12 जुलाई 2026
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अभाविप की भुवनेश्वर कार्यसमिति बैठक: शिक्षा विसंगतियों व शहरी नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प

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अभाविप की भुवनेश्वर कार्यसमिति बैठक: शिक्षा विसंगतियों व शहरी नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प

सारांश

अभाविप की भुवनेश्वर बैठक महज संगठनात्मक समीक्षा नहीं थी — यह एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश था। पश्चिम बंगाल पर अभिनंदन प्रस्ताव, नक्सलवाद विरोधी संकल्प और 10 लाख छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण — अभाविप ने अपनी विस्तारित भूमिका और राष्ट्रीय दृष्टि को एक साथ रेखांकित किया।

मुख्य बातें

अभाविप की केंद्रीय कार्यसमिति बैठक 27 मई 2025 को भुवनेश्वर के 'शिक्षा ओ अनुसंधान' विश्वविद्यालय में संपन्न हुई।
पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनः स्थापना के लिए जनमानस के अभिनंदन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित।
वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने शिक्षा विसंगतियों और शहरी नक्सलवाद के विरुद्ध रचनात्मक संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
'मिशन साहसी' के तहत देशभर में 10 लाख से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
बैठक में लिए गए निर्णयों पर आगामी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में औपचारिक प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।
प्राध्यापक यशवंतराव केलकर जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में प्रबोधन कार्यक्रमों की समीक्षा भी हुई।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की एक-दिवसीय केंद्रीय कार्यसमिति बैठक 27 मई 2025 को भुवनेश्वर स्थित 'शिक्षा ओ अनुसंधान' विश्वविद्यालय में संपन्न हुई, जिसमें शिक्षा व्यवस्था की विसंगतियों और शहरी नक्सलवाद के विरुद्ध रचनात्मक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया। बैठक में पश्चिम बंगाल में हिंसा, भय और तुष्टिकरण की राजनीति को परास्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनः स्थापना के लिए वहाँ के जनमानस का अभिनंदन करते हुए एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।

बैठक का शुभारंभ और उपस्थिति

बैठक का विधिवत शुभारंभ अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी एवं राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। देशभर के सभी प्रांतों से प्रमुख कार्यकर्ता और प्रतिनिधि इस अवसर पर उपस्थित रहे। ओडिशा की यह धरती महाप्रभु जगन्नाथ की पावन स्थली होने के कारण बैठक को विशेष आध्यात्मिक महत्त्व भी प्राप्त हुआ।

मुख्य विषय और विचार-विमर्श

बैठक में वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा व्यवस्था, युवाओं की भूमिका, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर गहन चर्चा हुई। अभाविप के चल रहे अभियानों — 'स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम', 'वंदे मातरम् के 150 वर्ष', 'छात्रावास सर्वेक्षण अभियान', 'आपातकाल निषेध के 50 वर्ष', 'श्री गुरु तेगबहादुर बलिदान दिवस के 350 वर्ष' और 'संत शिरोमणि रविदास जी के 650वें प्राकट्योत्सव' — की समीक्षा भी की गई। इस वर्ष प्राध्यापक यशवंतराव केलकर जी की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित प्रबोधन कार्यक्रमों की भी विशेष चर्चा हुई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष का संबोधन

प्रो. रघुराज किशोर तिवारी ने कहा कि संगठन की आगामी दिशा तय करने के लिए गत वर्षों का सिंहावलोकन और वर्तमान परिस्थितियों का आकलन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने द्वारका और श्रृंगेरी में आयोजित संगठनात्मक विचार बैठकों को इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि ये बैठकें संगठन को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर सिद्ध हुई हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की शिक्षा व्यवस्था भारतीय दर्शन एवं मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए, जो युवा पीढ़ी के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करे।

राष्ट्रीय महामंत्री की प्रतिबद्धता

डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि जब भारत विश्व का नेतृत्व कर रहा है, तब अभाविप — चाहे नक्सलवाद का खात्मा हो या शिक्षा में व्याप्त विसंगतियाँ — इनके समाधान के लिए रचनात्मक आंदोलन और संघर्ष के माध्यम से कार्यरत है। उन्होंने तेलंगाना में छात्रवृत्ति संघर्ष, नीट पेपर लीक विरोधी आंदोलन, मुंबई में पेपर लीक के विरुद्ध अभियान, दिल्ली एवं पंजाब विश्वविद्यालय में छात्रसंघ नवाचार, त्रिपुरा में जनजातीय छात्र सम्मेलन, ओडिशा में छात्रा संसद और तमिलनाडु में विधि छात्र सम्मेलन का उल्लेख करते हुए अभाविप की बढ़ती स्वीकार्यता को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि 'मिशन साहसी' के अंतर्गत देशभर में 10 लाख से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

आगे की राह

बैठक में लिए गए निर्णयों और चिंतन-मंथन के बिंदुओं पर आगामी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में विस्तृत चर्चा के पश्चात औपचारिक प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। डॉ. सोलंकी ने आशा जताई कि इस बैठक की आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टि कार्यकर्ताओं को अपने-अपने क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक गति से पूर्ण करने की प्रेरणा देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

अभाविप ने ज़मीनी मुद्दों पर सक्रियता दिखाई है। पश्चिम बंगाल पर अभिनंदन प्रस्ताव स्पष्ट रूप से राजनीतिक संकेत देता है, जो संगठन की छात्र-केंद्रित छवि और राजनीतिक भूमिका के बीच की बारीक रेखा को उजागर करता है। 'मिशन साहसी' जैसे कार्यक्रम अभाविप की विस्तारित सामाजिक पहुँच को दर्शाते हैं, लेकिन असली परीक्षण यह है कि शिक्षा व्यवस्था में भारतीय मूल्यों की वकालत ठोस नीतिगत बदलाव में कैसे तब्दील होती है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभाविप की भुवनेश्वर कार्यसमिति बैठक में क्या निर्णय लिए गए?
बैठक में पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनः स्थापना के लिए जनमानस के अभिनंदन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। शिक्षा विसंगतियों, शहरी नक्सलवाद और युवा मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी लिया गया।
अभाविप का 'मिशन साहसी' क्या है?
'मिशन साहसी' अभाविप का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है जिसके तहत देशभर में 10 लाख से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह अभियान महिला छात्रों की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए चलाया जा रहा है।
अभाविप ने पश्चिम बंगाल पर प्रस्ताव क्यों पारित किया?
अभाविप ने पश्चिम बंगाल में हिंसा, भय और तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए वहाँ के जनमानस के प्रयासों को सराहने हेतु यह अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीत बताया।
अभाविप शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव चाहती है?
अभाविप का स्पष्ट मत है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था भारतीय दर्शन एवं मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। संगठन एक एकीकृत शिक्षा तंत्र का निर्माण चाहता है जो युवा पीढ़ी के सर्वांगीण एवं समग्र विकास को सुनिश्चित करे।
अभाविप की अगली बड़ी बैठक कब होगी?
भुवनेश्वर बैठक में हुए विचार-विमर्श के आधार पर आगामी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में औपचारिक प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। बैठक की तिथि की घोषणा अभी नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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