9 जुलाई 2026
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एच-1बी वीजा धोखाधड़ी जांच: ट्रंप प्रशासन ने दर्जनों सबपोना जारी किए, कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियां रडार पर

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एच-1बी वीजा धोखाधड़ी जांच: ट्रंप प्रशासन ने दर्जनों सबपोना जारी किए, कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियां रडार पर

सारांश

ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी और पर्म वीजा में कथित धोखाधड़ी की अब तक की सबसे बड़ी जांच छेड़ दी है — दर्जनों सबपोना जारी हो चुके हैं, कॉग्निजेंट जैसी बड़ी आईटी कंपनियां व्हिसलब्लोअर सूचनाओं के आधार पर रडार पर हैं, और जांच का दायरा फैक्ट्रियों से लेकर अस्पतालों तक फैला है।

मुख्य बातें

ट्रंप प्रशासन ने 8 जुलाई 2026 को एच-1बी और पर्म रोजगार वीजा में कथित धोखाधड़ी की बड़े पैमाने पर जांच शुरू की।
श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी'एस्पोसिटो ने कहा यह अब तक की सबसे आक्रामक विदेशी श्रम धोखाधड़ी जांच होगी।
जांच के तहत पहले ही दर्जनों सबपोना नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
व्हिसलब्लोअर्स ने कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियों से जुड़े संदिग्ध मामलों की जानकारी दी है।
जांच न्याय विभाग, फेडरल प्रॉसिक्यूटर और उपराष्ट्रपति वेंस की फ्रॉड टास्क फोर्स के सहयोग से की जा रही है।
जांच का दायरा फैक्ट्रियों और बंदरगाहों से लेकर अस्पतालों और नर्सिंग सुविधाओं तक फैला है।

अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी'एस्पोसिटो ने 8 जुलाई 2026 को घोषणा की कि ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी और 'पर्म' रोजगार वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी की अब तक की सबसे बड़े पैमाने पर जांच शुरू कर दी है। इस जांच के तहत पहले ही दर्जनों सबपोना नोटिस जारी किए जा चुके हैं और मजदूरों की तस्करी तथा विदेशी श्रम कार्यक्रमों के दुरुपयोग की आशंकाओं की पड़ताल की जा रही है।

जांच का दायरा और प्रकृति

डी'एस्पोसिटो ने कहा कि यह जांच विदेशी श्रम से जुड़ी कथित धोखाधड़ी के खिलाफ इंस्पेक्टर जनरल के दफ्तर की अब तक की सबसे सख्त कार्रवाइयों में से एक होगी। उनके अनुसार, जांच में अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में स्थित फैक्ट्रियों, बंदरगाहों, अस्पतालों और नर्सिंग सुविधाओं से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

उन्होंने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा, 'इसमें कोई शक नहीं है कि यह प्रशासन विदेशी श्रम धोखाधड़ी के खिलाफ अब तक की सबसे आक्रामक कार्रवाई करेगा। हमने पहले ही दर्जनों सबपोना जारी कर दिए हैं।'

बड़ी कंपनियां भी जांच के घेरे में

डी'एस्पोसिटो ने खुलासा किया कि कुछ व्हिसलब्लोअर्स ने 'कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियों' से जुड़े संदिग्ध मामलों की जानकारी दी है। यह ऐसे समय में आया है जब तकनीकी क्षेत्र में एच-1बी वीजा के उपयोग को लेकर पहले से ही अमेरिकी नीति-निर्माताओं में बहस चल रही है। गौरतलब है कि कॉग्निजेंट जैसी आईटी सेवा कंपनियां एच-1बी वीजा की सबसे बड़ी उपयोगकर्ताओं में रही हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का दायरा केवल विनिर्माण क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, 'ये सिर्फ फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग नहीं हैं। ऐसे लोग मेडिकल सुविधाओं और डॉक्टरों के क्लीनिकों में भी काम कर रहे हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।'

आपराधिक नेटवर्क से संभावित संबंध

इंस्पेक्टर जनरल ने आरोप लगाया कि विदेशी श्रम कार्यक्रमों में होने वाली कथित धोखाधड़ी का संबंध बड़े आपराधिक नेटवर्क, ड्रग कार्टेल और अंतरराष्ट्रीय गैंग से भी हो सकता है। उनके अनुसार, 'यह एक और उदाहरण है कि कैसे धोखाधड़ी हिंसक अपराधों को बढ़ावा देती है।' हालांकि, ये दावे अभी जांच के प्रारंभिक चरण में हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

फ्रॉड टास्क फोर्स की भूमिका

डी'एस्पोसिटो ने बताया कि जांच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की फ्रॉड टास्क फोर्स के सहयोग से आगे बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, न्याय विभाग और फेडरल प्रॉसिक्यूटर भी इस जांच में भागीदार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'जो लोग धोखाधड़ी कर रहे हैं, उन्हें ढूंढ़ा जाएगा, उनकी जांच होगी, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और जेल भेजा जाएगा।'

अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा का मकसद

इंस्पेक्टर जनरल ने जोर दिया कि इस जांच का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार-आधारित वीजा कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग की वजह से अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित न हों। आलोचकों का कहना है कि इस जांच के दायरे और उद्देश्यों को लेकर अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं और देखना होगा कि यह कार्रवाई वास्तविक धोखाधड़ी उजागर करती है या व्यापक वीजा नीति बदलाव की पृष्ठभूमि तैयार करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियों' का नाम लेना — बिना औपचारिक आरोप के — कानूनी और व्यावसायिक दृष्टि से विवादास्पद कदम है। आलोचकों का कहना है कि व्यापक जांच की आड़ में वैध विदेशी कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं पर अनावश्यक दबाव बन सकता है। यह भी गौरतलब है कि एच-1बी कार्यक्रम में सुधार की मांग दोनों दलों में रही है, लेकिन 'धोखाधड़ी' और 'नीतिगत असहमति' के बीच की रेखा इस जांच में कहाँ खींची जाएगी — यही असली सवाल है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एच-1बी वीजा धोखाधड़ी जांच क्या है और इसे किसने शुरू किया?
यह जांच अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी'एस्पोसिटो के नेतृत्व में 8 जुलाई 2026 को शुरू की गई है। इसका उद्देश्य एच-1बी और पर्म रोजगार वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी, मजदूरों की तस्करी और विदेशी श्रम कार्यक्रमों के दुरुपयोग की जांच करना है।
इस जांच में कौन-सी बड़ी कंपनियां संदेह के घेरे में हैं?
व्हिसलब्लोअर्स ने कथित तौर पर 'कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियों' से जुड़े मामलों की जानकारी दी है। हालांकि, अभी तक किसी कंपनी के खिलाफ औपचारिक आरोप नहीं लगाए गए हैं और जांच प्रारंभिक चरण में है।
सबपोना नोटिस क्या होता है और कितने जारी किए गए हैं?
सबपोना एक कानूनी नोटिस है जिसके तहत किसी व्यक्ति या संस्था को दस्तावेज़ प्रस्तुत करने या गवाही देने का आदेश दिया जाता है। इस जांच में अब तक दर्जनों सबपोना नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
इस जांच का अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों पर क्या असर पड़ सकता है?
एच-1बी वीजा पर काम करने वाले भारतीय पेशेवर इस जांच के दायरे में तभी आ सकते हैं यदि उनके नियोक्ता या वीजा प्रायोजक पर धोखाधड़ी का संदेह हो। वैध दस्तावेज़ और पारदर्शी नियोक्ता वाले कर्मचारियों पर तत्काल कोई सीधा प्रभाव अपेक्षित नहीं है, लेकिन जांच का माहौल वीजा प्रक्रिया को और कठिन बना सकता है।
यह जांच किन एजेंसियों के सहयोग से की जा रही है?
यह जांच अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल के दफ्तर के नेतृत्व में न्याय विभाग, फेडरल प्रॉसिक्यूटर और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की फ्रॉड टास्क फोर्स के संयुक्त सहयोग से की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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