फेम-II योजना से 16.72 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को समर्थन, 5,299 ई-बसें तैनात
सारांश
मुख्य बातें
फेम-II योजना ने 31 जुलाई 2026 तक देशभर में 16.72 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान की है — इनमें इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहन शामिल हैं। इसके साथ ही योजना के अंतर्गत 5,299 ई-बसें देश के विभिन्न शहरों में तैनात की जा चुकी हैं। भारी उद्योग मंत्रालय ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को यह जानकारी साझा की।
फेम-II योजना: मुख्य घटनाक्रम
फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (फेम-II) योजना 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024 तक पाँच वर्षों के लिए लागू रही। इस योजना के लिए ₹11,500 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया था। इसके तहत देशभर में 9,583 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने में भी सहायता मिली।
गौरतलब है कि यह योजना भारत सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा थी जिसका उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और घरेलू ईवी उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक रूप से सशक्त बनाना था।
पीएम ई-ड्राइव योजना: अगला कदम
फेम-II की समाप्ति के बाद सरकार ने 29 सितंबर 2024 को पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रीवॉल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल इनहांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना की शुरुआत की। इस योजना के लिए ₹10,900 करोड़ का बजटीय प्रावधान है और यह लगभग 28.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य रखती है — जिनमें दोपहिया, तिपहिया, ट्रक, बस और एम्बुलेंस शामिल हैं।
इस योजना के अंतर्गत 14,028 ई-बसों की तैनाती के लिए ₹4,391 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिनमें से 14,000 ई-बसों का आवंटन पूरा हो चुका है। इसके अलावा, देशभर में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार के लिए ₹2,000 करोड़ अलग से आवंटित किए गए हैं। टेस्टिंग एजेंसियों के उन्नयन के लिए भी अनुदान का प्रावधान है।
घरेलू विनिर्माण पर जोर
चरणबद्ध मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम (पीएमपी) के तहत बैटरी पैक सहित ईवी के विभिन्न घटकों का चरणबद्ध घरेलू उत्पादन अनिवार्य किया गया है। यह कदम 'मेक इन इंडिया' के अनुरूप आपूर्ति श्रृंखला को देश के भीतर मज़बूत करने की दिशा में उठाया गया है।
पीएम ई-बस सेवा: शहरी परिवहन में बदलाव
28 अक्टूबर 2024 को अधिसूचित पीएम ई-बस सेवा-पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म (पीएसएम) योजना के लिए ₹3,435.33 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है। इस योजना का लक्ष्य 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती को समर्थन देना है।
10 जुलाई 2026 तक पीएम-ईबससेवा योजना के अंतर्गत कुल 27,555 ई-बसें शामिल हो चुकी हैं। इनमें 10,000 ई-बसें आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की पीएम-ईबससेवा योजना के तहत, 14,000 ई-बसें पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत और 3,555 ई-बसें विभिन्न राज्य सरकारों की पहलों के अंतर्गत आती हैं।
आगे की राह
आँकड़ों के अनुसार, तीनों प्रमुख योजनाओं — फेम-II, पीएम ई-ड्राइव और पीएम ई-बस सेवा — के सम्मिलित प्रभाव से भारत का ईवी पारिस्थितिकी तंत्र तेज़ी से विस्तार पा रहा है। चार्जिंग अवसंरचना, घरेलू विनिर्माण और सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण पर एक साथ ध्यान केंद्रित करना यह संकेत देता है कि नीतिगत दृष्टि अब केवल वाहन बिक्री से आगे बढ़कर समग्र ईवी पारिस्थितिकी को मज़बूत करने की ओर है।