26 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी सुल्तानपुर मानहानि मामले में बरी, मणिकम टैगोर बोले — भाजपा बंद करे 'छोटी राजनीति'

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राहुल गांधी सुल्तानपुर मानहानि मामले में बरी, मणिकम टैगोर बोले — भाजपा बंद करे 'छोटी राजनीति'

सारांश

सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत ने राहुल गांधी को 2018 के मानहानि मामले में बरी किया — फैसले के वक्त वे खुद कोर्ट में मौजूद थे। तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने भाजपा पर 45 से अधिक 'फर्जी मामले' दर्ज कराकर 'छोटी राजनीति' करने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत ने 26 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी को 2018 के मानहानि मामले में बरी किया।
मामला अमित शाह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा था; अदालत ने कहा — टिप्पणियाँ मानहानि के दायरे में नहीं आतीं।
मणिकम टैगोर ने भाजपा पर राहुल गांधी के खिलाफ 45 से अधिक मामले दर्ज करा 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' रोकने का आरोप लगाया।
फैसले के दौरान राहुल गांधी स्वयं अदालत में उपस्थित थे।
कांग्रेस ने फैसले का स्वागत किया; भाजपा की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई।

उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर स्थित विशेष सांसद-विधायक (MP-MLA) अदालत ने 26 अक्टूबर 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी की विचाराधीन टिप्पणियाँ मानहानि की कानूनी परिभाषा के दायरे में नहीं आतीं। यह मामला वर्ष 2018 में उस वक्त दर्ज किया गया था, जब अमित शाह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।

मणिकम टैगोर की तीखी प्रतिक्रिया

तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष और सांसद मणिकम टैगोर ने अदालत के इस फैसले का तत्काल स्वागत करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'सुल्तानपुर का यह फर्जी मानहानि मामला भाजपा ने राहुल गांधी का और अदालत का समय बर्बाद करने के लिए दर्ज कराया था। अब फैसला आ गया है। हम अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन भाजपा और आरएसएस को इस तरह की गतिविधियाँ बंद करनी चाहिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोका नहीं जाना चाहिए।'

टैगोर ने यह भी जोड़ा कि राहुल गांधी कानूनी दबाव से विचलित होने वाले नेता नहीं हैं और देश के लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाना जारी रखेंगे।

राहुल गांधी पर मुकदमों का सिलसिला

मणिकम टैगोर के अनुसार, भाजपा से जुड़े लोगों ने देशभर में राहुल गांधी के विरुद्ध 45 से अधिक मामले दर्ज कराए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुकदमों का उद्देश्य राहुल गांधी को 'एक अदालत से दूसरी अदालत तक दौड़ाना' और उनका ध्यान विपक्षी राजनीति से भटकाना है। गौरतलब है कि 2023 में सूरत की एक अदालत ने उन्हें एक अन्य मानहानि मामले में दोषी ठहराया था, जिसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता अस्थायी रूप से रद्द हुई थी — हालाँकि बाद में उच्चतर न्यायालय ने उस दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में विपक्षी नेताओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाइयों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के मुकदमे लोकतांत्रिक विमर्श को संकुचित करते हैं, जबकि भाजपा का तर्क रहा है कि ये मामले स्वतंत्र नागरिकों द्वारा दर्ज कराए गए हैं।

अदालत में राहुल गांधी की उपस्थिति

फैसला सुनाए जाने के दौरान राहुल गांधी स्वयं अदालत में उपस्थित थे। अदालत ने मौजूदा स्तर पर इस मामले का पटाक्षेप करते हुए स्पष्ट किया कि विचाराधीन टिप्पणियाँ मानहानि की कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतरतीं।

कांग्रेस की व्यापक प्रतिक्रिया

अदालती फैसले पर कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने प्रसन्नता जताई। उनका कहना था कि विपक्ष के नेता के खिलाफ दर्ज ऐसे मामलों का मकसद उनका ध्यान भटकाना और उनका समय खर्च करना था। भाजपा की ओर से इस फैसले पर कोई तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

आगे देखें तो यह फैसला राहुल गांधी के विरुद्ध लंबित अन्य मामलों की दिशा पर भी राजनीतिक बहस को तेज़ कर सकता है, जो 2027 के राज्य चुनावों से पहले एक अहम संदर्भ बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि जब किसी नेता पर एक साथ 45 से अधिक मुकदमे हों, तो न्यायिक समय और संसाधनों का बोझ कौन उठाता है। मुख्यधारा की मीडिया कवरेज अक्सर 'बरी' की खबर को 'जीत' में बदल देती है, जबकि यह प्रश्न अनुत्तरित रहता है कि इन मामलों को शुरू करने की जवाबदेही कहाँ है। लोकतंत्र की परीक्षा केवल फैसले में नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया की पारदर्शिता में भी होती है जिसके ज़रिए नेताओं को कठघरे में खींचा जाता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुल्तानपुर मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी क्यों किया गया?
सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत ने 26 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया कि राहुल गांधी की विचाराधीन टिप्पणियाँ मानहानि की कानूनी परिभाषा के अंतर्गत नहीं आतीं। इस आधार पर अदालत ने उन्हें बरी करते हुए मामले का वर्तमान स्तर पर समापन कर दिया।
यह मानहानि मामला कब और क्यों दर्ज हुआ था?
यह मामला वर्ष 2018 में दर्ज किया गया था, जब राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मामला उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत में लंबित था।
मणिकम टैगोर ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोगों ने देशभर में राहुल गांधी के खिलाफ 45 से अधिक मामले दर्ज कराए हैं। उनका कहना था कि इन मुकदमों का मकसद राहुल गांधी का ध्यान भटकाना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाना है।
फैसले के वक्त राहुल गांधी कहाँ थे?
फैसला सुनाए जाने के दौरान राहुल गांधी स्वयं सुल्तानपुर की अदालत में उपस्थित थे। कांग्रेस ने इसे जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रतीक बताया।
इस फैसले का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
कांग्रेस के लिए यह फैसला राहुल गांधी के खिलाफ लंबित अन्य मामलों की बहस को नए सिरे से उठाने का अवसर है। विपक्ष इसे सत्तारूढ़ दल द्वारा कानूनी प्रक्रियाओं के कथित दुरुपयोग के खिलाफ एक नैतिक जीत के रूप में पेश कर रहा है, जो 2027 के आगामी राज्य चुनावों के संदर्भ में राजनीतिक महत्व रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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