पेंटागन का बड़ा फैसला: 30+ उम्र के अमेरिकी सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन स्क्रीनिंग अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
पेंटागन ने 17 सितंबर 2026 को नई क्लिनिकल गाइडलाइंस जारी करते हुए 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी अमेरिकी पुरुष सैन्य कर्मियों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य जांच लागू करने का आदेश दिया है। डिफेंस हेल्थ एजेंसी द्वारा जारी इन दिशानिर्देशों में इलाज की सीमाएं भी तय की गई हैं और केवल प्रदर्शन बढ़ाने के लिए इस हार्मोन के उपयोग पर स्पष्ट रोक लगाई गई है।
नई गाइडलाइंस का दायरा
यह दिशानिर्देश जुलाई 2026 में जारी एक पूर्व निर्देश के तहत लाए गए हैं, जिसका उद्देश्य एक्टिव-ड्यूटी और रिजर्व दोनों श्रेणियों के पुरुष सर्विस सदस्यों के लिए एकसमान स्क्रीनिंग और उपचार प्रक्रिया स्थापित करना है। 30 वर्ष से कम आयु के सैन्यकर्मी अपनी इच्छा से स्क्रीनिंग के लिए अनुरोध कर सकते हैं।
पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, 'विभाग एक ऐसी तैयार और घातक लड़ाकू सेना बनाने और बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो युद्ध के मैदान में दबदबा बनाने और ताकत के दम पर शांति हासिल करने के लिए तैयार हो।' इस पहल को युद्धक क्षमता (combat readiness) से सीधे जोड़ा गया है।
स्क्रीनिंग की प्रक्रिया
क्लिनिकल दस्तावेज के अनुसार, जांच की शुरुआत लक्षणों और जोखिम कारकों के व्यवस्थित मूल्यांकन से होती है। यदि यह मूल्यांकन सकारात्मक आता है, तो अलग-अलग दिनों में खाली पेट सुबह के समय दो ब्लड सैंपल लिए जाते हैं। डायग्नोसिस के लिए लगातार कम टेस्टोस्टेरोन लेवल और उससे जुड़े लक्षणों — दोनों का होना आवश्यक है; केवल लैब रीडिंग या केवल लक्षण पर्याप्त नहीं माने जाएंगे।
लक्षणों में सेक्स की इच्छा में कमी, ऊर्जा का घटना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, मसल मास में कमी और उदास मनःस्थिति शामिल हो सकते हैं। हालांकि, दस्तावेज में यह भी चेतावनी दी गई है कि ये लक्षण नींद की कमी, मानसिक तनाव, अपर्याप्त कैलोरी सेवन और सैन्य सेवा में आम अन्य स्थितियों के कारण भी हो सकते हैं।
प्रदर्शन वृद्धि पर स्पष्ट रोक
क्लिनिकल दस्तावेज में पुष्टि की गई कमी के इलाज और युद्धक प्रदर्शन बढ़ाने के लिए टेस्टोस्टेरोन देने के बीच स्पष्ट अंतर किया गया है। बयान में कहा गया है, 'मौजूदा सबूतों के आधार पर किसी बीमारी या कमी के इलाज के बजाय प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर आधारित गाइडेंस का समर्थन नहीं किया जा सकता।' दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऊर्जा, जीवन-शक्ति, शारीरिक कार्यक्षमता या कॉग्निशन सुधारने के लिए इसके उपयोग के पक्ष में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
तैनाती और इलाज के नियम
मरीजों के लिए जारी सूचना-पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इलाज करवाना पूरी तरह वैकल्पिक है। दस्तावेज के अनुसार, 'जांच या इलाज न करवाने पर कर्मचारी को किसी बुरे नतीजे का सामना नहीं करना पड़ेगा।' थेरेपी से स्थिर हो चुके सैन्यकर्मियों को सामान्यतः बिना किसी विशेष छूट के तैनात किया जा सकता है, बशर्ते दवा का प्रकार उपयुक्त हो। तैनाती के दौरान और उसके बाद के 90 दिनों के लिए पर्याप्त दवा का प्रबंध अनिवार्य होगा।
सैन्य निगरानी रिकॉर्ड और व्यापक संदर्भ
गाइडलाइन में उद्धृत मिलिट्री सर्विलांस रिकॉर्ड बताते हैं कि 2018 से 2025 के बीच प्रत्येक वर्ष 1 प्रतिशत से भी कम पुरुष सर्विस सदस्यों में सक्रिय क्लिनिकल डायग्नोसिस पाया गया। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी रक्षा मंत्रालय सेना की शारीरिक और मानसिक तत्परता को लेकर नीतिगत बदलावों की एक शृंखला पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल सैन्य चिकित्सा में एक संरचित, साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।