24 सितंबर 2026
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पुणे पुलिस हिरासत में मारपीट: मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर 13 पुलिसकर्मियों पर FIR

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पुणे पुलिस हिरासत में मारपीट: मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर 13 पुलिसकर्मियों पर FIR

सारांश

पुणे के भारती विद्यापीठ थाने के 13 पुलिसकर्मियों पर FIR — वीडियो में घुटनों के बल बैठाना, डंडों से मारपीट, सार्वजनिक अपमान। महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट ने यह कार्रवाई संभव की। जनरल डायरी में कोई रिकॉर्ड नहीं, मेडिकल प्रमाणपत्र में विसंगति — जाँच जारी।

मुख्य बातें

24 सितंबर 2026 को पुणे के भारती विद्यापीठ पुलिस थाने के 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज।
महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई।
7 जुलाई को एसआरए कॉलोनी में आरोपियों को घुटनों के बल बैठाने, डंडे-लाठी से मारने और सार्वजनिक अपमान के आरोप; दो वीडियो क्लिप जाँच में शामिल।
थाने की जनरल डायरी और पुलिस वाहन लॉगबुक में 7 जुलाई की आवाजाही का कोई रिकॉर्ड नहीं।
आरोपी सरफराज शेख के पंचनामा में चोट दर्ज, परंतु मेडिकल प्रमाणपत्र में अनुल्लिखित — रिपोर्ट में विसंगति चिह्नित।
भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 115(2), 127(2), 127(3), 131, 352, 351(2), 198 व 199 के तहत मामला; जाँच जारी।

महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर पुणे के भारती विद्यापीठ पुलिस थाने के 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ 24 सितंबर 2026 को एफआईआर दर्ज की गई है। इन पर हिरासत में आरोपियों के साथ कथित मारपीट, गैरकानूनी तरीके से रोकने, धमकाने और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के आरोप हैं। यह शिकायत अपराध अन्वेषण विभाग में तैनात पुलिस उप अधीक्षक संकेत सतिश गोसावी ने दर्ज कराई है।

मुख्य घटनाक्रम

मामले की शुरुआत 5 जुलाई को हुई, जब चार आरोपी दोपहर करीब 3 बजे स्वयं भारती विद्यापीठ पुलिस थाने पहुँचे। शिकायत के अनुसार, उन्हें उसी दिन रात करीब 10.30 बजे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। इस बीच के लगभग साढ़े सात घंटों में उनके साथ क्या हुआ, यही इस पूरे मामले की जड़ है।

मानवाधिकार आयोग के समक्ष दर्ज आरोपी दिपक नेटके के बयान के अनुसार, थाने पहुँचने के बाद वह और तीन अन्य आरोपी वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मानसिंग पाटील तथा अन्य कर्मियों के संपर्क में आए, जहाँ कथित तौर पर उनके हाथ और पैरों पर पट्टे से मारपीट की गई। शुरुआत में चारों को पुलिस उपनिरीक्षक निलेश मोकाशी की हिरासत में रखा गया, बाद में मामले के जाँच अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक आण्णा दराडे को सौंपा गया।

एसआरए कॉलोनी की घटना और वीडियो साक्ष्य

7 जुलाई को शाम करीब 5.30 बजे चारों आरोपियों को लेक टाउन के पास स्थित एसआरए कॉलोनी ले जाया गया। जाँच के दौरान वहाँ हुई घटना से संबंधित दो वीडियो क्लिप सामने आईं। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इन वीडियो में आरोपियों को पुलिसकर्मियों द्वारा घुटनों के बल बैठाए जाने और सड़क पर चलने के लिए मजबूर किए जाने का दृश्य दिखता है। इसके अलावा रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों द्वारा डंडे और लाठियों से पैरों पर मारपीट का भी उल्लेख है।

गौरतलब है कि आरोपियों को सार्वजनिक रूप से नागरिकों के सामने घुटनों के बल बैठाकर हाथ जोड़कर माफी माँगने के लिए मजबूर किए जाने का आरोप भी रिपोर्ट में दर्ज है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 7 जुलाई को आरोपियों को एसआरए कॉलोनी ले जाने का कोई रिकॉर्ड न थाने की जनरल डायरी में मिला और न ही पुलिस वाहन की लॉगबुक में — यह प्रशासनिक चूक रिपोर्ट में गंभीर रूप से चिह्नित की गई है।

मेडिकल साक्ष्य में विसंगति

मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में मेडिकल जाँच की विसंगतियाँ भी उजागर हुई हैं। कथित मारपीट के बावजूद चारों आरोपियों के मेडिकल प्रमाणपत्रों में चोटों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। हालाँकि, 5 जुलाई के आरोपी सरफराज शेख के अंगझड़ती पंचनामा में उसके दाहिने हाथ की बीच वाली उंगली पर चोट दर्ज थी, जो मेडिकल प्रमाणपत्र में अंकित नहीं की गई थी। यह विसंगति रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित है।

आरोपी पुलिसकर्मी और धाराएँ

एफआईआर में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मानसिंग पाटील, पुलिस उपनिरीक्षक आण्णा मधुकर दराडे और निलेश राजेंद्र मोकाशी, पुलिस हवलदार सुनील दादा हनवते तथा पुलिसकर्मी सागर चंद्रकांत बोरगे, सोहम कैलास शेंडकर, राहुल अशोक औधकर, मितेश दत्तात्रय चोरमोले, रविंद्र शंकर गायकवाड, संदीप लक्ष्मण आगळे, पुलिस उपनिरीक्षक फकीर और पुलिसकर्मी सुतार एवं पवार को आरोपी बनाया गया है।

इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 115(2), 127(2), 127(3), 131, 352, 351(2), 198 और 199 के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की आगे की जाँच जारी है।

क्या होगा आगे

मानवाधिकार आयोग के पुलिसकर्मियों के बयानों में भारती विद्यापीठ थाने के कुछ कर्मियों ने घटनास्थल पर मौजूद रहने की बात स्वीकार की और वीडियो में दिखे अधिकारी की पहचान वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मानसिंग पाटील के रूप में की। यह स्वीकारोक्ति जाँच में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। 6 जुलाई को चारों आरोपियों को प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर 4, पुणे के समक्ष पेश किया गया था और अदालत ने उन्हें 9 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा था। अब जाँच के दायरे में वही अधिकारी आ गए हैं जो उस हिरासत की देखरेख कर रहे थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि आकस्मिक। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर FIR दर्ज होना प्रक्रियागत रूप से सकारात्मक है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि उच्च रैंक के अधिकारी — जिनमें वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक स्तर के नाम हैं — को जवाबदेह बनाया जाता है या मामला समय के साथ ठंडा पड़ जाता है। पुलिस सुधारों पर सर्वोच्च न्यायालय के दशकों पुराने निर्देशों के बावजूद हिरासत में ज्यादती की ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं — यह संरचनात्मक जवाबदेही का संकट है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे के 13 पुलिसकर्मियों पर FIR क्यों दर्ज की गई?
महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में पाया गया कि भारती विद्यापीठ थाने के पुलिसकर्मियों ने हिरासत में आरोपियों के साथ कथित मारपीट की, उन्हें एसआरए कॉलोनी ले जाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और घुटनों के बल बैठाकर माफी माँगने पर मजबूर किया। इन निष्कर्षों के आधार पर 24 सितंबर 2026 को 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
इस मामले में कौन-कौन से पुलिसकर्मी आरोपी हैं?
FIR में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मानसिंग पाटील, दो पुलिस उपनिरीक्षक (आण्णा दराडे और निलेश मोकाशी), हवलदार सुनील हनवते और नौ अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। भारती विद्यापीठ थाने के कुछ कर्मियों ने मानवाधिकार आयोग के समक्ष घटनास्थल पर मौजूद रहने की बात स्वीकार की और वीडियो में दिखे अधिकारी की पहचान पाटील के रूप में की।
एसआरए कॉलोनी की घटना क्या थी?
7 जुलाई को शाम करीब 5.30 बजे चारों आरोपियों को लेक टाउन के पास एसआरए कॉलोनी ले जाया गया। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, वहाँ वीडियो में आरोपियों को घुटनों के बल बैठाए जाने, डंडे-लाठी से मारे जाने और सार्वजनिक रूप से माफी माँगवाने के दृश्य सामने आए। सबसे गंभीर बात यह रही कि इस आवाजाही का थाने की जनरल डायरी या वाहन की लॉगबुक में कोई रिकॉर्ड नहीं था।
मेडिकल जाँच में क्या विसंगति पाई गई?
कथित मारपीट के बावजूद चारों आरोपियों के मेडिकल प्रमाणपत्रों में चोटों का उल्लेख नहीं मिला। हालाँकि आरोपी सरफराज शेख के 5 जुलाई के अंगझड़ती पंचनामा में दाहिने हाथ की बीच वाली उंगली पर चोट दर्ज थी, जिसे मेडिकल प्रमाणपत्र में दर्ज नहीं किया गया था। मानवाधिकार आयोग ने इस विसंगति को विशेष रूप से रेखांकित किया है।
किन धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है और आगे क्या होगा?
भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 115(2), 127(2), 127(3), 131, 352, 351(2), 198 और 199 के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल अपराध अन्वेषण विभाग की ओर से आगे की जाँच जारी है, जिसमें वीडियो साक्ष्य और मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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