पीतमपुरा में विजयादशमी पर रावण संग जलेगा 30 फुट का कॉकरोच पुतला, BJP विधायक अशोक गोयल की घोषणा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के पीतमपुरा में इस विजयादशमी पर अनोखा नज़ारा देखने को मिलेगा। श्री केशव रामलीला कमेटी, एनएसपी पीतमपुरा ने इस बार रावण, मेघनाद और कुंभकरण के परंपरागत पुतलों के साथ-साथ 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला भी जलाने का निर्णय लिया है, जिसे गंदगी का प्रतीक बताया गया है। मॉडल टाउन से भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक अशोक गोयल देवराहा ने 16 अक्टूबर 2026 को इस पहल की औपचारिक घोषणा की।
क्या है इस पहल की परंपरा
अशोक गोयल देवराहा ने बताया कि श्री केशव रामलीला कमेटी की यह पुरानी परंपरा रही है कि हर साल तीन मुख्य पुतलों के अलावा एक चौथा पुतला भी जलाया जाता है, जो समाज में फैली किसी बड़ी बुराई का प्रतीक होता है। इससे पहले कमेटी आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी सामाजिक कुरीतियों के प्रतीक स्वरूप पुतले जला चुकी है।
इस वर्ष कमेटी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि गंदगी के प्रतीक के रूप में कॉकरोच का पुतला जलाया जाए, ताकि स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता का सकारात्मक संदेश दिया जा सके।
विधायक का संदेश: जन-भागीदारी जरूरी
विधायक गोयल ने कहा, 'हमारे घर के अंदर की गंदगी हो, घर के बाहर की हो या समाज में फैली हुई गंदगी, हम सबको मिलकर उसे भगाना होगा। स्वच्छ दिल्ली अभियान सिर्फ सरकार के भरोसे पूरा नहीं हो सकता, इसके लिए जन-भागीदारी बहुत ज़रूरी है।' उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से नागरिकों में स्वच्छता के प्रति ज़िम्मेदारी की भावना और मजबूत होगी।
विस्तृत संदेश और स्पष्टीकरण
गोयल ने यह स्पष्ट किया कि कॉकरोच के पुतले का चुनाव विशुद्ध रूप से गंदगी के प्रतीक के तौर पर किया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाज में कुछ ऐसे तत्व भी हैं जो 'अराजक सोच' के साथ काम करते हैं और देश के संविधान व कानून की अवहेलना करते हैं तथा देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने दोहराया, 'लेकिन हम जो पुतला जला रहे हैं, वह सिर्फ और सिर्फ गंदगी के प्रतीक के रूप में जला रहे हैं।'
आम जनता पर असर
यह आयोजन पीतमपुरा क्षेत्र के नागरिकों के बीच काफी चर्चा में है। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि इस प्रतीकात्मक पहल से विजयादशमी के पर्व को सामाजिक सरोकार से जोड़ा जा सकता है और स्वच्छता अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया जा सकता है। 16 अक्टूबर 2026 को होने वाला यह दहन स्वच्छता संदेश के साथ परंपरा का अनूठा संगम होगा।