महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण: प्रियंका चतुर्वेदी का जोरदार समर्थन
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की आवश्यकता
- प्रियंका चतुर्वेदी का समर्थन
- संविधान के अनुसार महिलाओं को समान अधिकार
- राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण विधेयक पर संसद का विशेष सत्र आयोजित करने के निर्णय पर शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि मैं इस कदम का स्वागत करती हूं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी में बढ़ोतरी होनी चाहिए और आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना आवश्यक है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने नई दिल्ली में समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि महिलाओं की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। मैं इस मुद्दे का समर्थन करती हूं और हमेशा करती रहूंगी। महिलाएं पिछले 25 वर्षों से इस संघर्ष में हैं। हमें याद रखना चाहिए कि संविधान सभी को समान अधिकार प्रदान करता है, फिर भी ऐसी बाधाएँ हैं, जिन्होंने राजनीति में महिलाओं को उनकी योग्य जगह नहीं दी। लोकसभा और विधानसभा में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। अधिक से अधिक महिलाओं को राजनीति में आना चाहिए और वे अपने मुद्दों को संसद में उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2024 से पहले ही पास हो चुका था, लेकिन सरकार की दृष्टि इतनी सीमित है कि डेढ़ साल बाद संशोधन लाने का निर्णय लिया गया।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि हम हमेशा यही कहते आए हैं कि जो भी कानून पारित हो, उसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। जब स्थानीय निकाय चुनावों के लिए आरक्षण आया था, तो उसे चुनाव चक्र के साथ तुरंत लागू किया गया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। कहा गया था कि इसे 2029 तक लागू करेंगे।
शिवसेना (यूबीटी) की नेता ने कहा कि सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ने की बात कही थी, लेकिन उन्हें यह पता था कि ऐसा करना संभव नहीं होगा, इसलिए वे 2011 की जनगणना के आधार पर इसे लेकर आ रहे हैं। अब उन्हें संशोधन लाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।