30 अगस्त 2026
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रामबन में RMUHD स्कीम: बनिहाल को सेब उत्पादन केंद्र बनाने की कोशिश, 20 हेक्टेयर का लक्ष्य

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रामबन में RMUHD स्कीम: बनिहाल को सेब उत्पादन केंद्र बनाने की कोशिश, 20 हेक्टेयर का लक्ष्य

सारांश

जम्मू-कश्मीर का रामबन जिला अब सेब उत्पादन के नक्शे पर आने की कोशिश में है। RMUHD स्कीम के तहत बनिहाल में पहली बार अल्ट्रा-हाई-डेंसिटी बाग स्थापित हुए हैं, 50% सब्सिडी के साथ — और लक्ष्य है 2026-27 तक 20 हेक्टेयर कवर करना।

मुख्य बातें

रामबन जिले में RMUHD स्कीम के तहत अल्ट्रा-हाई-डेंसिटी सेब बागों का संयुक्त निरीक्षण किया गया।
विभाग का लक्ष्य 2026-27 तक 20 हेक्टेयर क्षेत्र में ऐसे बाग विकसित कर बनिहाल को सेब उत्पादन केंद्र बनाना है।
योजना में किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है; इस वर्ष लगभग 20 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए।
बनिहाल, गूल और बटोत में बीते वर्ष से प्रयास जारी हैं; बनिहाल में पहली बार हाई-डेंसिटी संरचना स्थापित।
लाभार्थियों के अनुसार प्रति बाग 2 से 4 लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार मिलने की संभावना है।

जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में बागवानी विभाग के अधिकारियों ने 30 अगस्त 2026 को रिवाइज्ड मॉडिफाइड अल्ट्रा हाई डेंसिटी (RMUHD) स्कीम के तहत विकसित किए जा रहे अल्ट्रा-हाई-डेंसिटी सेब बागों का संयुक्त निरीक्षण किया। विभाग का लक्ष्य 2026-27 तक 20 हेक्टेयर क्षेत्र में इन बागों को स्थापित कर बनिहाल को जम्मू क्षेत्र का प्रमुख सेब उत्पादन केंद्र बनाना है।

मुख्य घटनाक्रम

रामबन के मुख्य बागवानी अधिकारी राजिंदर कुमार ने बताया कि बनिहाल में पहली बार अल्ट्रा-हाई-डेंसिटी संरचना स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि बनिहाल का क्षेत्र समशीतोष्ण (टेम्परेट) जलवायु और उचित ऊँचाई के कारण सेब उत्पादन के लिए अनुकूल है। बीते वर्ष बनिहाल, गूल और बटोत में इस दिशा में प्रयास शुरू किए गए थे।

योजना का विस्तार और किसानों की भागीदारी

राजिंदर कुमार के अनुसार, इस वर्ष लगभग 20 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। विभाग की कोशिश है कि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ें ताकि ज्यादा लोगों को लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में अधिकतम क्षेत्र को हाई-डेंसिटी खेती के दायरे में लाने की योजना है, जिससे जम्मू क्षेत्र भी फल उद्योग में अपना योगदान दे सके।

50 प्रतिशत सब्सिडी और रोज़गार की संभावना

स्कीम के लाभार्थी बहार अहमद ने बताया कि बागवानी विभाग की इस योजना में 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। उन्होंने बताया कि दो महीने पहले पौधरोपण किया गया था और पौधों की वृद्धि संतोषजनक है। उनके अनुसार इस कार्य से प्रत्यक्ष रूप से दो से चार लोगों को रोज़गार मिल सकता है। उन्होंने कृषि भूमि वाले किसानों से अपील की कि वे इन सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएँ।

आम जनता पर असर

यह पहल ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर सरकार कृषि विविधीकरण और ग्रामीण रोज़गार को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रही है। गौरतलब है कि अब तक कश्मीर घाटी ही सेब उत्पादन का मुख्य केंद्र रही है। RMUHD स्कीम के तहत रामबन जैसे जिलों को इस उद्योग से जोड़ने की कोशिश न केवल किसानों की आय बढ़ा सकती है, बल्कि क्षेत्र में ग्रामीण रोज़गार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है।

क्या होगा आगे

विभाग का लक्ष्य है कि 2026-27 तक 20 हेक्टेयर क्षेत्र को RMUHD के तहत कवर किया जाए। अधिकारियों ने किसानों से ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो बनिहाल और आसपास के क्षेत्र जम्मू-कश्मीर के बागवानी मानचित्र पर एक नई पहचान बना सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 20 हेक्टेयर का लक्ष्य और मात्र 20 आवेदन यह बताते हैं कि ज़मीनी पहुँच अभी सीमित है। कश्मीर घाटी के मुकाबले जम्मू क्षेत्र में बागवानी अवसंरचना और बाज़ार संपर्क की कमी एक बड़ी चुनौती है जिसे सब्सिडी अकेले नहीं सुलझा सकती। असली परीक्षा यह होगी कि पौधरोपण के बाद उत्पाद को बाज़ार तक पहुँचाने की व्यवस्था कितनी मज़बूत है — अन्यथा किसानों की मेहनत और सरकारी धन दोनों का नुकसान होगा।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RMUHD स्कीम क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
RMUHD यानी रिवाइज्ड मॉडिफाइड अल्ट्रा हाई डेंसिटी स्कीम बागवानी विभाग की एक योजना है जिसके तहत परंपरागत बागों की तुलना में अधिक घनत्व पर सेब के पौधे लगाए जाते हैं। इसका उद्देश्य प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार करना है।
रामबन में इस स्कीम के तहत कितनी ज़मीन पर बाग लगाने का लक्ष्य है?
बागवानी विभाग का लक्ष्य 2026-27 तक रामबन जिले में 20 हेक्टेयर क्षेत्र को RMUHD के तहत कवर करना है। बनिहाल, गूल और बटोत में पिछले वर्ष से काम शुरू हो चुका है।
किसानों को इस योजना में कितनी सब्सिडी मिलती है?
RMUHD स्कीम के तहत किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। इच्छुक किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं; इस वर्ष लगभग 20 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
बनिहाल को सेब उत्पादन के लिए क्यों चुना गया?
बनिहाल का क्षेत्र समशीतोष्ण जलवायु और उपयुक्त ऊँचाई के कारण सेब उत्पादन के लिए अनुकूल माना जाता है। मुख्य बागवानी अधिकारी राजिंदर कुमार के अनुसार, यहाँ की जलवायु परिस्थितियाँ अच्छी पैदावार के लिए सहायक हैं।
इस स्कीम से रोज़गार के कितने अवसर पैदा होंगे?
लाभार्थी बहार अहमद के अनुसार, प्रत्येक बाग से प्रत्यक्ष रूप से दो से चार लोगों को रोज़गार मिल सकता है। व्यापक स्तर पर योजना सफल होने पर क्षेत्र में ग्रामीण रोज़गार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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