प्रकाश आंबेडकर का राहुल गांधी से आग्रह: अरुणाचल सुरक्षा मुद्दा संसद में उठाएं
सारांश
मुख्य बातें
वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने 8 जुलाई को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर संसद में जवाब माँगा जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से अपेक्षा जताई कि वे इस मुद्दे को संसद के पटल पर प्रमुखता से उठाएंगे।
मुख्य घटनाक्रम
आंबेडकर ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के एक संगठन 'नाहा वेलफेयर सोसाइटी' ने राज्य के डिप्टी कमिश्नर को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उल्लेख है कि ताकसिंग इलाके में स्थानीय लोग अपने पशुओं को लेकर जाते थे, जिस पर अब पाबंदी लगा दी गई है। इस संबंध में अरुणाचल प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को, केंद्रीय गृह मंत्रालय को तथा रक्षा मंत्रालय को पत्र भेजे हैं।
आंबेडकर के अनुसार, अभी तक न तो गृह मंत्रालय, न रक्षा मंत्रालय और न ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से अरुणाचल प्रदेश सरकार को इस विषय पर कोई निर्देश या आदेश दिया गया है।
केंद्र सरकार पर सवाल
आंबेडकर ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से चीन को लेकर बार-बार दावे किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अरुणाचल की रिपोर्टों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अंततः इस मामले में डोनाल्ड ट्रंप की किसी घोषणा का इंतज़ार किया जा रहा है।
उन्होंने तमाम राजनीतिक दलों के प्रमुखों से आह्वान किया कि संसद सत्र शुरू होते ही पहले दिन से सरकार को इस मुद्दे पर घेरा जाए और पूछा जाए कि अरुणाचल सरकार की रिपोर्ट पर केंद्र का रुख क्या है।
राम मंदिर चंदा विवाद पर टिप्पणी
आंबेडकर ने राम मंदिर चंदा विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके मुताबिक त्रावणकोर मंदिर में जितनी चोरी हुई थी, उससे कई गुना अधिक चोरी राम मंदिर में हुई है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह 'घर का मामला' है और इसे किसी भी समय सुलझाया जा सकता है। उनके अनुसार, देश की सुरक्षा के सामने सभी अन्य मुद्दे गौण हैं।
राजनीतिक दलों से अपील
आंबेडकर ने कहा कि उन्होंने अरुणाचल से जुड़े कई दस्तावेज़ विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुखों को भेजे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस प्रेस वार्ता के बाद इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा और सभी दल संसद में अपनी-अपनी भूमिका निभाएंगे। यह देखना अहम होगा कि आगामी संसद सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को कितनी प्रभावी तरीके से उठाता है।