बीबीएमबी में पंजाब के अधिकारों पर अतिक्रमण नहीं होगा: कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की 50वीं वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित बैठक में केंद्र सरकार के समक्ष राज्य की चिंताएँ, हित और अधिकार पुरज़ोर तरीके से रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब अपने स्थापित अधिकारों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार नहीं करेगा।
सदस्यता परंपरा में बदलाव पर आपत्ति
गोयल ने बैठक में एक अहम मुद्दा उठाया — बीबीएमबी की स्थापना के बाद से चली आ रही परंपरा यह रही है कि बिजली सदस्य पंजाब से और सिंचाई सदस्य हरियाणा से नियुक्त किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह पाँच दशकों से निर्बाध रूप से चलती आई व्यवस्था है।
हालाँकि, 13 अप्रैल को केंद्र सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए एक नया प्रावधान जोड़ा, जिसके तहत अब सदस्य किसी भी राज्य से नियुक्त किया जा सकता है — पंजाब और हरियाणा को केवल 'प्राथमिकता' दी जाएगी। गोयल ने सवाल उठाया कि जब यह व्यवस्था दशकों से बिना किसी विवाद के सुचारू रूप से चलती रही, तो इस बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा कि 'वरीयता' जैसा शब्द पंजाबियों के मन में गहरी चिंता उत्पन्न करता है और दशकों पुरानी पारंपरिक संरचना को यथावत बनाए रखा जाना चाहिए।
सीआईएसएफ तैनाती पर विरोध
सुरक्षा के मुद्दे पर गोयल ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की बीबीएमबी परिसरों में तैनाती पर कड़ा विरोध जताया। उनका तर्क था कि पंजाब पुलिस एक अत्यंत सक्षम और विश्व स्तर पर सम्मानित बल है, जिसने आतंकवाद के दौर में अपने परिवारों सहित राष्ट्र की अखंडता के लिए अपार बलिदान दिए हैं।
उन्होंने बताया कि बाँधों की सुरक्षा आरंभ से ही पंजाब पुलिस के ज़िम्मे रही है। रणजीत सागर बाँध और शाहपुर कंडी बाँध — दोनों सीमा के निकट स्थित हैं — आज भी पंजाब पुलिस की निगरानी में हैं। गोयल ने कहा कि जब किसी भी सहयोगी राज्य को पंजाब पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर कोई आपत्ति नहीं रही, तो केंद्र का यह हस्तक्षेप संघवाद की भावना के विरुद्ध है।
पानी के मुद्दे पर पंजाब का रुख
जल-बँटवारे के संदर्भ में कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पंजाब ने कभी भी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटा और राज्य की उदारता का ऐतिहासिक रिकॉर्ड खुद गवाह है। यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र और पंजाब के बीच बीबीएमबी के प्रशासनिक ढाँचे को लेकर तनाव बढ़ता दिख रहा है।
संघवाद और राज्य के हितों की रक्षा
गोयल ने चंडीगढ़ में 16 मई को जारी बयान में स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार बीबीएमबी के ढाँचे में किसी भी एकतरफा बदलाव का विरोध करती रहेगी। गौरतलब है कि बीबीएमबी पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लिए बिजली और सिंचाई जल का प्रबंधन करता है — इसलिए इसकी संरचना में कोई भी बदलाव इन राज्यों के लिए दूरगामी परिणाम रखता है। आने वाले दिनों में पंजाब सरकार इस मामले को आधिकारिक स्तर पर केंद्र के सामने और अधिक मुखरता से उठाने की तैयारी में है।