पुलवामा में हाई-डेंसिटी सेब की तुड़ाई शुरू, बंपर फसल से किसान उत्साहित; कृषि अधिकारी ने सही पकाव का इंतजार करने की सलाह दी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में 2 अगस्त 2026 को हाई-डेंसिटी सेब की तुड़ाई का सीजन आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। इस वर्ष बंपर पैदावार ने किसानों में उत्साह भर दिया है, वहीं मुख्य बागवानी अधिकारी रियाज अहमद शाह सहित कृषि विभाग ने उत्पादकों और फल एजेंटों से अपील की है कि जल्दी मुनाफे के लालच में कच्चा फल न तोड़ें। विशेषज्ञों के अनुसार, सेब के सही आकार, रंग और मिठास का इंतजार करने पर ही मंडियों में बेहतर दाम मिलेंगे।
हाई-डेंसिटी खेती के फायदे
पुलवामा के एक सेब किसान ने बताया, 'पारंपरिक बागों की तुलना में हाई-डेंसिटी सेब की खेती के कई फायदे हैं। हमारे इलाके में पारंपरिक सेब के पेड़ों पर फल आने में 10-15 साल लग जाते हैं, जबकि हाई-डेंसिटी वाली किस्मों, खासकर इटैलियन गाला किस्म में फल बहुत पहले आ जाते हैं। सेबों का रंग जल्दी आता है और वे बाजार में भी जल्दी पहुँचते हैं, जिससे किसानों को फायदा होता है। इस साल फसल भी बंपर है। अब बस उम्मीद है कि मार्केट में अच्छा रेट मिले।'
किसान ने आगे कहा कि हाई-डेंसिटी बागों में प्रति एकड़ उत्पादन अधिक होता है और रखरखाव भी आसान है। ड्रिप इरिगेशन और आधुनिक कृषि तकनीक के उपयोग से पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, हालाँकि गुणवत्ता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कृषि अधिकारी की अपील
मुख्य बागवानी अधिकारी रियाज अहमद शाह ने बताया, 'पुलवामा में हाई-डेंसिटी वाले सेब की तुड़ाई शुरू हो गई है। हमारी फसल — चाहे वह हाई-डेंसिटी वाली हो या पारंपरिक बागवानी वाली — उसका अपना एक समय होता है। फूल आने से लेकर फल तोड़ने तक एक निश्चित अंतराल होता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि रंग, आकार, मिठास और तने से अलग होने की क्षमता — ये चार संकेत बताते हैं कि फल कटाई के लिए तैयार है या नहीं।
शाह ने बागवानों को सलाह देते हुए कहा, 'अगर सेब पूरी तरह पककर सही साइज और रंग का होगा तो न सिर्फ क्वालिटी बेहतर होगी, बल्कि मंडियों में भी दाम अच्छा मिलेगा। जल्दी तुड़ाई से बाजार खराब होता है और किसान को नुकसान होता है।'
रकबे में विस्तार और सरकारी योजनाएँ
कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष पुलवामा में हाई-डेंसिटी सेब के रकबे में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी पर पौधे और तकनीकी सहायता मिलने से युवा किसान भी इस आधुनिक खेती पद्धति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कश्मीर घाटी में सेब उद्योग को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
आम जनता और किसानों पर असर
गौरतलब है कि कश्मीर का सेब उद्योग लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है। हाई-डेंसिटी खेती का विस्तार न केवल उत्पादकता बढ़ाता है, बल्कि युवा पीढ़ी को कृषि से जोड़े रखने में भी सहायक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान धैर्य रखते हुए सही समय पर तुड़ाई करें, तो इस सीजन की बंपर फसल उनकी आय में महत्वपूर्ण वृद्धि कर सकती है।