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पंजाब विश्वविद्यालय में 5 उन्नत वैज्ञानिक उपकरण स्थापित, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने किया उद्घाटन

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पंजाब विश्वविद्यालय में 5 उन्नत वैज्ञानिक उपकरण स्थापित, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने किया उद्घाटन

सारांश

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने चंडीगढ़ में पंजाब विश्वविद्यालय को पाँच अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की सौगात दी और पीयू-टीआईएफ नवाचार मंच का उद्घाटन किया — जो नैनोटेक्नोलॉजी से जीनोमिक्स तक शोध की दिशा बदल सकता है।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 4 सितंबर 2025 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में उन्नत वैज्ञानिक उपकरण सुविधाओं का उद्घाटन किया।
पाँच उपकरण — एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप, रमन स्पेक्ट्रोमीटर, डीएनए सीक्वेंसर, फ्लो साइटोमीटर और एफटीआईआर स्पेक्ट्रोमीटर — स्थापित किए गए।
पंजाब विश्वविद्यालय तकनीकी नवाचार मंच (पीयू-टीआईएफ) का भी उद्घाटन हुआ; बायो-एनईएसटी को धारा 8 की गैर-लाभकारी कंपनी में रूपांतरित किया गया।
नए उपकरण नैनोटेक्नोलॉजी, सामग्री विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और जीनोमिक्स में शोध क्षमता बढ़ाएँगे।
1882 में स्थापित पंजाब विश्वविद्यालय देश के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है।

उपराष्ट्रपति और पंजाब विश्वविद्यालय के पदेन कुलाधिपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 4 सितंबर 2025 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय का दौरा किया और अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरण सुविधा तथा केंद्रीय उपकरण प्रयोगशाला में उन्नत उपकरण सुविधा का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर पाँच उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों — एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप, रमन स्पेक्ट्रोमीटर, डीएनए सीक्वेंसर, फ्लो साइटोमीटर और एफटीआईआर स्पेक्ट्रोमीटर — की स्थापना की गई, जो विश्वविद्यालय की शोध क्षमताओं को नई ऊँचाई देंगे।

क्या-क्या हुआ उद्घाटन

राधाकृष्णन ने पंजाब विश्वविद्यालय तकनीकी नवाचार मंच (पीयू-टीआईएफ) का भी उद्घाटन किया। यह मंच विश्वविद्यालय के अकादमिक, अनुप्रयुक्त और अनुवादात्मक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और उद्योग जगत को उन्नत विश्लेषणात्मक, इनक्यूबेशन और उद्यमशीलता सहायता प्रदान करता है।

उल्लेखनीय है कि बायो-एनईएसटी को अब धारा 8 के अंतर्गत एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में पंजाब विश्वविद्यालय तकनीकी नवाचार मंच में रूपांतरित किया गया है। उपराष्ट्रपति ने इसे अनुसंधान, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी विकास के लिए एक नए संस्थागत ढाँचे की शुरुआत बताया।

अनुसंधान क्षमताओं पर असर

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि इन पाँच उन्नत उपकरणों की स्थापना से नैनोटेक्नोलॉजी, सामग्री विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और जीनोमिक्स जैसे क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की शोध क्षमताओं को महत्वपूर्ण बल मिलेगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नवाचार तभी फलता-फूलता है जब शिक्षा जगत, उद्योग, इनक्यूबेटर और निवेशक समन्वित रूप से कार्य करते हैं।

गौरतलब है कि 1882 में स्थापित पंजाब विश्वविद्यालय देश के सबसे पुराने शैक्षणिक संस्थानों में से एक है। राधाकृष्णन ने इसकी विशिष्ट विरासत को याद करते हुए नेताओं, न्यायविदों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों और लोक सेवकों की पीढ़ियों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान को रेखांकित किया।

उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान पर सरकार का जोर

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान तंत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि भारत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के लिए एक वैश्विक गंतव्य के रूप में तेज़ी से उभर रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत अनुसंधान-केंद्रित बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने में जुटे हैं।

युवा शोधकर्ताओं को संदेश

युवा शोधकर्ताओं और छात्रों को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने उनसे उद्देश्यपूर्ण विज्ञान का अध्ययन करने, असफलताओं के बावजूद दृढ़ बने रहने और ऐसे नवाचार विकसित करने का आग्रह किया जो व्यापक सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि शोध का समाज पर सार्थक प्रभाव होना चाहिए और इसका लाभ व्यापक रूप से जन-जन तक पहुँचना चाहिए।

पंजाब विश्वविद्यालय में इन सुविधाओं के शुरू होने के बाद अब यह देखना होगा कि नई अनुसंधान अवसंरचना किस गति से शोध प्रकाशनों और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि ये संसाधन कितने शोधकर्ताओं को वास्तविक रूप से उपलब्ध होंगे और क्या उपयोग दर को सार्वजनिक किया जाएगा। बायो-एनईएसटी का पीयू-टीआईएफ में रूपांतरण संस्थागत दृष्टि से सही दिशा है, पर भारत के अधिकांश विश्वविद्यालयों में महँगे उपकरण अक्सर रखरखाव और प्रशिक्षित जनशक्ति के अभाव में निष्क्रिय हो जाते हैं। उद्योग-अकादमिक सहयोग की बात तो हर उद्घाटन में होती है — ज़रूरत है कि पीयू-टीआईएफ अगले दो वर्षों में स्टार्टअप स्नातक और पेटेंट संख्या के ठोस आँकड़े सामने रखे।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब विश्वविद्यालय में कौन-कौन से नए वैज्ञानिक उपकरण स्थापित किए गए हैं?
पंजाब विश्वविद्यालय की केंद्रीय उपकरण प्रयोगशाला में पाँच उन्नत उपकरण स्थापित किए गए हैं — एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप, रमन स्पेक्ट्रोमीटर, डीएनए सीक्वेंसर, फ्लो साइटोमीटर और एफटीआईआर स्पेक्ट्रोमीटर। ये उपकरण नैनोटेक्नोलॉजी, जीनोमिक्स और पर्यावरण विज्ञान जैसे क्षेत्रों में शोध को बल देंगे।
पंजाब विश्वविद्यालय तकनीकी नवाचार मंच (पीयू-टीआईएफ) क्या है?
पीयू-टीआईएफ पंजाब विश्वविद्यालय का नवाचार और उद्यमिता मंच है, जिसे धारा 8 के अंतर्गत गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया है। यह शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और उद्योग को इनक्यूबेशन, विश्लेषणात्मक और उद्यमशीलता सहायता प्रदान करता है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने पंजाब विश्वविद्यालय का दौरा कब किया?
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 4 सितंबर 2025 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय का दौरा किया और कई सुविधाओं का उद्घाटन किया।
इन नए उपकरणों से किन क्षेत्रों में शोध को फायदा होगा?
नए उपकरणों से नैनोटेक्नोलॉजी, सामग्री विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और जीनोमिक्स में शोध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे विश्वविद्यालय के शोधकर्ता और छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान कर सकेंगे।
पंजाब विश्वविद्यालय की स्थापना कब हुई थी?
पंजाब विश्वविद्यालय की स्थापना 1882 में हुई थी और यह देश के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है। इसने नेताओं, न्यायविदों, वैज्ञानिकों और खिलाड़ियों की पीढ़ियों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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