16 जुलाई 2026
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आषाढ़ी बीज पर PM मोदी ने कच्छी समुदाय को दी नव वर्ष की शुभकामनाएं, शेयर की पारंपरिक कहावत

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आषाढ़ी बीज पर PM मोदी ने कच्छी समुदाय को दी नव वर्ष की शुभकामनाएं, शेयर की पारंपरिक कहावत

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने आषाढ़ी बीज पर कच्छी समुदाय को नव वर्ष की बधाई देते हुए एक्स पर पारंपरिक कहावत साझा की — 'जैसे मछलियां समुद्र की होती हैं, वैसे ही कच्छ में रहने वाले कच्छ के ही हो जाते हैं।' गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और कई मंत्रियों ने भी शुभकामनाएं दीं।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जुलाई 2026 को आषाढ़ी बीज पर देश-विदेश के कच्छी समुदाय को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं।
मोदी ने एक्स पर एक पारंपरिक कच्छी कहावत साझा की, जो मातृभूमि से समुदाय के अटूट बंधन को दर्शाती है।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कच्छ की संस्कृति और प्रकृति का उल्लेख करते हुए शुभकामनाएं दीं।
कृषि मंत्री जीतू वघानी , परिवहन राज्य मंत्री प्रवीण गोर्धनजी माली और BJP सांसद मयंक नायक ने भी बधाई संदेश साझा किए।
आषाढ़ी बीज आषाढ़ माह की शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है और यह कच्छ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जुलाई 2026 को कच्छी नव वर्ष आषाढ़ी बीज के पावन अवसर पर देश-दुनिया में बसे समस्त कच्छी समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पारंपरिक कच्छी कहावत साझा की, जो कच्छवासियों के अपनी मातृभूमि से गहरे और अटूट जुड़ाव को बखूबी बयां करती है।

प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'कच्छ के लोगों का अपना अंदाज है। जैसे समुद्र में मछलियां होती हैं, वैसे ही जो कच्छ में रहते हैं, वे कच्छ के ही होकर रह जाते हैं। आज आषाढ़ी बीज का पर्व है, यह खास तौर पर कच्छ का ही त्योहार है। देश-दुनिया में बसे कच्छ के भाई-बहनों को 'राम-राम' और 'जीजी-जीजी' कहकर अभिवादन किया जाता है।' यह कहावत कच्छी संस्कृति की उस पहचान को रेखांकित करती है, जो भौगोलिक सीमाओं से परे अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है।

गुजरात के मुख्यमंत्री और मंत्रियों की शुभकामनाएं

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी इस अवसर पर कच्छवासियों को बधाई देते हुए कहा, 'कच्छ की समृद्ध धरती के मेहनती भाई-बहनों को नए साल की ढेरों शुभकामनाएं। यह नया साल आज के पवित्र त्योहार 'आषाढ़ी बीज' से शुरू हो रहा है, एक ऐसी जगह जहां रेगिस्तान भी कला का रूप ले लेता है और प्रकृति भी संस्कृति से ओत-प्रोत है।'

राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जीतू वघानी ने लिखा, 'यह आषाढ़ी बीज का अवसर है, जो कच्छ के लिए बहुत खास है। इस मौके पर देश और दुनिया में खुशहाली आई है और कच्छ भी जगमगा उठा है।' गुजरात के परिवहन राज्य मंत्री प्रवीण गोर्धनजी माली ने भी कच्छ की परंपरा, संस्कृति और विरासत का उल्लेख करते हुए सभी कच्छवासियों के जीवन में खुशी, शांति और समृद्धि की कामना की।

भाजपा सांसद की शुभकामना

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद मयंक नायक ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह नया साल कच्छ के हर परिवार के जीवन में खुशियां, शांति और समृद्धि लाए। गौरतलब है कि आषाढ़ी बीज का यह पर्व आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और यह विशेष रूप से कच्छ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है।

आषाढ़ी बीज का महत्व

आषाढ़ी बीज केवल एक नव वर्ष उत्सव नहीं, बल्कि कच्छी समुदाय की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यह ऐसे समय में आता है जब मानसून का आगमन होता है और किसान नई फसल की बुआई की तैयारी करते हैं। देश-विदेश में बसे कच्छी प्रवासी भी इस दिन अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश भारत की सांस्कृतिक विविधता और क्षेत्रीय परंपराओं के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां कच्छी समुदाय एक प्रभावशाली मतदाता वर्ग है। गौरतलब है कि 2001 के भूकंप के बाद कच्छ के पुनर्निर्माण में मोदी की तत्कालीन भूमिका ने उन्हें इस क्षेत्र में विशेष स्थान दिलाया था। क्षेत्रीय त्योहारों पर इस तरह के व्यक्तिगत और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील संदेश, प्रवासी भारतीय कच्छी समुदाय तक पहुंचने की एक सुसंगत रणनीति का हिस्सा हैं, जो विश्वभर में आर्थिक रूप से सक्रिय है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आषाढ़ी बीज क्या है और यह कब मनाया जाता है?
आषाढ़ी बीज कच्छी समुदाय का नव वर्ष पर्व है, जो आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह विशेष रूप से गुजरात के कच्छ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा त्योहार है और देश-विदेश में बसे कच्छी प्रवासी भी इसे उत्साह से मनाते हैं।
PM मोदी ने आषाढ़ी बीज पर क्या संदेश दिया?
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 'जैसे समुद्र में मछलियां होती हैं, वैसे ही जो कच्छ में रहते हैं, वे कच्छ के ही होकर रह जाते हैं।' उन्होंने देश-दुनिया में बसे कच्छ के भाई-बहनों को 'राम-राम' और 'जीजी-जीजी' कहकर अभिवादन किया।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आषाढ़ी बीज पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कच्छ की समृद्ध धरती और मेहनती कच्छवासियों को नए साल की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कच्छ एक ऐसी जगह है जहां रेगिस्तान भी कला का रूप ले लेता है और प्रकृति संस्कृति से ओत-प्रोत है।
आषाढ़ी बीज का कच्छी समुदाय के लिए क्या महत्व है?
आषाढ़ी बीज कच्छी समुदाय की सांस्कृतिक एकता और मातृभूमि से जुड़ाव का प्रतीक है। यह मानसून के आगमन के साथ मनाया जाता है और नई फसल की बुआई की शुरुआत का संकेत देता है। विश्वभर में फैले कच्छी प्रवासी इस दिन अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ाव महसूस करते हैं।
आषाढ़ी बीज 2026 पर किन अन्य नेताओं ने शुभकामनाएं दीं?
कृषि मंत्री जीतू वघानी, परिवहन राज्य मंत्री प्रवीण गोर्धनजी माली और BJP सांसद मयंक नायक ने भी सोशल मीडिया पर आषाढ़ी बीज की शुभकामनाएं साझा कीं। सभी ने कच्छवासियों के जीवन में खुशी, शांति और समृद्धि की कामना की।
राष्ट्र प्रेस
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