पीएम-कुसुम योजना से 30 लाख किसानों को फायदा, सोलर पंप से ₹1 लाख सालाना बचत: PM मोदी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन' को संबोधित करते हुए कहा कि पीएम-कुसुम योजना से देशभर के 30 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हो चुके हैं और सोलर पंप के उपयोग से प्रत्येक किसान सालाना लगभग ₹1 लाख की बचत कर पा रहा है। यह आयोजन भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा की प्रगति को रेखांकित करने के लिए आयोजित किया गया था।
पीएम-कुसुम योजना की उपलब्धियाँ
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'देश भर के किसान पीएम-कुसुम योजना का लाभ उठा रहे हैं। इस पहल के जरिए, 30 लाख से ज्यादा किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाली सिंचाई सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। अनुमान है कि सोलर पंपों का इस्तेमाल करके हर किसान सालाना लगभग ₹1 लाख की बचत कर पा रहा है।' यह योजना उन किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित हुई है जो पहले डीजल चालित पंपों पर निर्भर थे और उनकी लागत अधिक थी।
सरकारी इमारतों में सौर ऊर्जा का विस्तार
मोदी ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने उद्योगों, खेतों और घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का व्यापक काम किया है। उन्होंने कहा, 'पूरे भारत में 44,000 से अधिक सरकारी इमारतें अब सौर ऊर्जा से जुड़ी हैं, जिससे सालाना लगभग ₹700 करोड़ की बचत हो रही है।' सरकार का अगला लक्ष्य स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और स्ट्रीट-लाइटिंग सिस्टम को भी सौर ऊर्जा से जोड़ना है।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति
फरवरी 2024 में शुरू की गई 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य रखा गया था। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 24-25 महीनों में 65 लाख से अधिक परिवार इस पहल से जुड़ चुके हैं। यह आँकड़ा घरेलू सौर ऊर्जा अपनाने की रफ्तार को दर्शाता है।
पेरिस समझौते का लक्ष्य पाँच साल पहले हासिल
प्रधानमंत्री ने वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'पेरिस समझौते के तहत भारत ने अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से पूरा करने का संकल्प लिया था। हमने 2025 में ही, तय समय से पाँच साल पहले, यह लक्ष्य हासिल कर लिया।' यह उपलब्धि भारत को वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में अग्रणी देशों में शामिल करती है।
आगे की राह
सरकार का स्पष्ट रोडमैप है कि नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढाँचे को हर क्षेत्र तक विस्तारित किया जाए — घरों से लेकर सार्वजनिक संस्थानों तक। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की माँग तेज हो रही है और भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतें स्वच्छ विकल्पों की ओर धकेल रही हैं। आने वाले वर्षों में पीएम-कुसुम और पीएम सूर्य घर जैसी योजनाओं के लक्ष्यों की पूर्ति भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा तय करेगी।