विजयादशमी 2026: अहमदाबाद में CM भूपेंद्र पटेल ने किया रावण दहन, 'शांति सेवा महोत्सव' में उमड़ी भारी भीड़
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में विजयादशमी पर्व पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों का दहन किया। 'शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट' द्वारा आयोजित 'विजयदशमी महोत्सव 2026' में रिमोट कंट्रोल से पुतलों में आग लगाते हुए मुख्यमंत्री पटेल ने बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पारंपरिक पर्व का नेतृत्व किया।
आयोजन का स्वरूप और सहभागिता
इस समारोह में शहरी विकास राज्य मंत्री दर्शना वाघेला और अहमदाबाद के मेयर हितेश बारोट सहित राज्य एवं स्थानीय स्तर के अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सांसद हसमुख पटेल और सांसद दिनेश मकवाना, स्थानीय विधायक, संत, आध्यात्मिक गुरु और अहमदाबाद नगर निगम (AMC) के पदाधिकारियों ने भी इसमें शिरकत की।
शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रमुख संदीप बारोट भी उत्सव में मौजूद रहे। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में शहरवासी एकत्र हुए, जिससे समारोह का माहौल उत्साहपूर्ण रहा।
सांस्कृतिक प्रस्तुति: 'दायरो' से हुई शुरुआत
उत्सव की शुरुआत पारंपरिक 'दायरो' से हुई — गुजराती लोक परंपरा में लोक गीत और कहानी-कथन का यह विशिष्ट स्वरूप प्रसिद्ध लोक कलाकार साईराम दवे की टीम ने प्रस्तुत किया। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति के बाद रावण दहन का मुख्य कार्यक्रम हुआ, जहाँ तीनों पुतलों को अग्नि के हवाले किया गया।
गौरतलब है कि अहमदाबाद के इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ गुजराती लोक-संस्कृति को भी बराबर महत्व दिया गया, जो इस उत्सव को विशिष्ट बनाता है।
विजयादशमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
विजयादशमी हिंदू महाकाव्य रामायण से जुड़ा पर्व है, जिसमें भगवान राम ने लंकाधिपति रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया था। इस परंपरा में रावण के साथ उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले भी जलाए जाते हैं।
यह पर्व नवरात्रि उत्सव के समापन का प्रतीक भी है। पूरे भारत में विजयादशमी धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक आयोजनों के माध्यम से मनाई जाती है, जहाँ हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट परंपराएँ होती हैं।
गुजरात में परंपरा और उत्सव का संगम
अहमदाबाद का यह आयोजन गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था के मेल का एक उदाहरण है। मुख्यमंत्री पटेल की उपस्थिति ने इस उत्सव को राजकीय और सामुदायिक, दोनों स्तरों पर एक बड़े जनसमूह को जोड़ने वाला अवसर बनाया।
यह आयोजन आने वाले वर्षों में भी इसी उत्साह के साथ जारी रखे जाने की उम्मीद है, क्योंकि शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट का यह महोत्सव अहमदाबाद में एक स्थापित वार्षिक परंपरा का रूप ले चुका है।