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पीएम ई-ड्राइव योजना: जून 2026 तक 26.59 लाख EV बिक्री, ₹11,900 करोड़ की स्कीम मार्च 2028 तक बढ़ाई

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पीएम ई-ड्राइव योजना: जून 2026 तक 26.59 लाख EV बिक्री, ₹11,900 करोड़ की स्कीम मार्च 2028 तक बढ़ाई

सारांश

पीएम ई-ड्राइव योजना ने जून 2026 तक 26.59 लाख EV बिक्री का आँकड़ा छुआ, 14,000 ई-बसें सात शहरों में आवंटित हुईं और 8,147 चार्जर मंजूर किए गए। ₹11,900 करोड़ की इस योजना को मार्च 2028 तक बढ़ाकर सरकार ने भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की नींव और मजबूत की है।

मुख्य बातें

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत जून 2026 तक 26.59 लाख EV की बिक्री को प्रत्यक्ष समर्थन मिला।
योजना की अवधि बढ़ाकर मार्च 2028 तक की गई; कुल बजट ₹11,900 करोड़ ।
14,000 ई-बसें आवंटित, जिनमें से 13,800 दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु सहित 7 शहरों को; इनके लिए ₹4,391 करोड़ निर्धारित।
28 सितंबर 2026 तक 10 राज्यों में 8,147 चार्जर के लिए ₹851 करोड़ मंजूर।
ई-2डब्ल्यू के लिए ₹2,500 प्रति kWh (अधिकतम ₹5,000 ) प्रोत्साहन; लक्ष्य 45.79 लाख से अधिक वाहन।
ई-3डब्ल्यू (L5) श्रेणी का लक्ष्य पूरा होने पर इसे 26 दिसंबर 2025 को बंद किया गया।

पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत जून 2026 तक देशभर में 26.59 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री को प्रत्यक्ष समर्थन मिला है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, इस उपलब्धि से नई दिल्ली सहित पूरे भारत में EV अपनाने की गति तेज हुई है, चार्जिंग बुनियादी ढाँचे का विस्तार हुआ है और घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ हुआ है। ₹11,900 करोड़ के बजटीय आवंटन वाली यह योजना अब मार्च 2028 तक विस्तारित कर दी गई है।

योजना का दायरा और आवंटन

सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, योजना के तहत कुल 28.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन अधिकृत किया गया है। इसमें ई-2 व्हीलर (ई-2डब्ल्यू), ई-3 व्हीलर (ई-3डब्ल्यू), पंजीकृत ई-रिक्शा और ई-कार्ट, L5 श्रेणी के वाहन, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक, ई-बस, चार्जिंग अवसंरचना और परीक्षण एजेंसियों का आधुनिकीकरण शामिल हैं। यह योजना मांग-आधारित प्रोत्साहन तथा बुनियादी ढाँचे से जुड़ी सहायता दोनों प्रदान करती है।

ई-बस तैनाती: सात प्रमुख शहरों में आवंटन

योजना के तहत 14,028 ई-बसों की तैनाती के लिए करीब ₹4,391 करोड़ आवंटित किए गए हैं। अगस्त 2026 तक 14,000 ई-बसों का आवंटन पूरा हो चुका है। इनमें से लगभग 13,800 ई-बसें सात शहरों — दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत — को आवंटित की गई हैं। गौरतलब है कि ये सभी शहर भारत के प्रमुख शहरी परिवहन केंद्र हैं और इनमें सार्वजनिक बस बेड़े का विद्युतीकरण वायु गुणवत्ता तथा यातायात लागत दोनों दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।

चार्जिंग अवसंरचना और परीक्षण एजेंसियाँ

देशभर में ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (EV PCS) के लिए करीब ₹2,000 करोड़ निर्धारित किए गए हैं। 28 सितंबर 2026 तक तीन तेल विपणन कंपनियों और 10 राज्यों में 8,147 चार्जर स्थापित करने के लिए ₹851 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए ₹780 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

वाहन श्रेणीवार प्रोत्साहन

पंजीकृत ई-2डब्ल्यू के लिए ₹2,500 प्रति किलोवाट-घंटा का प्रोत्साहन दिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹5,000 प्रति वाहन है। यह लाभ ₹1.5 लाख तक की एक्स-फैक्ट्री कीमत वाले वाहनों पर लागू होता है और इस श्रेणी के लिए कुल ₹2,767 करोड़ का फंड आवंटित है। योजना का लक्ष्य 45.79 लाख से अधिक पंजीकृत ई-2डब्ल्यू को समर्थन देना है। वहीं, ई-3डब्ल्यू (L5) श्रेणी के लिए निर्धारित बिक्री लक्ष्य हासिल हो जाने के कारण इसे 26 दिसंबर 2025 को बंद किया जा चुका है। ई-रिक्शा और ई-कार्ट के लिए समर्थन मार्च 2028 तक जारी रहेगा।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2030 तक EV की हिस्सेदारी बढ़ाने के अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है। लक्षित नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहनों और ढाँचागत सहायता के संयोजन से देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में तेज़ी आना जारी है। योजना का विस्तार और चार्जिंग नेटवर्क की बढ़त यह संकेत देती है कि सरकार EV पारिस्थितिकी तंत्र को दीर्घकालिक आधार देने के प्रति प्रतिबद्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने वाहन वास्तव में सड़क पर चल रहे हैं और चार्जिंग अवसंरचना उनकी माँग के अनुरूप तैयार है या नहीं। 10 राज्यों में 8,147 चार्जर की मंजूरी 26.59 लाख वाहनों की तुलना में अभी भी बेमेल दिखती है — यह अनुपात EV उपयोगकर्ताओं के अनुभव को सीधे प्रभावित करता है। ई-3डब्ल्यू (L5) श्रेणी का लक्ष्य पूरा होकर बंद होना योजना के लक्ष्य-निर्धारण की सटीकता दर्शाता है, पर यही पारदर्शिता अन्य श्रेणियों में भी अपेक्षित है। मार्च 2028 तक विस्तार राजनीतिक इच्छाशक्ति का संकेत है, लेकिन दीर्घकालिक सफलता चार्जिंग घनत्व और घरेलू बैटरी विनिर्माण की क्षमता पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम ई-ड्राइव योजना क्या है?
पीएम ई-ड्राइव योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख EV प्रोत्साहन योजना है, जिसमें ₹11,900 करोड़ आवंटित हैं और जिसे अब मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है। यह योजना ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू, ई-बस, ई-ट्रक, ई-एम्बुलेंस तथा चार्जिंग अवसंरचना को मांग-आधारित सब्सिडी और ढाँचागत सहायता प्रदान करती है।
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत अब तक कितनी EV बिक्री हुई?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, जून 2026 तक इस योजना के तहत 26.59 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को समर्थन मिला है। योजना के अंतर्गत कुल 28.30 लाख वाहनों के लिए प्रोत्साहन अधिकृत किया गया है।
ई-बसें किन शहरों को आवंटित की गई हैं?
अगस्त 2026 तक 14,000 ई-बसों का आवंटन हो चुका है, जिनमें से करीब 13,800 दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत को दी गई हैं। इनके लिए ₹4,391 करोड़ का बजट निर्धारित है।
ई-2 व्हीलर खरीदने पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
पंजीकृत ई-2डब्ल्यू के लिए ₹2,500 प्रति किलोवाट-घंटा का प्रोत्साहन दिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹5,000 प्रति वाहन है। यह सुविधा केवल उन वाहनों पर लागू है जिनकी एक्स-फैक्ट्री कीमत ₹1.5 लाख तक है।
देश में EV चार्जिंग स्टेशनों की क्या स्थिति है?
28 सितंबर 2026 तक तीन तेल विपणन कंपनियों और 10 राज्यों में 8,147 चार्जर लगाने के लिए ₹851 करोड़ मंजूर किए गए हैं। EV सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए कुल करीब ₹2,000 करोड़ निर्धारित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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