बलताना में ₹12 करोड़ के रोड अंडर ब्रिज का शिलान्यास, राज्यपाल कटारिया और मंत्री बिट्टू रहे मौजूद
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने बुधवार, 20 मई को चंडीगढ़ के बलताना में अंबाला-चंडीगढ़ रेल खंड पर लेवल क्रॉसिंग नंबर 123 पर निर्मित हो रहे रोड अंडर ब्रिज (RUB) की नींव रखी। यह परियोजना ₹12 करोड़ की लागत से भारतीय रेलवे और चंडीगढ़ प्रशासन की 50:50 लागत-साझेदारी के आधार पर तैयार की जा रही है।
शिलान्यास समारोह का आयोजन
केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने समारोह में राज्यपाल कटारिया का स्वागत किया और इस महत्वपूर्ण परियोजना के उद्घाटन में उपस्थित होने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। मंत्री बिट्टू ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान जैसे विशाल राज्य से आने वाले राज्यपाल कटारिया रेल परिवहन के महत्व को भलीभाँति समझते हैं और रेलवे संपर्क किस प्रकार क्षेत्रीय विकास को गति देता है, इससे वे भलीभाँति अवगत हैं।
राज्यपाल का संबोधन: रेलवे और राष्ट्रीय एकता
सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल कटारिया ने कहा कि भारतीय रेलवे देश में 'विविधता में एकता' की भावना को मज़बूत करने में एक अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि देश भर के विभिन्न राज्यों के लोग रेल के माध्यम से दूरदराज़ के क्षेत्रों की यात्रा करते हैं, जिससे उन्हें विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और जीवनशैलियों से परिचित होने का अवसर मिलता है।
राज्यपाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि रेल यात्रा केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का अनुभव करने का एक सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि रेलवे एक सेतु का काम करता है जो विभिन्न राज्यों के व्यंजनों, पहनावे, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को जानने में सहायक है।
परियोजना का महत्व
यह रोड अंडर ब्रिज परियोजना बलताना क्षेत्र में लेवल क्रॉसिंग की समस्या को हल करेगी, जिससे आम नागरिकों को यातायात में राहत मिलेगी और रेल परिचालन की सुरक्षा भी बढ़ेगी। भारतीय रेलवे और चंडीगढ़ प्रशासन के बीच साझेदारी इस परियोजना को एक सहकारी विकास मॉडल के रूप में प्रस्तुत करती है।
आगे की राह
परियोजना के पूर्ण होने पर अंबाला-चंडीगढ़ रेल खंड पर यातायात प्रवाह सुगम होगा और स्थानीय निवासियों को लेवल क्रॉसिंग पर होने वाली देरी से मुक्ति मिलेगी। राज्यपाल कटारिया ने राष्ट्र निर्माण में भारतीय रेलवे के योगदान को अमूल्य बताते हुए ऐसी परियोजनाओं को और तेज़ी से लागू करने की अपेक्षा जताई।