20 अक्टूबर 2026
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परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: मजीठिया ने हथियार लाइसेंस विवाद पर AAP सरकार को घेरा, CBI जाँच शुरू

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परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: मजीठिया ने हथियार लाइसेंस विवाद पर AAP सरकार को घेरा, CBI जाँच शुरू

सारांश

मानसा के नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या अब एक बड़े प्रशासनिक विवाद में बदल गई है। अकाली दल के मजीठिया ने आरोप लगाया कि हत्यारे को हथियार लाइसेंस देने वाले अधिकारी को राज्य सरकार ने OSD बनाया। CM मान ने मामला CBI को सौंप दिया है।

मुख्य बातें

बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि डॉ.
निर्मल ओसेप्पाचन ने एडीसी (जनरल), मानसा के रूप में आरोपी अश्विनी कुमार को हथियार लाइसेंस जारी किया।
मजीठिया का सवाल — उसी अधिकारी को बाद में मुख्य सचिव के.ए.पी.
सिन्हा का ओएसडी क्यों बनाया गया?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जाँच CBI को सौंपने की घोषणा की।
मान ने कहा कि परिवार की माँग का सम्मान करते हुए यह फैसला लिया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ड्रग तस्करी से जुड़ी बढ़ती चिंताओं के बीच पंजाब दौरे पर हैं।

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने 20 अक्टूबर 2026 को परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के सिलसिले में पंजाब सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। मजीठिया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि आरोपी अश्विनी कुमार को हथियार लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारी को बाद में मुख्य सचिव का ओएसडी नियुक्त किया गया — और यह सवाल उठाया कि यह नियुक्ति क्यों हुई।

मजीठिया के आरोप और उठाए सवाल

मजीठिया ने एक्स पर लिखा कि डॉ. निर्मल ओसेप्पाचन ने कथित तौर पर एडीसी (जनरल), मानसा के पद पर रहते हुए आरोपी अश्विनी कुमार को हथियार का लाइसेंस जारी किया था। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसी अधिकारी को बाद में पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा का ओएसडी बनाया गया।

मजीठिया ने इस संबंध को 'गुरु दोखी' की संज्ञा देते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार उस अधिकारी को संरक्षण दे रही है जिसने कथित हत्यारे को शस्त्र अनुज्ञप्ति उपलब्ध कराई। यह ऐसे समय में आया है जब झोटा की मौत ने पंजाब में नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर राज्यव्यापी बहस छेड़ दी है।

CBI जाँच का फैसला

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर पोस्ट कर घोषणा की कि परिवार की माँग का सम्मान करते हुए परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। मान ने लिखा, 'हम नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे परमिंदर सिंह झोटा के पिता और उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं।'

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रग तस्करों के विरुद्ध राज्य सरकार की कार्रवाई बिना किसी दबाव के जारी रहेगी। उन्होंने कहा, 'पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए जो भी कड़े कदम उठाने ज़रूरी होंगे, हम उनसे पीछे नहीं हटेंगे।'

झोटा कौन थे और यह मामला क्यों अहम है

परविंदर सिंह झोटा मानसा ज़िले में नशा-विरोधी अभियान से जुड़े एक सक्रिय कार्यकर्ता थे। उनकी हत्या ने पंजाब में ड्रग तस्करी के खिलाफ काम करने वालों की जान को होने वाले खतरे को फिर से उजागर किया है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है कि राज्य में किसी नशा-विरोधी कार्यकर्ता की हत्या का मामला सामने आया हो — इससे पहले भी ऐसी घटनाएँ राजनीतिक विवाद का केंद्र बन चुकी हैं।

आरोपी अश्विनी कुमार को हथियार लाइसेंस मिलने और उससे जुड़े अधिकारी की बाद की नियुक्ति का सवाल अब एक प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे के रूप में उभर रहा है, जिस पर विपक्ष लगातार दबाव बना रहा है।

गृह मंत्री का पंजाब दौरा

ड्रग तस्करी और उससे जुड़ी हिंसा पर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब के दौरे पर हैं। राज्य में बढ़ती नशा-संबंधी हिंसा और झोटा हत्याकांड ने इस दौरे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। विश्लेषकों के अनुसार, CBI जाँच की घोषणा इसी दबाव का परिणाम हो सकती है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह

मजीठिया के आरोपों पर पंजाब सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। CBI के जाँच अपने हाथ में लेने के बाद यह मामला और अधिक केंद्रीय जाँच के दायरे में आ जाएगा। आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि संबंधित अधिकारी की ओएसडी के रूप में नियुक्ति किस आधार पर हुई।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि हथियार लाइसेंस देने वाले अधिकारी की ओएसडी नियुक्ति के बारे में राज्य सरकार अब तक चुप क्यों है। पंजाब में नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं की हत्याओं का यह पैटर्न कोई नई घटना नहीं है — लेकिन हर बार जाँच के बाद जवाबदेही का अभाव बना रहता है। मजीठिया के आरोप राजनीतिक हो सकते हैं, लेकिन वे जो प्रशासनिक सवाल उठाते हैं, उनका जवाब सरकार को देना ही होगा। CBI अगर वाकई स्वतंत्र रूप से जाँच करे, तो लाइसेंस-से-नियुक्ति की कड़ी सबसे महत्वपूर्ण धागा होगी।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परविंदर सिंह झोटा कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के मानसा ज़िले में नशा-विरोधी अभियान से जुड़े एक सक्रिय कार्यकर्ता थे। उनकी हत्या आरोपी अश्विनी कुमार द्वारा किए जाने की बात सामने आई है, जो अब CBI जाँच के केंद्र में है।
झोटा हत्याकांड की CBI जाँच का फैसला क्यों लिया गया?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि झोटा के परिवार की माँग का सम्मान करते हुए यह मामला CBI को सौंपा गया है। परिवार को राज्य पुलिस जाँच पर भरोसा नहीं था।
बिक्रम सिंह मजीठिया ने हथियार लाइसेंस को लेकर क्या आरोप लगाए?
मजीठिया ने आरोप लगाया कि डॉ. निर्मल ओसेप्पाचन ने एडीसी (जनरल), मानसा के रूप में आरोपी अश्विनी कुमार को हथियार लाइसेंस जारी किया और उसी अधिकारी को बाद में मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा का ओएसडी नियुक्त किया गया। उन्होंने सरकार से इसका जवाब माँगा है।
डॉ. निर्मल ओसेप्पाचन कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है?
मजीठिया के अनुसार, डॉ. निर्मल ओसेप्पाचन पहले एडीसी (जनरल), मानसा के पद पर तैनात थे और इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर अश्विनी कुमार को हथियार लाइसेंस जारी किया। बाद में उन्हें पंजाब के मुख्य सचिव का ओएसडी नियुक्त किया गया — यही नियुक्ति अब विवाद का केंद्र है।
गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे का इस मामले से क्या संबंध है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ड्रग तस्करी और उससे जुड़ी हिंसा पर बढ़ती चिंताओं के बीच पंजाब दौरे पर हैं। झोटा हत्याकांड ने इस दौरे को और संवेदनशील बना दिया है। विश्लेषकों के अनुसार, केंद्रीय दबाव के चलते CBI जाँच की घोषणा और तेज़ हुई।
राष्ट्र प्रेस
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