22 अक्टूबर 2026
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एग्रीवोल्टेक्स विश्व सम्मेलन 2026: शिवराज सिंह चौहान बोले — लघु किसानों की जरूरत के अनुसार हों नीतियां

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एग्रीवोल्टेक्स विश्व सम्मेलन 2026: शिवराज सिंह चौहान बोले — लघु किसानों की जरूरत के अनुसार हों नीतियां

सारांश

नई दिल्ली में एग्रीवोल्टेक्स विश्व सम्मेलन 2026 के मंच से कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा — सौर खेती की नीतियाँ बड़े निवेशकों के लिए नहीं, 0.96 हेक्टेयर की औसत जोत वाले छोटे किसानों के लिए बनाई जाएँ। किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बने — यही सम्मेलन का केंद्रीय संदेश रहा।

मुख्य बातें

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 21 अक्टूबर 2026 को एग्रीवोल्टेक्स विश्व सम्मेलन 2026 का नई दिल्ली में उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि एग्रीवोल्टेक्स नीतियाँ लघु एवं सीमांत किसानों की ज़रूरतों के अनुरूप होनी चाहिए; देश की औसत भूमि जोत 0.96 हेक्टेयर है।
कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत ; कृषि निर्यात रिकॉर्ड 52.55 अरब डॉलर पर पहुँचा।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली क्षमता 308.03 गीगावाट , कुल क्षमता के 55 प्रतिशत से अधिक ।
महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश भारत की एग्रीवोल्टेक्स क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा।
ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को उपकरण संचालन, मरम्मत और रखरखाव में प्रशिक्षण तथा FPO की भागीदारी पर बल।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एग्रीवोल्टेक्स विश्व सम्मेलन 2026 के उद्घाटन सत्र में स्पष्ट किया कि भारत की एग्रीवोल्टेक्स नीतियाँ देश के लघु एवं सीमांत किसानों की विशेष आवश्यकताओं को केंद्र में रखकर बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि और सौर ऊर्जा के एकीकरण से किसान एक साथ अन्नदाता और ऊर्जादाता दोनों की भूमिका निभा सकते हैं।

सम्मेलन का उद्घाटन और मुख्य संदेश

तीन दिवसीय इस सम्मेलन का संयुक्त उद्घाटन शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने किया। चौहान ने जोर देकर कहा कि कृषि-वोल्टेइक मॉडल ऐसे होने चाहिए जो किसानों को सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए खेती छोड़ने पर मजबूर न करें, बल्कि खेती जारी रखते हुए आय का अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराएँ। उनका यह संदेश भारत की उस बड़ी कृषि वास्तविकता को रेखांकित करता है जहाँ औसत भूमि जोत मात्र 0.96 हेक्टेयर है।

डिज़ाइन और तकनीकी प्राथमिकताएँ

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के बयान के अनुसार, चौहान ने ऐसे सौर पैनल डिज़ाइनों की वकालत की जो जुताई, फसल परिवर्तन और उचित वर्षा जल निकासी में बाधा न बनें। उन्होंने कहा कि बिजली आधुनिक जीवन और कृषि के लिए अपरिहार्य हो गई है, इसलिए ऊर्जा उत्पादन को खेती के साथ एकीकृत करना किसानों के कल्याण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

मंत्री ने किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की सक्रिय भागीदारी पर भी बल दिया और ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को उपकरण संचालन, मरम्मत तथा रखरखाव में प्रशिक्षित करने का आह्वान किया, ताकि गाँवों में रोज़गार के नए अवसर सृजित हों।

कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति

चौहान ने जानकारी दी कि देश का खाद्यान्न भंडार पर्याप्त है और कृषि क्षेत्र ने 4.5 प्रतिशत की निरंतर वृद्धि दर बनाए रखी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कृषि निर्यात रिकॉर्ड 52.55 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है। यह आँकड़े ऐसे समय में महत्वपूर्ण हैं जब एग्रीवोल्टेक्स को किसानों की आय बढ़ाने के अगले बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और एग्रीवोल्टेक्स संभावना

प्रल्हाद जोशी ने सम्मेलन में बताया कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 308.03 गीगावाट तक पहुँच चुकी है, जो देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता लगभग 560 गीगावाट का 55 प्रतिशत से अधिक है। एग्रीवोल्टेक्स के विस्तार की दृष्टि से महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश मिलकर भारत की अनुमानित एग्रीवोल्टेक्स क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय आया है जब भारत अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक साथ काम कर रहा है। एग्रीवोल्टेक्स इन दोनों उद्देश्यों को एक मंच पर लाने का अवसर प्रदान करता है। नीति-निर्माण और क्रियान्वयन में लघु किसानों को केंद्र में रखना ही इस पहल की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती नीति को व्यावहारिक बनाना है — जहाँ औसत जोत 0.96 हेक्टेयर हो, वहाँ सौर पैनल लगाने की लागत, भूमि पट्टे की जटिलताएँ और वितरण कंपनियों की खरीद-इच्छाशक्ति सबसे बड़ी अड़चनें हैं। मंत्री का 'अन्नदाता-ऊर्जादाता' नारा प्रेरक है, पर इस विज़न को ज़मीन पर उतारने के लिए FPO को वित्त-पोषण, ग्रिड कनेक्टिविटी और न्यूनतम खरीद गारंटी की ठोस व्यवस्था चाहिए — जिसका सम्मेलन में कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया। 50 प्रतिशत क्षमता छह राज्यों में सिमटी होने का मतलब है कि बाकी राज्यों के किसान इस क्रांति से वंचित रह सकते हैं, जब तक केंद्र समान नीतिगत प्रोत्साहन न दे।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एग्रीवोल्टेक्स क्या है और यह किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है?
एग्रीवोल्टेक्स वह तकनीक है जिसमें फसल भूमि के ऊपर सौर पैनल लगाए जाते हैं, जिससे खेती जारी रहती है और साथ ही बिजली उत्पादन भी होता है। इससे किसानों को सौर ऊर्जा की बिक्री से अतिरिक्त आमदनी मिल सकती है, जिससे वे अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बन सकते हैं।
एग्रीवोल्टेक्स विश्व सम्मेलन 2026 कहाँ और कब हुआ?
यह तीन दिवसीय सम्मेलन 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने संयुक्त रूप से किया।
भारत में एग्रीवोल्टेक्स की सबसे अधिक संभावना किन राज्यों में है?
महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश मिलकर भारत की अनुमानित एग्रीवोल्टेक्स क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। ये राज्य बड़े कृषि क्षेत्र और अनुकूल सौर विकिरण स्तर के कारण इस तकनीक के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं।
भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली उत्पादन क्षमता कितनी है?
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के अनुसार, भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 308.03 गीगावाट तक पहुँच गई है। यह देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता लगभग 560 गीगावाट का 55 प्रतिशत से अधिक है।
लघु किसानों के लिए एग्रीवोल्टेक्स में क्या खास प्रावधानों की बात हुई?
शिवराज सिंह चौहान ने ऐसे डिज़ाइनों की माँग की जो जुताई, फसल परिवर्तन और वर्षा जल निकासी में बाधा न डालें। इसके अलावा FPO की सक्रिय भागीदारी और ग्रामीण युवाओं-महिलाओं को उपकरण संचालन व रखरखाव का प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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