'एक पेड़ मां के नाम': मोदी की अपील — अहमदाबाद में 1 घंटे में 3.5 लाख पौधे, यूपी में 35 करोड़ रोपे गए
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देशवासियों से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जुड़ने की पुरज़ोर अपील की। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक छोटा-सा पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली, स्वच्छ हवा और एक सुंदर भविष्य की विरासत बन सकता है। इस अवसर पर उन्होंने गुजरात और उत्तर प्रदेश में अभियान के तहत हुए रिकॉर्ड वृक्षारोपण का विशेष उल्लेख किया।
अहमदाबाद में रिकॉर्ड: एक घंटे में 3.5 लाख पौधे
अहमदाबाद के भाड़ज क्षेत्र में जन-भागीदारी का असाधारण उदाहरण सामने आया, जहाँ मात्र एक घंटे के भीतर 3.5 लाख से अधिक पौधे रोपे गए। इस आयोजन में 25,000 से अधिक लोग शामिल हुए — जिनमें स्कूली बच्चे, NCC कैडेट्स, स्वयंसेवक और आम नागरिक सभी शामिल थे। इस सामूहिक प्रयास को गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।
मोदी ने कहा, 'अहमदाबाद में जन-भागीदारी की अद्भुत शक्ति दिखाई दी है। भाड़ज क्षेत्र में एक घंटे के भीतर साढ़े 3 लाख से अधिक पौधे रोपे गए, इसमें 25 हजार से अधिक लोग जुटे।' उन्होंने आगे कहा कि आने वाले वर्षों में ये पौधे एक घने शहरी वन का रूप लेंगे।
उत्तर प्रदेश में एक दिन में 35 करोड़ पौधे
उत्तर प्रदेश में 12 जुलाई को एक ही दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। प्रधानमंत्री ने यूपी के सांसद के रूप में इसे विशेष गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा, ''एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत यूपी में भी जन-शक्ति का अद्भुत संकल्प देखने को मिला है।' यह आँकड़ा राज्य स्तर पर अभियान की व्यापक पहुँच को रेखांकित करता है।
गिर के जंगलों में लौटा 'इंडियन ग्रे हॉर्नबिल'
मोदी ने वृक्षारोपण के पारिस्थितिक महत्त्व को समझाते हुए बताया कि गुजरात के गिर के जंगलों में करीब 60 वर्षों बाद 'इंडियन ग्रे हॉर्नबिल' पक्षी फिर से बसेरा बना रहा है। उन्होंने कहा कि यह वर्षों से चले आ रहे संरक्षण और पुनर्स्थापन प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि हॉर्नबिल को 'जंगलों का किसान' कहा जाता है — यह पक्षी फल खाता है और बीजों को दूर-दूर तक पहुँचाता है, जिससे नए पेड़ उगते हैं और जंगल हरे-भरे होते हैं। यह उदाहरण यह दर्शाता है कि पेड़ केवल मनुष्यों के लिए नहीं, बल्कि अनगिनत जीव-जंतुओं के आवास भी हैं।
अभियान का व्यापक संदेश
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे जीवन के किसी भी विशेष अवसर — जन्मदिन, शादी की सालगिरह या किसी स्मरणीय पल — को प्रकृति से जोड़ें और 'एक पेड़ मां के नाम' लगाएँ। यह ऐसे समय में आया है जब देश में जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण के कारण हरित आवरण पर दबाव बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि यह अभियान पहले भी 'मन की बात' में चर्चा का विषय रहा है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर जन-आंदोलन का रूप देने की कोशिश की जा रही है। आने वाले मानसून सत्र में इस अभियान के और विस्तार की उम्मीद है।