पीओके हिंसा पर शिवसेना के संजय निरुपम बोले — पाकिस्तानी फायरिंग में 16 की मौत, भारत सख्त रुख अपनाए
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 12 जून 2026 को मुंबई में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पीओके में पाकिस्तानी सेना की फायरिंग और बमबारी की खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें कथित तौर पर लगभग 16 लोगों की मौत हुई है। निरुपम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब भारत को इस मसले पर निर्णायक और कठोर रुख अपनाने का समय आ गया है।
पीओके पर भारत का रुख
निरुपम ने दोहराया कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है और वहाँ के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पीओके को भारत में पुनः शामिल करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। उनके अनुसार, भारत का जनमानस भी यही चाहता है कि उस क्षेत्र में स्थिरता स्थापित हो और वहाँ के लोग सुरक्षित जीवन जी सकें।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर निरुपम का आकलन
शिवसेना प्रवक्ता ने हाल ही में हुई नीति आयोग की बैठक का भी उल्लेख किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक दिशा पर महत्वपूर्ण बातें कही थीं। निरुपम ने कहा कि वैश्विक संकटों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था स्थिरता के साथ आगे बढ़ रही है।
विश्व बैंक के अनुमानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक विकास दर पहले 6.6 प्रतिशत के आसपास थी, जो आने वाले वर्षों में बढ़कर लगभग 7.2 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी गति से आगे बढ़ते हुए भारत शीघ्र ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब महंगाई और रोजगार जैसी चुनौतियाँ अभी भी चर्चा में हैं। निरुपम ने माना कि ये मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन उनके अनुसार सरकार समग्र आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सफल रही है।
तृणमूल कांग्रेस पर हमला
निरुपम ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आंतरिक स्थिति पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में गंभीर संकट है — कई वरिष्ठ नेता संगठन से दूरी बना रहे हैं और नेतृत्व को लेकर मतभेद सार्वजनिक होने लगे हैं। गौरतलब है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और TMC के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चाएँ जारी हैं, जिससे विपक्षी खेमे में संगठनात्मक अस्थिरता और गहरी होती दिख रही है।
आगे क्या
पीओके हिंसा के घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया अभी प्रतीक्षित है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और कूटनीतिक कदम आने वाले दिनों में इस मुद्दे की दिशा तय करेंगे।