बारुईपुर एनकाउंटर: TMC और कांग्रेस का भाजपा पर 'यूपी मॉडल' अपनाने का आरोप, मंत्री ने किया बचाव
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में दुष्कर्म और हत्या के मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों में से एक की 8 जुलाई को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों — विशेषकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस — ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर आरोप लगाया है कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस के एनकाउंटर मॉडल की राह पर चल रही है।
मुख्य घटनाक्रम
बारुईपुर मामले में गिरफ्तार एक आरोपी की पुलिस हिरासत के दौरान मुठभेड़ में मौत हुई। इससे पहले, एक अन्य आरोपी की भीड़ के हमले में मृत्यु हो चुकी है। राज्य सरकार के मंत्री तापस रॉय ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि गिरफ्तार आरोपी जाँच के दौरान भागने की कोशिश कर रहा था और उसने एक पुलिस अधिकारी की बंदूक छीनने का प्रयास किया था।
तापस रॉय ने कहा, 'ऐसे अपराधियों के साथ पुलिस क्या कर सकती थी?' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और सभी आरोपियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों के अनुसार बारुईपुर मामले के आरोपी भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे। उन्होंने सवाल उठाया, 'आरोपी को आधी रात में बाहर क्यों ले जाया गया? पुलिस हिरासत में मौजूद किसी व्यक्ति को शाम से सुबह के बीच बाहर नहीं ले जाया जा सकता।'
कल्याण बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस कथित तौर पर आरोपियों को इसलिए मार रही है ताकि वे भाजपा से अपने कनेक्शन का खुलासा न कर सकें। उन्होंने कहा, 'पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली का अनुसरण कर रही है।'
तृणमूल कांग्रेस के एक अन्य सांसद सौगात रॉय ने इस पूरी घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पुलिस ने 'मनगढ़ंत कहानी' पेश की है। उन्होंने कहा, 'एनकाउंटर मामलों में अक्सर यही कहा जाता है कि आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था और पुलिस को गोली चलानी पड़ी। हम चाहते हैं कि पूरी सच्चाई जनता के सामने आए और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।'
अन्य दलों का रुख
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक भाई वीरेंद्र ने नाबालिग के साथ हुई घटना को दुखद बताते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी भी सरकार को एनकाउंटर करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, 'सजा देने के लिए अदालत है — अदालत चाहे तो उम्रकैद दे सकती है या फाँसी की सजा भी सुना सकती है। एनकाउंटर कानून के खिलाफ है।'
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने भाजपा की आलोचना करते हुए याद दिलाया कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर 'जीरो टॉलरेंस' और 'डबल इंजन सरकार के साथ सोनार बांग्ला' का वादा किया था। उन्होंने कहा, 'हाथरस और उन्नाव जैसी घटनाओं की तरह अब बारुईपुर मामला भी डबल इंजन सरकार के दौर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सूची में शामिल हो गया है।'
आम जनता और कानूनी पहलू पर असर
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर पहले से ही राजनीतिक तनाव बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि न्यायेतर हत्याएँ — चाहे उनकी परिस्थितियाँ कुछ भी हों — न्यायिक प्रक्रिया को कमज़ोर करती हैं और पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय सबूतों को नष्ट करने का खतरा पैदा करती हैं। गौरतलब है कि एनकाउंटर की वैधता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहले भी कड़े दिशानिर्देश जारी कर चुका है।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों ने मामले की स्वतंत्र जाँच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की है। राज्य सरकार ने अभी तक किसी मजिस्ट्रेट जाँच की घोषणा नहीं की है। यह मामला आने वाले दिनों में विधानसभा में भी गूँजने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही के व्यापक सवाल से जोड़ रहा है।