बीबीएमबी में पंजाब के अधिकारों पर अतिक्रमण नहीं होगा: कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल

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बीबीएमबी में पंजाब के अधिकारों पर अतिक्रमण नहीं होगा: कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल

सारांश

बीबीएमबी की 50वीं वर्षगाँठ की बैठक में पंजाब मंत्री बरिंदर गोयल ने केंद्र के दो फैसलों — सदस्यता नियमों में बदलाव और सीआईएसएफ तैनाती — का खुलकर विरोध किया। यह टकराव बोर्ड के ढाँचे और संघीय संतुलन पर बड़े सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

पंजाब कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल ने 16 मई को बीबीएमबी की 50वीं वर्षगाँठ बैठक में राज्य की चिंताएँ केंद्र के सामने रखीं।
केंद्र ने 13 अप्रैल को नियम संशोधित कर बीबीएमबी सदस्य की नियुक्ति किसी भी राज्य से करने का प्रावधान जोड़ा; पंजाब-हरियाणा को केवल 'प्राथमिकता'।
गोयल ने 50 वर्षों की परंपरा — बिजली सदस्य पंजाब से, सिंचाई सदस्य हरियाणा से — को यथावत रखने की माँग की।
बीबीएमबी परिसरों में सीआईएसएफ की तैनाती को संघवाद की भावना के विरुद्ध बताते हुए पंजाब पुलिस की क्षमता का हवाला दिया।
रणजीत सागर बाँध और शाहपुर कंडी बाँध की सुरक्षा अभी भी पंजाब पुलिस के ज़िम्मे है।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की 50वीं वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित बैठक में केंद्र सरकार के समक्ष राज्य की चिंताएँ, हित और अधिकार पुरज़ोर तरीके से रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब अपने स्थापित अधिकारों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार नहीं करेगा।

सदस्यता परंपरा में बदलाव पर आपत्ति

गोयल ने बैठक में एक अहम मुद्दा उठाया — बीबीएमबी की स्थापना के बाद से चली आ रही परंपरा यह रही है कि बिजली सदस्य पंजाब से और सिंचाई सदस्य हरियाणा से नियुक्त किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह पाँच दशकों से निर्बाध रूप से चलती आई व्यवस्था है।

हालाँकि, 13 अप्रैल को केंद्र सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए एक नया प्रावधान जोड़ा, जिसके तहत अब सदस्य किसी भी राज्य से नियुक्त किया जा सकता है — पंजाब और हरियाणा को केवल 'प्राथमिकता' दी जाएगी। गोयल ने सवाल उठाया कि जब यह व्यवस्था दशकों से बिना किसी विवाद के सुचारू रूप से चलती रही, तो इस बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी।

उन्होंने कहा कि 'वरीयता' जैसा शब्द पंजाबियों के मन में गहरी चिंता उत्पन्न करता है और दशकों पुरानी पारंपरिक संरचना को यथावत बनाए रखा जाना चाहिए।

सीआईएसएफ तैनाती पर विरोध

सुरक्षा के मुद्दे पर गोयल ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की बीबीएमबी परिसरों में तैनाती पर कड़ा विरोध जताया। उनका तर्क था कि पंजाब पुलिस एक अत्यंत सक्षम और विश्व स्तर पर सम्मानित बल है, जिसने आतंकवाद के दौर में अपने परिवारों सहित राष्ट्र की अखंडता के लिए अपार बलिदान दिए हैं।

उन्होंने बताया कि बाँधों की सुरक्षा आरंभ से ही पंजाब पुलिस के ज़िम्मे रही है। रणजीत सागर बाँध और शाहपुर कंडी बाँध — दोनों सीमा के निकट स्थित हैं — आज भी पंजाब पुलिस की निगरानी में हैं। गोयल ने कहा कि जब किसी भी सहयोगी राज्य को पंजाब पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर कोई आपत्ति नहीं रही, तो केंद्र का यह हस्तक्षेप संघवाद की भावना के विरुद्ध है।

पानी के मुद्दे पर पंजाब का रुख

जल-बँटवारे के संदर्भ में कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पंजाब ने कभी भी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटा और राज्य की उदारता का ऐतिहासिक रिकॉर्ड खुद गवाह है। यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र और पंजाब के बीच बीबीएमबी के प्रशासनिक ढाँचे को लेकर तनाव बढ़ता दिख रहा है।

संघवाद और राज्य के हितों की रक्षा

गोयल ने चंडीगढ़ में 16 मई को जारी बयान में स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार बीबीएमबी के ढाँचे में किसी भी एकतरफा बदलाव का विरोध करती रहेगी। गौरतलब है कि बीबीएमबी पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लिए बिजली और सिंचाई जल का प्रबंधन करता है — इसलिए इसकी संरचना में कोई भी बदलाव इन राज्यों के लिए दूरगामी परिणाम रखता है। आने वाले दिनों में पंजाब सरकार इस मामले को आधिकारिक स्तर पर केंद्र के सामने और अधिक मुखरता से उठाने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक रूप से यह पंजाब के लिए एक बड़े संकेत की तरह है — खासकर तब जब बीबीएमबी के जल और बिजली वितरण पर राज्यों के बीच पहले से ही तनाव है। 'प्राथमिकता' बनाम 'अनिवार्यता' का यह अंतर कानूनी विवाद की ज़मीन तैयार कर सकता है। सीआईएसएफ तैनाती का मुद्दा भी सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि राज्य की स्वायत्तता और केंद्र-राज्य संबंधों की व्यापक बहस का हिस्सा है। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज एक बयानबाज़ी मानकर चल सकती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये बदलाव बीबीएमबी के दीर्घकालिक प्रशासनिक संतुलन को बिगाड़ेंगे।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) क्या है और इसमें विवाद क्यों है?
बीबीएमबी एक केंद्रीय संस्था है जो पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लिए भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं से बिजली व सिंचाई जल का प्रबंधन करती है। हाल ही में केंद्र द्वारा सदस्यता नियमों में बदलाव और सीआईएसएफ तैनाती के फैसले से पंजाब सरकार के साथ तनाव बढ़ा है।
केंद्र सरकार ने बीबीएमबी के नियमों में क्या बदलाव किया?
13 अप्रैल को केंद्र सरकार ने नियम संशोधित कर यह प्रावधान जोड़ा कि बीबीएमबी का सदस्य अब किसी भी राज्य से नियुक्त किया जा सकता है, जबकि पंजाब और हरियाणा को प्राथमिकता दी जाएगी। पहले की परंपरा के अनुसार बिजली सदस्य पंजाब से और सिंचाई सदस्य हरियाणा से ही नियुक्त होते थे।
पंजाब ने बीबीएमबी में सीआईएसएफ तैनाती का विरोध क्यों किया?
पंजाब का कहना है कि बाँधों की सुरक्षा शुरू से पंजाब पुलिस करती आई है और रणजीत सागर व शाहपुर कंडी जैसे सीमावर्ती बाँध भी पंजाब पुलिस की निगरानी में हैं। राज्य सरकार का तर्क है कि सीआईएसएफ की तैनाती संघवाद की भावना के विरुद्ध और अनावश्यक है।
इस विवाद का पंजाब और अन्य राज्यों पर क्या असर पड़ सकता है?
बीबीएमबी के ढाँचे में बदलाव से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान — तीनों राज्यों के जल व बिजली वितरण पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। सदस्यता की परंपरा बदलने से भविष्य में निर्णय प्रक्रिया में राज्यों का प्रतिनिधित्व कमज़ोर होने की आशंका है।
पंजाब सरकार आगे क्या कदम उठाएगी?
कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल के बयान के अनुसार पंजाब सरकार इस मामले को केंद्र के समक्ष आधिकारिक स्तर पर और अधिक मुखरता से उठाने की तैयारी में है। राज्य का स्पष्ट रुख है कि दशकों पुरानी परंपरागत संरचना को बदला नहीं जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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