10 अगस्त 2026
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अभाविप प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से की भेंट, पंजाब विश्वविद्यालय सुधार और छात्र हितों पर हुई विस्तृत चर्चा

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अभाविप प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से की भेंट, पंजाब विश्वविद्यालय सुधार और छात्र हितों पर हुई विस्तृत चर्चा

सारांश

अभाविप का उपराष्ट्रपति से मिलना महज शिष्टाचार नहीं था — संगठन ने पंजाब विश्वविद्यालय में AI केंद्र से लेकर छात्र मानसिक स्वास्थ्य तक की माँगें रखीं। साथ ही 10 लाख छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने वाले 'मिशन साहसी' के विस्तार और SEIL के 60 वर्ष पूर्ण होने की जानकारी साझा की।

मुख्य बातें

अभाविप राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो.
रघुराज किशोर तिवारी और राष्ट्रीय महामंत्री डॉ.
वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने 24 जून 2026 को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से भेंट की।
उपराष्ट्रपति का पदभार ग्रहण के बाद अभाविप की यह पहली औपचारिक मुलाकात थी।
मिशन साहसी के तहत अब तक 10 लाख से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
SEIL कार्यक्रम अपने 60 वर्ष पूर्ण कर रहा है; पूर्वोत्तर और शेष भारत के छात्रों को जोड़ना इसका मुख्य उद्देश्य।
पंजाब विश्वविद्यालय में सीनेट प्रतिनिधित्व, छात्रावास विस्तार, AI केंद्र और मानसिक स्वास्थ्य केंद्र की माँगें उपराष्ट्रपति के समक्ष रखी गईं।
गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष और संत रविदास जी के 650वें प्राकट्योत्सव वर्ष पर देशव्यापी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की गई।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 24 जून 2026 को नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से शिष्टाचार भेंट की। इस भेंट में राष्ट्र पुनर्निर्माण में युवाओं की भूमिका, उच्च शिक्षा की समसामयिक चुनौतियाँ और पंजाब विश्वविद्यालय से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत संवाद हुआ। उपराष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद अभाविप की यह पहली औपचारिक मुलाकात थी।

प्रतिनिधिमंडल में कौन थे शामिल

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अभाविप राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी और राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने किया। दोनों नेताओं ने संगठन के देशव्यापी विस्तार, चल रहे अभियानों और विद्यार्थी आंदोलनों की जानकारी उपराष्ट्रपति के साथ साझा की। यह बैठक संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अभाविप देश का सबसे बड़ा छात्र संगठन है।

SEIL कार्यक्रम के 60 वर्ष और राष्ट्रीय एकता का संदेश

प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति को बताया कि अभाविप का स्टूडेंट्स एक्सपीरियंस इन इंटरस्टेट लिविंग (SEIL) कार्यक्रम अपने 60 वर्ष पूर्ण कर रहा है। छह दशकों से निरंतर चल रहा यह अभियान देश के विभिन्न क्षेत्रों — विशेषकर पूर्वोत्तर भारत और शेष देश — के विद्यार्थियों के बीच भावनात्मक एकात्मता, सांस्कृतिक संवाद और राष्ट्रीय समरसता को सुदृढ़ करने का माध्यम रहा है। यह ऐसे समय में प्रासंगिक है जब क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रीय एकता के बीच संतुलन की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर जारी है।

डिजिटल निर्भरता और 'मिशन साहसी' पर अभाविप के प्रयास

बैठक में युवाओं के बीच बढ़ती डिजिटल निर्भरता की चुनौती का भी उल्लेख किया गया। अभाविप के 'स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम' अभियान की जानकारी साझा की गई, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को मोबाइल और स्क्रीन-केंद्रित जीवनशैली से बाहर निकालकर खेल, शारीरिक गतिविधियों और सामाजिक उत्तरदायित्व की ओर प्रेरित करना है।

महिला सुरक्षा के क्षेत्र में अभाविप के प्रमुख अभियान 'मिशन साहसी' के अंतर्गत अब तक 10 लाख से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी दी गई। संगठन ने इस अभियान के अगले चरण को देशव्यापी स्तर पर पुनः प्रारंभ करने की योजना से भी उपराष्ट्रपति को अवगत कराया।

पंजाब विश्वविद्यालय सुधार पर प्रमुख माँगें

चर्चा के केंद्र में पंजाब विश्वविद्यालय से जुड़े कई अहम मुद्दे रहे। प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति के समक्ष निम्नलिखित माँगें रखीं:

विश्वविद्यालय की सीनेट में निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों को समुचित प्रतिनिधित्व दिए जाने की माँग की गई। बढ़ती छात्र संख्या के अनुरूप छात्रावास अवसंरचना के विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया गया। शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियमित एवं समयबद्ध नियुक्तियाँ सुनिश्चित करने की माँग रखी गई। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए अत्याधुनिक केंद्र की स्थापना और स्थायी परामर्शदाताओं से युक्त विद्यार्थी कल्याण एवं मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र तथा योग एवं माइंडफुलनेस सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

राष्ट्रीय स्मृति वर्षों पर देशव्यापी कार्यक्रम

प्रतिनिधिमंडल ने आगामी राष्ट्रीय अभियानों की रूपरेखा भी साझा की। इनमें गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष, संत रविदास जी के 650वें प्राकट्योत्सव वर्ष और वीरांगना रानी अबक्का के अद्वितीय योगदान पर केंद्रित देशव्यापी कार्यक्रम शामिल हैं। गौरतलब है कि ये आयोजन सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव को युवा पीढ़ी से जोड़ने के अभाविप के व्यापक एजेंडे का हिस्सा हैं। आने वाले महीनों में इन अभियानों की गतिविधियाँ और तेज होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

10 लाख छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण और SEIL के 60 वर्ष जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। असली परीक्षा यह होगी कि उपराष्ट्रपति — जो पंजाब विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं — इन माँगों पर कोई ठोस कदम उठाते हैं या यह भेंट औपचारिकता तक सिमट जाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभाविप ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात क्यों की?
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने 24 जून 2026 को उपराष्ट्रपति का पदभार ग्रहण के बाद पहली औपचारिक शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, पंजाब विश्वविद्यालय सुधार और संगठन के चल रहे अभियानों पर चर्चा हुई।
पंजाब विश्वविद्यालय को लेकर अभाविप ने क्या माँगें रखीं?
अभाविप ने पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट में निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों को प्रतिनिधित्व, छात्रावास अवसंरचना विस्तार, शिक्षकों के रिक्त पदों पर समयबद्ध नियुक्ति, AI और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए केंद्र तथा विद्यार्थी मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र की स्थापना की माँग रखी।
अभाविप का 'मिशन साहसी' क्या है?
मिशन साहसी अभाविप का महिला सुरक्षा एवं सशक्तीकरण केंद्रित अभियान है, जिसके अंतर्गत संगठन के अनुसार अब तक 10 लाख से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अगले चरण को देशव्यापी स्तर पर पुनः शुरू करने की योजना उपराष्ट्रपति को बताई गई।
SEIL कार्यक्रम क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
स्टूडेंट्स एक्सपीरियंस इन इंटरस्टेट लिविंग (SEIL) अभाविप का छह दशक पुराना अभियान है, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों — विशेषकर पूर्वोत्तर और शेष भारत — के विद्यार्थियों के बीच सांस्कृतिक संवाद और राष्ट्रीय समरसता को बढ़ावा देता है। यह कार्यक्रम अपने 60 वर्ष पूर्ण कर रहा है।
अभाविप के 'स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम' अभियान का उद्देश्य क्या है?
यह अभियान युवाओं में बढ़ती डिजिटल निर्भरता को संतुलित करने के लिए शुरू किया गया है। इसका लक्ष्य विद्यार्थियों को मोबाइल और स्क्रीन-केंद्रित जीवनशैली से बाहर निकालकर खेल, शारीरिक गतिविधियों और सामाजिक उत्तरदायित्व की ओर प्रेरित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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