स्वास्थ्य सेवाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का नासिक में आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 जुलाई 2026 को नासिक, महाराष्ट्र में एक निजी स्वास्थ्य सुविधा का उद्घाटन करते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी और निजी संस्थानों को साझा प्रयासों से यह सुनिश्चित करना होगा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं समाज के सबसे वंचित व्यक्ति तक पहुँचें। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देशवासियों के स्वास्थ्य और समग्र कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
मुख्य घटनाक्रम
बिरला ने नासिक में आयोजित इस कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि योग आज विश्वभर के लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है और इसका श्रेय भारत की सांस्कृतिक विरासत को जाता है। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने की भी जरूरत बताई।
सरकार की स्वास्थ्य नीति पर जोर
लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। आयुष्मान भारत जैसी बड़ी योजनाओं के साथ-साथ मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाई गई हैं और चिकित्सा अवसंरचना का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की सहभागिता से नए मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं, गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधाएं बेहतर हो रही हैं और अनुसंधान पर भी ध्यान बढ़ा है।
चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार की अनिवार्यता
बिरला ने चिकित्सा अनुसंधान की महत्ता पर विशेष बल देते हुए कहा कि मेडिकल पेशेवरों और संस्थानों को मौजूदा और उभरती बीमारियों की चुनौतियों के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार में अपनी क्षमताएं और अधिक विकसित करनी होंगी। उन्होंने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।
महामारी से मिली सीख और भारत की क्षमता
बिरला ने स्मरण दिलाया कि एक समय था जब भारत स्वास्थ्य सेवा के कई क्षेत्रों में विकसित देशों पर निर्भर था। किंतु कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय वैज्ञानिकों ने वैक्सीन निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया, जिसने वैश्विक संकट के समय मानवता की सेवा की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण है।
आगे की राह
लोकसभा अध्यक्ष ने जोर दिया कि नई और अप्रत्याशित बीमारियाँ कभी भी उभर सकती हैं, इसलिए चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक क्षमता में निरंतर निवेश आवश्यक है। केंद्र सरकार और निजी क्षेत्र के बीच इस दिशा में प्रभावी समन्वय ही भारत को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सक्षम बनाएगा।