9 जुलाई 2026
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बारुईपुर एनकाउंटर: TMC और कांग्रेस का भाजपा पर 'यूपी मॉडल' अपनाने का आरोप, मंत्री ने किया बचाव

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बारुईपुर एनकाउंटर: TMC और कांग्रेस का भाजपा पर 'यूपी मॉडल' अपनाने का आरोप, मंत्री ने किया बचाव

सारांश

बारुईपुर दुष्कर्म-हत्या मामले में एक आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मौत ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को हिला दिया है। TMC सांसदों और कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर 'यूपी एनकाउंटर मॉडल' अपनाने का आरोप लगाया है, जबकि मंत्री तापस रॉय ने पुलिस कार्रवाई को जायज़ ठहराया है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर दुष्कर्म-हत्या मामले में गिरफ्तार चार में से एक आरोपी की 8 जुलाई को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई।
तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी और सौगात रॉय ने भाजपा सरकार पर 'उत्तर प्रदेश एनकाउंटर मॉडल' अपनाने का आरोप लगाया।
RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि एनकाउंटर कानून के खिलाफ है और सजा देने का अधिकार केवल अदालत को है।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने बारुईपुर की तुलना हाथरस और उन्नाव जैसे मामलों से की।
राज्य मंत्री तापस रॉय ने पुलिस का बचाव करते हुए कहा कि आरोपी भागने की कोशिश में था और उसने पुलिस की बंदूक छीनने का प्रयास किया।

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में दुष्कर्म और हत्या के मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों में से एक की 8 जुलाई को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों — विशेषकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस — ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर आरोप लगाया है कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस के एनकाउंटर मॉडल की राह पर चल रही है।

मुख्य घटनाक्रम

बारुईपुर मामले में गिरफ्तार एक आरोपी की पुलिस हिरासत के दौरान मुठभेड़ में मौत हुई। इससे पहले, एक अन्य आरोपी की भीड़ के हमले में मृत्यु हो चुकी है। राज्य सरकार के मंत्री तापस रॉय ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि गिरफ्तार आरोपी जाँच के दौरान भागने की कोशिश कर रहा था और उसने एक पुलिस अधिकारी की बंदूक छीनने का प्रयास किया था।

तापस रॉय ने कहा, 'ऐसे अपराधियों के साथ पुलिस क्या कर सकती थी?' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और सभी आरोपियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों के अनुसार बारुईपुर मामले के आरोपी भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे। उन्होंने सवाल उठाया, 'आरोपी को आधी रात में बाहर क्यों ले जाया गया? पुलिस हिरासत में मौजूद किसी व्यक्ति को शाम से सुबह के बीच बाहर नहीं ले जाया जा सकता।'

कल्याण बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस कथित तौर पर आरोपियों को इसलिए मार रही है ताकि वे भाजपा से अपने कनेक्शन का खुलासा न कर सकें। उन्होंने कहा, 'पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली का अनुसरण कर रही है।'

तृणमूल कांग्रेस के एक अन्य सांसद सौगात रॉय ने इस पूरी घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पुलिस ने 'मनगढ़ंत कहानी' पेश की है। उन्होंने कहा, 'एनकाउंटर मामलों में अक्सर यही कहा जाता है कि आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था और पुलिस को गोली चलानी पड़ी। हम चाहते हैं कि पूरी सच्चाई जनता के सामने आए और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।'

अन्य दलों का रुख

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक भाई वीरेंद्र ने नाबालिग के साथ हुई घटना को दुखद बताते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी भी सरकार को एनकाउंटर करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, 'सजा देने के लिए अदालत है — अदालत चाहे तो उम्रकैद दे सकती है या फाँसी की सजा भी सुना सकती है। एनकाउंटर कानून के खिलाफ है।'

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने भाजपा की आलोचना करते हुए याद दिलाया कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर 'जीरो टॉलरेंस' और 'डबल इंजन सरकार के साथ सोनार बांग्ला' का वादा किया था। उन्होंने कहा, 'हाथरस और उन्नाव जैसी घटनाओं की तरह अब बारुईपुर मामला भी डबल इंजन सरकार के दौर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सूची में शामिल हो गया है।'

आम जनता और कानूनी पहलू पर असर

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर पहले से ही राजनीतिक तनाव बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि न्यायेतर हत्याएँ — चाहे उनकी परिस्थितियाँ कुछ भी हों — न्यायिक प्रक्रिया को कमज़ोर करती हैं और पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय सबूतों को नष्ट करने का खतरा पैदा करती हैं। गौरतलब है कि एनकाउंटर की वैधता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहले भी कड़े दिशानिर्देश जारी कर चुका है।

आगे क्या होगा

विपक्षी दलों ने मामले की स्वतंत्र जाँच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की है। राज्य सरकार ने अभी तक किसी मजिस्ट्रेट जाँच की घोषणा नहीं की है। यह मामला आने वाले दिनों में विधानसभा में भी गूँजने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही के व्यापक सवाल से जोड़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी राज्य सरकार ने अभी तक ऐसी किसी जाँच की घोषणा नहीं की। विपक्ष के आरोप राजनीति से प्रेरित हो सकते हैं, लेकिन यह सवाल वैध है कि आधी रात को हिरासत में लिए गए व्यक्ति को बाहर क्यों ले जाया गया। जब तक पारदर्शी जाँच नहीं होती, यह घटना न्याय की जगह बदले की राजनीति का प्रतीक बनने का खतरा उठाती है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बारुईपुर एनकाउंटर मामला क्या है?
पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में दुष्कर्म और हत्या के मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों में से एक की 8 जुलाई को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। इससे पहले एक अन्य आरोपी की भीड़ के हमले में मृत्यु हो चुकी थी।
विपक्ष ने 'यूपी मॉडल' का आरोप क्यों लगाया?
तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश की तर्ज पर न्यायेतर एनकाउंटर को बढ़ावा दे रही है। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने सवाल उठाया कि आरोपी को आधी रात में हिरासत से बाहर क्यों ले जाया गया।
राज्य सरकार का इस पर क्या रुख है?
पश्चिम बंगाल के मंत्री तापस रॉय ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था और उसने पुलिस अधिकारी की बंदूक छीनने का प्रयास किया। उन्होंने इसे सरकार की महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताया।
क्या एनकाउंटर कानूनी रूप से वैध है?
RJD विधायक भाई वीरेंद्र और विपक्षी नेताओं का कहना है कि एनकाउंटर कानून के खिलाफ है और सजा देने का अधिकार केवल अदालत को है। सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार हर एनकाउंटर की मजिस्ट्रेट जाँच अनिवार्य है।
आगे इस मामले में क्या हो सकता है?
विपक्षी दलों ने स्वतंत्र जाँच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की है। राज्य सरकार ने अभी तक किसी मजिस्ट्रेट जाँच की घोषणा नहीं की है और यह मामला विधानसभा में भी उठाए जाने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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