ईंधन बचाओ अपील पर जम्मू के लोगों का समर्थन, बोले- 'मोदी की बात राष्ट्र हित में'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत, ऊर्जा संरक्षण और अनावश्यक खपत में कटौती की अपील को जम्मू-कश्मीर के नागरिकों ने व्यापक समर्थन दिया है। 16 मई को जम्मू में स्थानीय निवासियों ने कहा कि वे प्रधानमंत्री की इस पहल के साथ हैं और छोटे-छोटे कदमों से देश की प्रगति में भागीदार बनना चाहते हैं।
जम्मू के नागरिकों की प्रतिक्रिया
जम्मू के एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'हमारा मानना है कि मोदी सही हैं और हमें उनकी बात माननी चाहिए। लोग कभी-कभी उनका समर्थन करते हैं लेकिन फिर भूल जाते हैं। हमें मोदी को नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि वे हमारे कल्याण की बात करते हैं, नुकसान की नहीं। पहले हम पैदल चलते थे, फिर साइकिल से, तांगे से और अब हमारे पास ऑटो और कारें हैं।'
एक अन्य नागरिक ने प्रधानमंत्री पद का सम्मान करते हुए कहा, 'हमें प्रधानमंत्री मोदी की बात सुननी चाहिए और उसका पालन करना चाहिए, क्योंकि देश में उनका पद सबसे ऊँचा है। जो कुछ वे कहते हैं, वह राष्ट्र के कल्याण के लिए होता है।'
एक अन्य व्यक्ति ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे जम्मू से कार द्वारा निकले, शामली से ट्रेन से सफर किया और गंतव्य पहुँचने के बाद घोड़े की गाड़ी का चुनाव किया — सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की पेट्रोल खपत घटाने की अपील को ध्यान में रखते हुए।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का बयान
इससे पहले मुंबई में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री की सात अपीलों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, 'यह हम सभी के लिए लोगों की भलाई में योगदान देने का एक शानदार अवसर है। हम छोटे-छोटे कदमों से भी बड़े परिणाम हासिल कर सकते हैं। जब पूरा समाज मिलकर देश के निर्माण और सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए काम करेगा, तभी देश तेजी से आगे बढ़ेगा।'
ऊर्जा संरक्षण का व्यापक असर
मंत्री गोयल ने रेखांकित किया कि ऊर्जा संरक्षण, ईंधन बचत और अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण जैसे सामूहिक प्रयास यदि पूरे देश में अपनाए जाएँ, तो अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। गौरतलब है कि यह अपील ऐसे समय में आई है जब भारत ऊर्जा आयात पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में नीतिगत कदम उठा रहा है।
आगे क्या
प्रधानमंत्री की इस अपील का असर ज़मीनी स्तर पर किस हद तक दिखता है, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा। नागरिकों की स्वैच्छिक भागीदारी इस पहल की सफलता की कुंजी मानी जा रही है।