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पेरुम्बावूर में भीड़ की दरिंदगी: तीन युवकों की पिटाई, सिर मुंडवाकर किया सार्वजनिक अपमान

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पेरुम्बावूर में भीड़ की दरिंदगी: तीन युवकों की पिटाई, सिर मुंडवाकर किया सार्वजनिक अपमान

सारांश

केरल के पेरुम्बावूर में भीड़ ने गांजे के आरोप में तीन युवकों को जबरन रोककर पीटा, घुटनों पर बैठाया और सार्वजनिक रूप से सिर मुंडवाकर अपमानित किया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और आरोपियों की तलाश जारी है। यह घटना 'मॉब जस्टिस' की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

9 जुलाई को केरल के पेरुम्बावूर में भीड़ ने तीन युवकों के साथ मारपीट की और उनके सिर मुंडवाए।
घटना बुधवार शाम 4:30 बजे भाई कॉलोनी के पास हुई; पीड़ित वाझाकुलम के मंजपेट्टी के रहने वाले हैं।
भीड़ ने युवकों पर गांजे की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया; पुलिस को सूचित करने के बजाय खुद कार्रवाई की।
पेरुम्बावूर पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की; आरोपियों की पहचान जारी।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि आरोप सही हों या नहीं, भीड़ द्वारा हिंसा किसी भी स्थिति में अपराध है।

केरल के पेरुम्बावूर में 9 जुलाई को एक चौंकाने वाली घटना में एक भीड़ ने तीन युवकों के साथ बेरहमी से मारपीट की, उन्हें घुटनों के बल बैठाया और उनके सिर मुंडवाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। आरोप है कि भीड़ ने इन युवकों पर उस इलाके में गांजे की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया था। पेरुम्बावूर पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है और आरोपियों की तलाश जारी है।

घटनाक्रम: कैसे हुई पूरी वारदात

यह घटना बुधवार शाम करीब 4:30 बजे भाई कॉलोनी, पेरुम्बावूर के पास हुई। पीड़ित युवक वाझाकुलम के मंजपेट्टी इलाके के रहने वाले हैं। स्थानीय लोगों के एक समूह ने इन्हें रोककर नशीले पदार्थों के लेन-देन का आरोप लगाया।

पुलिस को सूचना देने के बजाय, भीड़ ने कथित तौर पर तीनों को जबरन एक नज़दीकी कमरे में ले जाकर उनके साथ मारपीट की। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह जानबूझकर अपमानित करने की सोची-समझी कोशिश थी — हमलावरों ने पास की दुकान से एक नाई को बुलाया और तीनों के सिर मुंडवा दिए।

पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा

घटना के बाद तीनों पीड़ित पेरुम्बावूर पुलिस स्टेशन पहुँचे और मारपीट की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज की। घटना में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।

जांचकर्ता यह भी पड़ताल कर रहे हैं कि तीनों युवक उस इलाके में किस उद्देश्य से आए थे और उन पर लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार था या नहीं। गौरतलब है कि पुलिस सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि भले ही नशीले पदार्थों से जुड़े आरोप सही भी हों, यह किसी भी हाल में भीड़ द्वारा की गई हिंसा को उचित नहीं ठहराता।

अधिकारियों का रुख: कानून हाथ में लेना अपराध

पुलिस अधिकारियों ने एक बार फिर दोहराया कि किसी भी संदिग्ध आपराधिक गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दी जानी चाहिए। भीड़ को कानून अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं है और ऐसा करना स्वयं एक दंडनीय अपराध है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में 'मॉब जस्टिस' की घटनाओं को लेकर न्यायपालिका और मानवाधिकार संगठन गहरी चिंता व्यक्त कर चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ न केवल कानून-व्यवस्था की विफलता को दर्शाती हैं, बल्कि पीड़ितों की गरिमा को भी रौंदती हैं।

आगे क्या होगा

पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि पीड़ितों पर लगे आरोपों में कितनी सच्चाई है — और साथ ही भीड़ के उन सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी जिन्होंने कानून को अपने हाथ में लिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सोची-समझी सामाजिक बेइज्जती है — जो गरिमा के संवैधानिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है। यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय भीड़ हिंसा पर राज्य सरकारों को बार-बार कड़े निर्देश दे चुका है। असली सवाल यह है कि क्या पुलिस केवल पीड़ितों की जांच करेगी या हमलावरों पर भी उतनी ही सख्ती से कार्रवाई होगी।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेरुम्बावूर में तीन युवकों के साथ क्या हुआ?
9 जुलाई को केरल के पेरुम्बावूर में एक भीड़ ने तीन युवकों पर गांजे की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट की, उन्हें घुटनों पर बैठाया और जबरन उनके सिर मुंडवा दिए। पीड़ित वाझाकुलम के मंजपेट्टी के रहने वाले हैं।
क्या पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई की है?
हाँ, पीड़ितों की शिकायत पर पेरुम्बावूर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। घटना में शामिल सभी आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।
क्या भीड़ की यह कार्रवाई कानूनी थी?
नहीं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही युवकों पर लगे आरोप सही हों, भीड़ को कानून अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को देनी चाहिए।
क्या पीड़ित युवक वाकई नशीले पदार्थों में शामिल थे?
जांचकर्ता इस पहलू की भी पड़ताल कर रहे हैं कि तीनों युवक उस इलाके में क्यों आए थे और भीड़ के आरोपों का कोई ठोस आधार था या नहीं। अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
'मॉब जस्टिस' के ऐसे मामलों में कानून क्या कहता है?
भारतीय कानून के तहत भीड़ द्वारा की गई मारपीट और जबरन अपमान गंभीर दंडनीय अपराध हैं। सर्वोच्च न्यायालय भी भीड़ हिंसा के मामलों में राज्य सरकारों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दे चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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