पंजाब भाजपा प्रमुख का आरोप: 'आप' और कांग्रेस मिलकर कर रहे हैं लोगों का ध्यान भटकाने का काम
सारांश
Key Takeaways
- सुनील जाखड़ के आरोपों के अनुसार, 'आप' और कांग्रेस मिलकर लोगों का ध्यान भटका रहे हैं।
- मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र से आए फंड में से बहुत कम राशि का ही उपयोग किया है।
- भाजपा ने कृषि बजट में भारी वृद्धि का दावा किया है।
चंडीगढ़, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा है कि 'आप' और कांग्रेस एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि लोग राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान हटा सकें।
केंद्र और भाजपा के खिलाफ गलत सूचनाओं को फैलाने के लिए दोनों पार्टियों की आलोचना करते हुए, जाखड़ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में केंद्र के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिशें राज्य के भविष्य के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकती हैं।
तथ्यों और आंकड़ों का हवाला देते हुए, भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अंततः स्वीकार किया है कि आपदा राहत के लिए केंद्र से 13,000 करोड़ रुपए मिले थे, जिनमें से केवल 477 करोड़ रुपए खर्च हुए और बाकी रकम का पिछली सरकारों ने दुरुपयोग किया।
उन्होंने यह भी आश्चर्य व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री को सरकारी खजाने के रिकॉर्ड की समीक्षा करने में इतना समय क्यों लगा।
जाखड़ ने कहा कि कांग्रेस के नेता, जिन पर मुख्यमंत्री फंड के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं, संसद में 'आप' सरकार के रक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाने में विफल रही है, और उसके नेता या तो मान को 'अपनी आवाज बेचने' के लिए मजबूर हैं या अपने पिछले भ्रष्टाचार के कारण बोलने की क्षमता खो चुके हैं।
अब दोनों पार्टियाँ मिलकर केंद्र और भाजपा के खिलाफ नफरत फैला रही हैं।
जाखड़ ने डेटा पेश करके भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव का खंडन किया।
उन्होंने बताया कि यूपीए सरकार के दौरान कृषि बजट 21,933 करोड़ रुपए था, जबकि भाजपा सरकार ने इसे बढ़ाकर 1.30 लाख करोड़ रुपए कर दिया है।
पीएम-किसान योजना के तहत, किसानों के बैंक खातों में सीधे 4.27 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए हैं।
उर्वरक सब्सिडी, जो यूपीए के दौर में 18,460 करोड़ रुपए थी, इस साल भाजपा सरकार के तहत बढ़कर 1.77 लाख करोड़ रुपए हो गई है।
भाजपा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को निशाना बनाते हुए सवाल उठाया कि राज्य सरकार ने अपनी खुद की कृषि नीति लागू क्यों नहीं की है।
उन्होंने कहा कि किसानों की नीति का मसौदा अक्टूबर 2023 से ही तैयार है, तो मुख्यमंत्री किस बात का इंतजार कर रहे हैं? उन्होंने पूछा कि अगर नीति में कोई खामियां हैं, तो उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।