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एग्रीवोल्टाइक्स से किसानों की आय बढ़ेगी: PM मोदी ने एक्स पर शेयर किया मंत्रियों का लेख

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एग्रीवोल्टाइक्स से किसानों की आय बढ़ेगी: PM मोदी ने एक्स पर शेयर किया मंत्रियों का लेख

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एग्रीवोल्टाइक्स का समर्थन किया — वह तकनीक जो एक ही खेत पर फसल और सौर ऊर्जा दोनों देती है। भारत के 86% छोटे-सीमांत किसानों के लिए यह दोहरी आय का रास्ता है, और PM-कुसुम के अगले चरण में इसे विशेष स्थान मिलने की तैयारी है।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 21 अक्टूबर 2026 को एक्स पर मंत्रियों प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान का एग्रीवोल्टाइक्स पर लेख साझा किया।
एग्रीवोल्टाइक्स (एग्रीपीवी) किसानों को एक ही भूमि पर खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन का दोहरा अवसर देता है।
भारत के लगभग 86% किसान छोटे और सीमांत हैं — यह तकनीक उनकी आय के स्रोत बढ़ा सकती है।
PM-कुसुम योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टाइक्स को विशेष स्थान दिए जाने की सरकारी तैयारी है।
नई दिल्ली में 21–23 अक्टूबर 2026 तक सातवाँ एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस आयोजित हो रहा है, थीम है 'पावरिंग द ग्लोबल साउथ' ।
इस मॉडल से ग्रामीण क्षेत्रों में सौर अवसंरचना स्थापना और रखरखाव के ज़रिये स्थानीय रोजगार सृजन भी संभव है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान के एक लेख को साझा करते हुए एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक कृषि गतिविधियों के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को एकीकृत कर किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण समृद्धि को नई दिशा देने की अपार क्षमता रखती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नई दिल्ली 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक सातवें एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस की मेजबानी कर रहा है।

एग्रीवोल्टाइक्स क्या है और इसका महत्व

एग्रीवोल्टाइक्स — जिसे एग्रीपीवी भी कहा जाता है — एक ऐसी प्रणाली है जिसमें किसान एक ही भूमि पर खेती जारी रखते हुए उसी भूमि पर लगे सौर पैनलों से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी कर सकते हैं। मंत्रियों के लेख के अनुसार, भारत के लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से हैं, जिनके लिए आय के अतिरिक्त स्रोत अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

यह मॉडल किसानों को बिजली बिक्री से अतिरिक्त आमदनी दिला सकता है, साथ ही डीजल और खरीदी गई बिजली पर उनकी निर्भरता कम कर सकता है। इसके अलावा, सौर पैनलों के नीचे बनने वाला सूक्ष्म जलवायु (माइक्रोक्लाइमेट) फसलों को अत्यधिक गर्मी, सूखे, तीव्र सौर विकिरण और ओलावृष्टि जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों से सुरक्षा प्रदान करता है।

सरकार की प्रतिक्रिया और नीतिगत तैयारी

सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री-कुसुम योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टाइक्स को विशेष स्थान दिए जाने की तैयारी है। इससे कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन को नई गति मिलने और सिंचाई के सौरकरण के प्रयासों को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।

मंत्री जोशी और चौहान ने अपने लेख में इस बात पर जोर दिया कि कृषि एवं ऊर्जा विभागों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों तथा स्थानीय निकायों के बीच समन्वय इस मॉडल की सफलता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने उपयुक्त फसल चयन, पर्याप्त सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन और ऐसे डिज़ाइन की आवश्यकता पर भी बल दिया जो खेती के लिए पर्याप्त सूर्यप्रकाश सुनिश्चित करें।

आम जनता और किसानों पर असर

एग्रीवोल्टाइक्स के व्यापक उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने का अनुमान है। सौर अवसंरचना की स्थापना, रखरखाव और उससे जुड़ी कृषि सेवाओं के जरिये स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने की संभावना जताई गई है।

गौरतलब है कि भारत पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है, लेकिन कृषि क्षेत्र में इस ऊर्जा का एकीकृत उपयोग अभी प्रारंभिक चरण में है। एग्रीवोल्टाइक्स उस अंतर को पाटने की दिशा में एक संरचनात्मक कदम हो सकता है।

वैश्विक सम्मेलन का संदर्भ

सातवाँ एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस, जिसकी थीम 'पावरिंग द ग्लोबल साउथ' है, 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित हो रही है। भारत की इस सम्मेलन की मेजबानी वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए एग्रीवोल्टाइक्स नीति में अग्रणी भूमिका निभाने के उसके इरादे को स्पष्ट करती है। आगे देखना होगा कि पीएम-कुसुम के अगले चरण में इस तकनीक को किस गति से ज़मीन पर उतारा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल PM-कुसुम के क्रियान्वयन की गति का है — योजना के पिछले चरणों में वित्तीय और प्रशासनिक बाधाओं के कारण लक्ष्य अधूरे रहे हैं। 86% छोटे-सीमांत किसानों तक एग्रीवोल्टाइक्स पहुँचाने के लिए भूमि पट्टा नियमों, वितरण कंपनियों की खरीद इच्छाशक्ति और सस्ते वित्त की त्रिस्तरीय चुनौती को हल किए बिना यह तकनीक बड़े किसानों और कॉर्पोरेट फार्मों तक सीमित रहने का जोखिम है। नई दिल्ली में वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी भारत को 'ग्लोबल साउथ' नेता के रूप में स्थापित करने का अवसर है, पर घरेलू स्तर पर ठोस नीतिगत रोडमैप अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एग्रीवोल्टाइक्स क्या है और यह किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है?
एग्रीवोल्टाइक्स (एग्रीपीवी) एक प्रणाली है जिसमें किसान एक ही भूखंड पर खेती जारी रखते हुए सौर पैनलों से बिजली भी उत्पादित करते हैं। इससे किसानों को फसल आय के साथ-साथ बिजली बिक्री से अतिरिक्त आमदनी मिलती है और डीजल व खरीदी बिजली पर निर्भरता भी कम होती है।
PM मोदी ने एग्रीवोल्टाइक्स पर क्या कहा?
PM मोदी ने 21 अक्टूबर 2026 को एक्स पर केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान का लेख साझा करते हुए कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत दे सकता है, ऊर्जा लागत घटा सकता है और फसल उत्पादकता बढ़ा सकता है।
PM-कुसुम योजना में एग्रीवोल्टाइक्स को कब शामिल किया जाएगा?
सरकार के अनुसार PM-कुसुम योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टाइक्स को विशेष स्थान दिए जाने की तैयारी है, हालांकि इसकी सटीक समयसीमा और विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस 2026 कहाँ और कब है?
सातवाँ एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन की थीम 'पावरिंग द ग्लोबल साउथ' रखी गई है और भारत इसकी मेजबानी कर रहा है।
एग्रीवोल्टाइक्स के सफल क्रियान्वयन के लिए क्या ज़रूरी है?
मंत्रियों के अनुसार एग्रीवोल्टाइक्स की सफलता के लिए उपयुक्त फसल चयन, पर्याप्त सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन और ऐसे डिज़ाइन जरूरी हैं जो खेती के लिए पर्याप्त सूर्यप्रकाश सुनिश्चित करें। इसके साथ ही कृषि एवं ऊर्जा विभागों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय भी अनिवार्य बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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