राघव चड्ढा का नाम पंजाब वोटर लिस्ट से कटा: AAP बोली 'BJP से पूछो', SP सांसद का तंज़
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद 3 सितंबर को राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई। विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत तैयार इस ड्राफ्ट सूची में चड्ढा का नाम 'शिफ्टेड' दर्शाया गया है, जिसे उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की बदले की राजनीति करार दिया है। हालाँकि, AAP और अन्य विपक्षी दलों ने इस मामले में उल्टे सांसद को ही घेर लिया।
राघव चड्ढा का आरोप
इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राघव चड्ढा ने कहा, 'पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार अब अपनी बदले की राजनीति को वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट तक ले आई है। मैं पंजाब से राज्यसभा का मौजूदा सांसद हूँ और मेरा वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में रजिस्टर्ड है। फिर भी, वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में मेरा नाम 'शिफ्टेड' दिखाया गया है। यह सिर्फ कोई क्लर्क की गलती नहीं लगती — यह साफ तौर पर राजनीतिक बदले की भावना का मामला है।'
AAP का पलटवार
आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'सब जानते हैं कि SIR प्रक्रिया को चुनाव आयोग के ज़रिए भाजपा सरकार चला रही है। इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। ऐसा बयान देना सिर्फ उनकी ओछी राजनीति को दिखाता है।' उन्होंने आगे कहा कि चड्ढा को यह सवाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) से पूछना चाहिए और जनता को बताना चाहिए कि वे असल में पंजाब, दिल्ली या मुंबई में से कहाँ रहते हैं।
प्रियंका कक्कड़ ने यह भी कहा कि राघव चड्ढा तो कम से कम सांसद हैं, इसलिए उनके नाम कटने पर चर्चा हो रही है — लेकिन उन अनगिनत, बेज़ुबान लोगों के बारे में भी सोचना ज़रूरी है जिनके नाम बिना किसी सूचना के हटा दिए जाते हैं।
विपक्षी दलों के तीखे तंज़
पटियाला से कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने कहा कि राघव चड्ढा लंबे समय तक AAP का हिस्सा रहे और जल्द ही इसके अहम सदस्य बन गए, लेकिन बाद में राजनीतिक फायदे के लिए पाँच-छह अन्य लोगों के साथ BJP में शामिल हो गए।
समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद रमाशंकर राजभर ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'अब राघव चड्ढा तो चड्ढी हो गए हैं। अब वो दिल्ली की चड्ढी पहनेंगे, तो पंजाब में कैसे चड्ढा रहेंगे।'
SIR प्रक्रिया पर BJP पर निशाना
रमाशंकर राजभर ने SIR प्रक्रिया को लेकर BJP पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से BJP को ही बड़ा नुकसान हुआ है, क्योंकि पार्टी के संपन्न और प्रबुद्ध मतदाता कई जगहों पर नाम दर्ज करा लेते थे। उनके अनुसार, बंगाल में यह रणनीति सफल रही, लेकिन महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तर प्रदेश में उल्टा असर पड़ा — जहाँ BJP के खुद के बहु-पंजीकृत मतदाताओं के नाम कट गए।
राजभर ने यह भी कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में 15,000 से 20,000 मतदाताओं का नुकसान BJP को हुआ है। उन्होंने जोड़ा कि जब सेना के नायक अपना निवास साबित नहीं कर पा रहे और बड़े नेताओं के नाम कट रहे हैं, तो यह दर्शाता है कि BJP अपने ही जाल में फँस चुकी है।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा रहा है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर विभिन्न दलों के आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। राघव चड्ढा के पास अपना नाम पुनः दर्ज कराने के लिए आपत्ति दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े नेता का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटने पर राजनीतिक तूफान आया हो — यह मामला SIR की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर व्यापक सवाल खड़े करता है।