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डॉ. पीके मिश्रा ने ‘वॉटर, नेचर, प्रोग्रेस: सॉल्यूशंस फॉर अ न्यू इंडिया’ पुस्तक का विमोचन किया

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डॉ. पीके मिश्रा ने ‘वॉटर, नेचर, प्रोग्रेस: सॉल्यूशंस फॉर अ न्यू इंडिया’ पुस्तक का विमोचन किया

सारांश

विश्व जल दिवस पर डॉ. पीके मिश्रा ने नई पुस्तक 'वॉटर, नेचर, प्रोग्रेस' का विमोचन किया, जो जल प्रबंधन की चुनौतियों और अवसरों पर ध्यान केंद्रित करती है।

मुख्य बातें

जल प्रबंधन का महत्व बढ़ रहा है।
पुस्तक में नीति और अर्थशास्त्र का संयोजन है।
जल केवल पर्यावरणीय चिंता नहीं, बल्कि आर्थिक कारक है।
'ग्रीन वॉटर' की अनदेखी को संबोधित किया गया है।
जल सुधार प्रशासनिक सुधार का हिस्सा है।

नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने पुस्तक 'वॉटर, नेचर, प्रोग्रेस: सॉल्यूशंस फॉर अ न्यू इंडिया' का विमोचन किया। इस पुस्तक को परमेश्वरन अय्यर, अरुणाभा घोष और रिचर्ड दमानिया द्वारा लिखा गया है और इसे हार्परकॉलिन्स पब्लिशर्स इंडिया ने प्रकाशित किया है। यह पुस्तक जल को भारत की सबसे कमजोर कड़ी और सबसे बड़े अनछुए अवसर के रूप में दर्शाती है।

डॉ. पीके मिश्रा ने अपने मुख्य भाषण में कहा, "जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत 2047' की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जल प्रबंधन कृषि उत्पादकता, शहरी जीवन स्तर, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लचीलेपन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। यह पुस्तक नीति, अर्थशास्त्र और क्रियान्वयन के विशेषज्ञों का एक अद्वितीय संयोजन प्रस्तुत करती है, जिससे एक ठोस और प्रभावी ढांचा विकसित किया जा सके। यह दिखाती है कि कैसे जल विकास की बाधा बनने के बजाय सतत विकास का अवसर बन सकता है।"

भारत के पास वैश्विक ताजे जल संसाधनों का केवल चार प्रतिशत हिस्सा है, जबकि इसकी जनसंख्या वैश्विक जनसंख्या का 18 प्रतिशत है। इसी संदर्भ में 'वॉटर, नेचर, प्रोग्रेस' पुस्तक इस चुनौती का विश्लेषण करती है और व्यावहारिक उपायों को सामने लाती है।

पुस्तक की प्रस्तावना में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा, "यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण समय पर आई है, जब भारत को जल को अपनी प्रगति में बाधा या परिवर्तन के इंजन के रूप में देखना है। लेखक यह तर्क करते हैं कि जल केवल एक पर्यावरणीय चिंता नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला मुख्य कारक है।"

जल का हमारे स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृषि, शहरीकरण, बुनियादी ढांचे और मानव विकास पर प्रभाव बहुत व्यापक है, लेकिन इसके प्रबंधन पर ध्यान देना आवश्यक है।

परमेश्वरन अय्यर कहते हैं, "जल सुधार वास्तव में प्रशासनिक सुधार है। हमें जल वितरण सेवाओं को सशक्त बनाने की आवश्यकता है।" अरुणाभा घोष कहते हैं, "जल भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षा की सीमाओं और संभावनाओं को परिभाषित करेगा।" रिचर्ड दमानिया का कहना है कि 'ग्रीन वॉटर' भारत का सबसे अधिक अनदेखा संसाधन है, जिसे उचित प्रबंधन की आवश्यकता है।

कार्यकारी प्रकाशक उदयन मित्रा ने कहा, "जल संसाधनों का प्रभावी और न्यायसंगत उपयोग हमारे नीति निर्माण का एक प्रमुख हिस्सा होना चाहिए।"

पुस्तक के लेखक परमेश्वरन अय्यर विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक हैं। अरुणाभा घोष एक प्रमुख वैश्विक सततता थिंक टैंक के संस्थापक-सीईओ हैं। रिचर्ड दमानिया विश्व बैंक की प्लैनेट वाइस प्रेसीडेंसी में मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं।

विश्व बैंक समूह के सरोज कुमार झा ने कहा, "यह पुस्तक सेवाओं के वितरण पर ध्यान केंद्रित करती है और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण जल और स्वच्छता सेवाओं की जानकारी देती है।"

मिहिर शाह ने कहा, "यह पुस्तक जल प्रबंधन में आमूलचूल बदलाव के लिए ठोस तर्क देती है।" हरि मेनन ने कहा, "भारत की मिट्टी में मौजूद 'ग्रीन वॉटर' का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय सततता के लिए रोमांचक होगा।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि विकास का एक प्रमुख कारक है। इसे सही तरीके से प्रबंधित करने से भारत की आर्थिक प्रगति को गति मिल सकती है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह पुस्तक जल प्रबंधन की चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण करती है।
कौन से लेखक इस पुस्तक में शामिल हैं?
पुस्तक के लेखक हैं परमेश्वरन अय्यर, अरुणाभा घोष और रिचर्ड दमानिया।
पुस्तक का विमोचन कब हुआ?
पुस्तक का विमोचन 22 मार्च को विश्व जल दिवस पर हुआ।
क्या पुस्तक में जल प्रबंधन की समस्याओं पर चर्चा की गई है?
हाँ, पुस्तक में जल प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की गई है।
इस पुस्तक का प्रकाशन किसने किया है?
यह पुस्तक हार्परकॉलिन्स पब्लिशर्स इंडिया द्वारा प्रकाशित की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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