मन की बात में PM मोदी की अपील: गर्मी में 'पानी पीते रहें', देसी पेय से लें राहत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मई 2026 को 'मन की बात' कार्यक्रम के 134वें एपिसोड में देशवासियों से गर्मी के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच पानी पीते रहना और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। यह संबोधन ऐसे समय में आया जब भारत के अनेक राज्यों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है।
मुख्य संदेश: गर्मी से बचाव
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है। तेज धूप और गर्म हवाएं, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सरकार के विभिन्न विभागों ने गर्मी से बचाव के लिए जो दिशानिर्देश जारी किए हैं, उन्हें नज़रअंदाज़ न किया जाए।
रसोई में छुपा है गर्मी से लड़ने का तरीका
मोदी ने कहा कि भारत में गर्मी से निपटने के उपाय अक्सर घर की रसोई में ही मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, रसोई का स्वाद और प्रकार बदल जाता है — कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगती है, तो कहीं कच्चे आम उबलने लगते हैं और देसी पेय का दौर शुरू हो जाता है। गौरतलब है कि यह भारत की सदियों पुरानी ग्रीष्मकालीन परंपरा का हिस्सा है, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
क्षेत्रीय पेय: 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की झलक
प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक ग्रीष्मकालीन पेय का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'भारत के पारंपरिक ग्रीष्मकालीन पेय देश के विभिन्न क्षेत्रों की रीति-रिवाजों और संस्कृतियों में गहराई से रचे-बसे हैं। हर पेय एक अनूठी कहानी कहता है, जो मिलकर भारत की जीवंत विविधता को प्रदर्शित करते हैं और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को सुदृढ़ करते हैं।'
उन्होंने उत्तर भारत में आम पन्ना, पंजाब और हरियाणा की लस्सी, राजस्थान और गुजरात की छाछ, तथा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सत्तू शरबत का विशेष उल्लेख किया। इसके अलावा कोंकण और गोवा का कोकम शरबत, दक्षिण भारत का पानकम और सम्बारम, तथा ओडिशा का बेल पना भी उनके संबोधन में शामिल रहे।
आम जनता पर असर
मोदी का यह संदेश उन करोड़ों नागरिकों के लिए प्रासंगिक है जो इस समय भीषण गर्मी में काम करने या बाहर निकलने को मजबूर हैं। हर साल गर्मी के मौसम में लू लगने की घटनाएं सामने आती हैं, और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी पर्याप्त जलयोजन बनाए रखने की सलाह देते हैं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे इन देसी पेय का खूब आनंद लें और गर्मी से खुद को सुरक्षित रखें।
क्या होगा आगे
सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा जारी हीटवेव दिशानिर्देश अभी भी प्रभावी हैं। प्रधानमंत्री के इस संबोधन के बाद उम्मीद है कि राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर पर जागरूकता अभियान को और तेज करेंगी, ताकि गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को कम किया जा सके।