भाकपा (माओवादी) के प्रमुख नेता प्रशांत बोस का निधन, रांची में इलाज के दौरान हुई मौत

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भाकपा (माओवादी) के प्रमुख नेता प्रशांत बोस का निधन, रांची में इलाज के दौरान हुई मौत

सारांश

प्रशांत बोस, भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता, जिनका निधन रांची के रिम्स अस्पताल में हुआ। 75 वर्षीय प्रशांत की तबीयत अचानक बिगड़ी थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके निधन से सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस प्रशासन अलर्ट पर हैं।

Key Takeaways

  • प्रशांत बोस का निधन भाकपा (माओवादी) के लिए एक बड़ा आघात है।
  • उन्होंने संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें 'किशन दा' के नाम से जाना जाता था।
  • उनकी गिरफ्तारी से पहले उन पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
  • प्रशांत बोस को नक्सली गतिविधियों का मास्टरमाइंड माना जाता था।
  • उनकी मृत्यु के बाद सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है।

रांची, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के एक प्रमुख नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस, जिन्हें 'किशन दा' के नाम से जाना जाता था, का शुक्रवार को रांची के रिम्स अस्पताल में निधन हो गया। 75 वर्षीय प्रशांत बोस की तबीयत अचानक बिगड़ने के कारण उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।

जेल प्रशासन के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे प्रशांत बोस को सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने लगी। तत्परता से उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) ले जाया गया। चिकित्सकों की विशेष टीम ने उनका उपचार प्रारंभ किया, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और सुबह लगभग 10 बजे डॉक्टरों ने उनके निधन की पुष्टि कर दी। जेल और अस्पताल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की है।

प्रशांत बोस को माओवादी संगठन में महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता था। वह संगठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के महत्वपूर्ण सदस्य थे, साथ ही 'ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो' के सचिव भी रहे। मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी प्रशांत बोस को नक्सली गलियारों में 'मनीष' और 'बूढ़ा' के नाम से भी जाना जाता था।

प्रशांत बोस नक्सली संगठन के प्रमुख नेताओं में से एक थे और उन्हें महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में देखा जाता था। वह भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के महत्वपूर्ण सदस्य रहे थे। संगठन के भीतर उन्हें 'किशन दा' के नाम से जाना जाता था और रणनीतिक निर्णयों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती थी।

प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा टोल ब्रिज के पास उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उन पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में 200 से अधिक नक्सली घटनाओं का मास्टरमाइंड रहे थे।

लगभग चार दशकों तक सक्रिय रहने वाले प्रशांत बोस को संगठन का 'थिंक टैंक' माना जाता था। गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में थे और उम्र संबंधी बीमारियों से ग्रस्त थे। उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक मानी जाती है। लंबे समय से जेल में रहने और बढ़ती उम्र के कारण वे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे। उनकी मृत्यु के बाद सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस प्रशासन सतर्क हो गए हैं। फिलहाल पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी करने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

Point of View

जो न केवल नक्सली आंदोलन के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक संकेत है। उनकी गिरफ्तारी और बाद में जेल में स्वास्थ्य समस्याओं ने एक बार फिर से नक्सलवाद की समस्या को उजागर किया है। यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चुनौती है और समाज के लिए एक गंभीर संज्ञान है।
NationPress
04/04/2026

Frequently Asked Questions

प्रशांत बोस कौन थे?
प्रशांत बोस भाकपा (माओवादी) के एक प्रमुख नेता थे, जिन्हें 'किशन दा' के नाम से जाना जाता था।
प्रशांत बोस का निधन कब हुआ?
प्रशांत बोस का निधन 3 अप्रैल 2023 को रांची के रिम्स अस्पताल में हुआ।
प्रशांत बोस की गिरफ्तारी कब हुई थी?
प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था।
प्रशांत बोस को कितनी उम्र थी?
प्रशांत बोस की उम्र 75 वर्ष थी जब उनका निधन हुआ।
उनकी मृत्यु के बाद क्या कार्रवाई की गई?
उनकी मृत्यु के बाद सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस प्रशासन अलर्ट पर हैं और आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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