग को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को निर्देश दिए थे कि इस क्षेत्र को रेल सुविधा से जोड़ा जाए।

दशकों पुरानी माँग को मिली मंज़िल

चतरा जिले के निवासियों की यह माँग देश की आज़ादी के बाद से, यानी लगभग 75 से 78 वर्षों से लंबित थी। सांसद ने इसे क्षेत्र का 'सौभाग्य' बताते हुए कहा कि यह उनके लोकसभा क्षेत्र का दूसरा बड़ा विकास कार्य है। इसके अतिरिक्त, चिरमिरी रेल लाइन परियोजना की अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है।

आगामी विकास कार्य

सांसद कालीचरण सिंह ने बताया कि चतरा लोकसभा क्षेत्र की प्रत्येक विधानसभा के लिए 4-5 प्रमुख परियोजनाएँ अलग-अलग चिह्नित की गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगले दो से तीन महीनों में फ्लाईओवर निर्माण की समस्या भी सुलझकर टेंडर प्रक्रिया की ओर बढ़ेगी।

क्या होगा आगे

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य का रास्ता साफ होगा। ₹531 करोड़ की स्वीकृत राशि और 'विशेष दर्जे' के साथ यह परियोजना बिहार-झारखंड सीमावर्ती क्षेत्र में कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई गति देने की क्षमता रखती है। प्रशासनिक और भू-अधिग्रहण संबंधी अड़चनें दूर होने पर निर्माण की समयसीमा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आर्थिक समावेश का द्वार है — यह बात 75 साल की प्रतीक्षा खुद कहती है। हालाँकि, 'विशेष दर्जे' और ₹531 करोड़ की घोषणा के बाद असली कसौटी जमीन अधिग्रहण की गति होगी, जो झारखंड में ऐतिहासिक रूप से विवादास्पद और धीमी रही है। यह भी गौरतलब है कि घोषणाएँ और अधिसूचनाएँ पहले भी हुई हैं — इस बार 'विशेष दर्जे' का व्यावहारिक अर्थ तभी सिद्ध होगा जब निर्माण की समयसीमा और जवाबदेही तंत्र सार्वजनिक किए जाएँ।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चतरा-गया रेल लाइन परियोजना क्या है?
यह परैया से चतरा तक प्रस्तावित 75.1 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन है जो बिहार और झारखंड को जोड़ेगी। रेल मंत्रालय ने इसे 'विशेष रेल परियोजना' का दर्जा दिया है और इसके लिए ₹531 करोड़ जारी किए गए हैं।
इस परियोजना को 'विशेष रेल परियोजना' का दर्जा क्यों मिला?
सांसद कालीचरण सिंह के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चतरा क्षेत्र की दशकों पुरानी माँग को देखते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को विशेष निर्देश दिए, जिसके फलस्वरूप इसे विशेष दर्जा और प्राथमिकता-आधारित फंडिंग मिली।
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी?
सांसद ने कहा है कि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज की जाएगी और सभी बाधाएँ दूर की जाएँगी, लेकिन कोई निश्चित समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिग्रहण पूरा होने के बाद ही जमीनी निर्माण शुरू हो सकेगा।
चतरा लोकसभा क्षेत्र में और कौन सी बड़ी परियोजनाएँ चल रही हैं?
सांसद कालीचरण सिंह ने बताया कि चिरमिरी रेल लाइन परियोजना की अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। इसके अलावा, अगले 2-3 महीनों में फ्लाईओवर निर्माण का टेंडर जारी होने की उम्मीद है और प्रत्येक विधानसभा के लिए 4-5 प्रमुख परियोजनाएँ चिह्नित हैं।
इस रेल लाइन से किसे फायदा होगा?
चतरा जिले के निवासियों को सबसे अधिक लाभ होगा, जो आज़ादी के बाद से रेल कनेक्टिविटी से वंचित थे। यह लाइन बिहार और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार, रोज़गार और यातायात को नई गति देगी।
राष्ट्र प्रेस
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