15 अक्टूबर 2026
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परविंदर झोटा हत्याकांड: मजीठिया ने आरोपी के हथियार लाइसेंस नवीनीकरण पर पंजाब सरकार और पुलिस को घेरा

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परविंदर झोटा हत्याकांड: मजीठिया ने आरोपी के हथियार लाइसेंस नवीनीकरण पर पंजाब सरकार और पुलिस को घेरा

सारांश

नशाविरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मजीठिया का सवाल सीधा है — जिसका लाइसेंस चार बार रद्द हो चुका था, उसे दोबारा हथियार कैसे मिला? यह मामला अब केवल एक हत्या नहीं, पुलिस मिलीभगत और सत्ता के संरक्षण की पूरी कहानी बन चुका है।

मुख्य बातें

विक्रम सिंह मजीठिया ने परविंदर सिंह झोटा की हत्या के लिए पंजाब सरकार और पुलिस को जिम्मेदार ठहराया।
आरोपी का हथियार लाइसेंस चार बार रद्द होने और चार बार मामले दर्ज होने के बावजूद नवीनीकृत किया गया था।
मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर नशा नियंत्रण और कानून-व्यवस्था में नाकामी का सीधा आरोप लगाया।
AAP पर आरोप — गुरदासपुर के वांछित गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के परिजनों को जिला-स्तरीय पदों पर नियुक्त किया गया।
मजीठिया ने अवैध खनन और OSD नियुक्तियों को भ्रष्टाचार की एक ही श्रृंखला का हिस्सा बताया।
झोटा हत्याकांड को पंजाब के नशाविरोधी आंदोलन में निर्णायक मोड़ करार दिया गया।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता विक्रम सिंह मजीठिया ने 15 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में नशाविरोधी सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जिम्मेदारी सीधे तौर पर पंजाब सरकार और राज्य पुलिस पर डाली। झोटा की हत्या कथित तौर पर एक मेडिकल स्टोर मालिक ने की, जिसके हथियार लाइसेंस को बार-बार रद्द होने के बावजूद नवीनीकृत किया गया था — यही तथ्य मजीठिया के तर्क का केंद्र बना।

मुख्य आरोप: लाइसेंस रिन्यूअल में व्यवस्था की विफलता

मजीठिया ने कहा, 'यह पूरी तरह से सिस्टम की विफलता है। आरोपी का लाइसेंस चार बार रद्द किया जा चुका था और उसके खिलाफ चार बार मामले भी दर्ज हुए थे। फिर उसे दोबारा लाइसेंस कैसे मिल गया?' उन्होंने तर्क दिया कि यदि लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हुआ होता, तो वह परिस्थिति ही नहीं बनती जिसमें झोटा को गोली मारी गई।

उन्होंने यह भी कहा कि परविंदर सिंह झोटा लगातार आरोपी की नशीले पदार्थों की बिक्री को उजागर कर रहे थे, और इसी कारण वे सीधे निशाने पर आए। मजीठिया के अनुसार, यह घटना एकांकी नहीं, बल्कि पुलिस की बार-बार होने वाली नाकामियों की एक कड़ी है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा प्रहार

मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की आलोचना करते हुए कहा, 'आप उन्हें ईमानदार मुख्यमंत्री बताते हुए पोस्टर लगाते रहते हैं। आपको शर्म आनी चाहिए।' उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार न तो नशे की समस्या पर काबू पा रही है, न ही कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधार पा रही है।

उन्होंने 'कैश-फॉर-ट्रांसफर' मामले में जारी सीबीआई जांच का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि सरकार के 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' (OSD) इस दौरान क्या कर रहे थे और क्या उनका संबंध अवैध गतिविधियों से था।

गैंगस्टर कनेक्शन और OSD विवाद

मजीठिया ने यह भी आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने गुरदासपुर के वांछित गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के परिवार के सदस्यों को जिला परिषदों और ब्लॉक समितियों में अध्यक्ष पद दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राजबीर घुमन और उनके OSD के मामले को अवैध खनन और नशे के मुद्दों से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।

उनके अनुसार, 'अवैध खनन को बढ़ावा देने के लिए किस पुलिस अधिकारी को तैनात किया जाएगा, इसके लिए पैसे दिए जाते हैं।' मजीठिया ने दावा किया कि यह भ्रष्टाचार सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) और डिप्टी कमिश्नर (DC) स्तर तक पहुँचता है।

झोटा की हत्या: नशाविरोधी आंदोलन में निर्णायक मोड़

मजीठिया ने परविंदर सिंह झोटा की हत्या को पंजाब में नशाविरोधी लड़ाई का निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा, 'यह एक ऐसी चिंगारी है जिसने इस मुद्दे को और भड़का दिया है। झोटा ने लोगों की आवाज को बुलंद किया और सबको एकजुट कर दिया।' गौरतलब है कि पंजाब में नशे की समस्या वर्षों से राजनीतिक बहस के केंद्र में रही है और यह हत्याकांड इस बहस को नए सिरे से तीव्र कर सकता है।

आगे क्या

विपक्ष के इन आरोपों के बाद पंजाब सरकार और पुलिस पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है। हथियार लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया की स्वतंत्र जाँच की माँग तेज हो सकती है। झोटा हत्याकांड अब केवल एक अपराध की घटना नहीं, बल्कि पंजाब की नशा-राजनीति और पुलिस जवाबदेही के व्यापक सवालों से जुड़ चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक व्यवस्थागत सवाल है। असली मुद्दा यह है कि पंजाब में हथियार लाइसेंसिंग की समीक्षा प्रक्रिया आपराधिक रिकॉर्ड से स्वतंत्र रूप से काम करती दिखती है — यह खामी इस अकेले मामले तक सीमित नहीं है। मजीठिया के आरोप राजनीतिक हैं, यह सच है, लेकिन लाइसेंस नवीनीकरण का तथ्य स्वयं जाँच की माँग करता है, जो किसी भी दल की सरकार में उतनी ही जरूरी होती। पंजाब में नशे और अपराध का गठजोड़ तोड़ने का दावा तब तक खोखला रहेगा जब तक लाइसेंसिंग, तबादले और खनन मंजूरियों में पारदर्शिता नहीं आती।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परविंदर सिंह झोटा कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के एक नशाविरोधी सामाजिक कार्यकर्ता थे, जो नशीले पदार्थों की बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते थे। उनकी हत्या कथित तौर पर एक मेडिकल स्टोर मालिक ने की, जिसके खिलाफ झोटा लगातार शिकायतें दर्ज करा रहे थे।
मजीठिया ने आरोपी के हथियार लाइसेंस को लेकर क्या सवाल उठाए?
विक्रम सिंह मजीठिया के अनुसार, आरोपी का हथियार लाइसेंस चार बार रद्द किया जा चुका था और उसके खिलाफ चार बार आपराधिक मामले भी दर्ज हुए थे, फिर भी उसका लाइसेंस नवीनीकृत कर दिया गया। उनका कहना है कि बिना इस नवीनीकरण के, झोटा की हत्या को रोका जा सकता था।
मजीठिया ने पंजाब सरकार के OSD विवाद पर क्या कहा?
मजीठिया ने आरोप लगाया कि OSD नियुक्तियाँ अवैध खनन और नशे के मुद्दों पर नरमी बरतने के बदले पैसों के लेनदेन से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार SSP और DC स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचता है।
झोटा हत्याकांड का पंजाब की नशाविरोधी लड़ाई पर क्या असर पड़ेगा?
मजीठिया ने इस हत्या को पंजाब के नशाविरोधी आंदोलन का निर्णायक मोड़ बताया है। उनके अनुसार, झोटा की मौत ने लोगों को एकजुट किया है और इस मुद्दे को और अधिक तीव्रता दी है, जिससे सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ने की संभावना है।
AAP पर गैंगस्टर के परिजनों को पद देने का आरोप क्या है?
मजीठिया ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने गुरदासपुर के वांछित गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के परिवार के सदस्यों को जिला परिषदों और ब्लॉक समितियों में अध्यक्ष पद दिए हैं। यह आरोप अभी तक सरकार की ओर से सत्यापित या खंडित नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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