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मध्य प्रदेश में एग्रीवोल्टाइक ऊर्जा के लिए इंडो-जर्मन एमओयू, किसानों को मिलेगी खेती के साथ सौर आय

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मध्य प्रदेश में एग्रीवोल्टाइक ऊर्जा के लिए इंडो-जर्मन एमओयू, किसानों को मिलेगी खेती के साथ सौर आय

सारांश

मध्य प्रदेश ने जर्मन समर्थित आईजीसीए के साथ एग्रीवोल्टाइक एमओयू किया — किसान अब एक ही खेत में फसल और सौर ऊर्जा दोनों से कमाएंगे। यह साझेदारी मई 2030 तक प्रभावी है और पीएम-कुसुम 2.0 के साथ जुड़कर ग्रामीण ऊर्जा परिदृश्य बदल सकती है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग और इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना (आईजीसीए) के बीच 15 जून 2025 को एमओयू हस्ताक्षरित हुआ।
समझौता मई 2030 तक प्रभावी रहेगा; मुख्यमंत्री मोहन यादव कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
किसान खेती के साथ-साथ उसी भूमि पर सोलर पैनल लगाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
यह पहल पीएम-कुसुम 2.0 के अनुरूप है; सरकार किसानों को सब्सिडी देगी।
आईजीसीए तकनीकी मूल्यांकन, डिज़ाइन, वित्तीय व्यवहार्यता और नीतिगत ढाँचे के निर्माण में सहयोग करेगी।

मध्य प्रदेश सरकार ने 15 जून 2025 को कृषि भूमि पर सौर ऊर्जा उत्पादन को एकसाथ बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। राज्य के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड और जर्मन सरकार समर्थित इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना (आईजीसीए) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे।

एग्रीवोल्टाइक क्या है और यह क्यों अहम है

एग्रीवोल्टाइक एक ऐसी अवधारणा है जिसमें कृषि भूमि पर खेती के साथ-साथ उसी खेत में सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पादन किया जाता है। इससे अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं रहती, खाद्य सुरक्षा बनी रहती है और भूमि संबंधी विवादों से भी बचा जा सकता है। यह मॉडल यूरोप सहित कई देशों में सफलतापूर्वक लागू हो चुका है।

एमओयू के तहत क्या होगा

इस साझेदारी के अंतर्गत आईजीसीए द्वारा राज्य में एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी एवं आर्थिक मूल्यांकन, डिज़ाइन, वित्तीय व्यवहार्यता और क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान किया जाएगा। किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, ऊर्जा विकासकर्ताओं, वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) और अन्य संबंधित हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण एवं जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। यह गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन मई 2030 तक प्रभावी रहेगा।

किसानों को क्या फायदा मिलेगा

सरकार की ओर से दावा किया गया है कि एग्री सौर पीवी के तहत किसानों को सब्सिडी दी जाएगी। किसान अपनी जमीन के मालिकाना हक बनाए रखते हुए खेती करते रहेंगे और उसी खेत में सोलर पैनल से सौर ऊर्जा उत्पादन कर अतिरिक्त आय भी अर्जित करेंगे। यह पहल पीएम-कुसुम 2.0 सहित अन्य केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप है और जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास को भी गति देगी।

नीतिगत एवं नियामक ढाँचे पर ज़ोर

आईजीसीए राज्य में कृषि उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा को संरक्षित रखते हुए उपयुक्त नीतिगत एवं नियामक ढाँचा विकसित करने में भी सहयोग करेगी। भूमि उपयोग दक्षता सुधारने और उत्पादित ऊर्जा की सुरक्षा सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल मध्य प्रदेश को एग्रीवोल्टाइक क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने का प्रयास है।

आगे की राह

एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद अब राज्य सरकार और जर्मन सहयोगी मिलकर पायलट परियोजनाओं की पहचान करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रियान्वयन सुचारू रहा, तो मध्य प्रदेश के किसानों के लिए यह मॉडल आय के एक स्थायी वैकल्पिक स्रोत के रूप में उभर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। भारत में एग्रीवोल्टाइक अभी प्रयोगात्मक चरण में है और किसानों तक सब्सिडी की पहुँच, सोलर पैनलों के रखरखाव की ज़िम्मेदारी तथा फसल उत्पादकता पर दीर्घकालिक प्रभाव जैसे सवाल अभी अनुत्तरित हैं। गैर-बाध्यकारी प्रकृति का यह समझौता जर्मन भागीदार पर कोई कानूनी दायित्व नहीं डालता, जो इसकी व्यावहारिक सीमा है। पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं में पहले भी क्रियान्वयन की गति अपेक्षाओं से पीछे रही है, इसलिए मध्य प्रदेश को ठोस पायलट परिणामों के आधार पर ही विस्तार की योजना बनानी चाहिए।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में इंडो-जर्मन एग्रीवोल्टाइक एमओयू क्या है?
यह मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड और जर्मन सरकार समर्थित आईजीसीए के बीच 15 जून 2025 को हस्ताक्षरित एक गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन है। इसका उद्देश्य कृषि भूमि पर खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है।
एग्रीवोल्टाइक से किसानों को क्या फायदा होगा?
किसान अपनी जमीन पर खेती जारी रखते हुए उसी खेत में सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा से अतिरिक्त आय कमा सकेंगे। सरकार की ओर से सब्सिडी देने का भी दावा किया गया है, और किसान अपनी भूमि के मालिकाना हक बनाए रखेंगे।
यह एमओयू कब तक प्रभावी रहेगा?
यह गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन मई 2030 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी मूल्यांकन और क्रियान्वयन का काम पूरा किया जाएगा।
एग्रीवोल्टाइक परियोजना पीएम-कुसुम 2.0 से कैसे जुड़ी है?
यह पहल पीएम-कुसुम 2.0 सहित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप तैयार की गई है। इसका लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने, भूमि उपयोग दक्षता सुधारने और जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास को गति देना है।
आईजीसीए इस परियोजना में क्या भूमिका निभाएगी?
आईजीसीए एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी एवं आर्थिक मूल्यांकन, डिज़ाइन और वित्तीय व्यवहार्यता में सहयोग करेगी। इसके अलावा किसानों, डिस्कॉम और अन्य हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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