क्या कोच्चि में राहुल गांधी ने डॉ. एम लीलावती को प्रियदर्शिनी साहित्य पुरस्कार दिया?

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क्या कोच्चि में राहुल गांधी ने डॉ. एम लीलावती को प्रियदर्शिनी साहित्य पुरस्कार दिया?

सारांश

कोच्चि में आयोजित एक समारोह में राहुल गांधी ने 98 वर्षीय डॉ. एम लीलावती को प्रियदर्शिनी साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने डॉ. लीलावती को प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके साहस और लेखन के प्रति समर्पण की सराहना की। यह पुरस्कार इंदिरा गांधी के नाम पर दिया गया है।

Key Takeaways

  • राहुल गांधी का पुरस्कार समारोह में हिस्सा लेना एक महत्वपूर्ण घटना है।
  • डॉ. एम लीलावती की लेखनी और साहस को सराहा गया।
  • यह पुरस्कार इंदिरा गांधी के नाम पर दिया जाता है।
  • डॉ. लीलावती का 98 वर्ष का जीवन अनुभव प्रेरणादायक है।
  • साहित्य का सम्मान समाज में विचारों की स्वतंत्रता को बढ़ावा देता है।

कोच्चि, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को सम्मानित मलयालम लेखिका और आलोचक डॉ. एम लीलावती को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) द्वारा स्थापित प्रियदर्शिनी साहित्य पुरस्कार से नवाजा।

इस अवसर पर राहुल गांधी ने कहा कि इस समारोह का हिस्सा बनना उनके लिए एक विशेष सम्मान है। उन्होंने 98 वर्षीय डॉ. लीलावती को न केवल केरल बल्कि पूरे भारत के लिए एक प्रेरणास्त्रोत और प्रतीक बताया। उन्होंने डॉ. लीलावती की दिनचर्या और बौद्धिक अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि वह हर सुबह 3 बजे उठकर पढ़ाई करती हैं और आज भी लिखने में सक्रिय हैं।

राहुल गांधी ने कहा, "वह इस समय जाति के मुद्दों पर लेखन कर रही हैं। बहुत से लोग इन विषयों पर सोचते हैं, लेकिन बोलने का साहस नहीं करते। डॉ. लीलावती उन लोगों में से हैं, जो सच बोलने का साहस रखती हैं।"

उन्होंने कहा कि एक महान देश और महान लोग चुप्पी से नहीं बनते, बल्कि अपने विचारों को खुलकर व्यक्त करने से बनते हैं।

राहुल गांधी ने डॉ. लीलावती को सरलता, विनम्रता और अपनी जड़ों से जुड़े व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनमें उन्हें केरल की असली आत्मा दिखाई देती है।

उन्होंने कहा, "हम सभी आपकी शताब्दी वर्ष का इंतजार कर रहे हैं।"

पुरस्कार ग्रहण करने के बाद, डॉ. लीलावती ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सम्मान प्राप्त करना उनके लिए एक भावुक क्षण है, क्योंकि यह पुरस्कार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर दिया जाता है।

उन्होंने याद किया कि 1981 में इंदिरा गांधी ने स्वयं उन्हें केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया था।

डॉ. लीलावती ने गांधी परिवार की विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस परिवार के दो सदस्य देश की सेवा में शहीद हुए हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी की धर्मनिरपेक्षता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक कीमती विदेशी गुड़िया त्याग दी थी।

उन्होंने कहा कि यही मूल्य उन्हें राजीव गांधी में भी दिखाई दिए, विशेषकर महिलाओं को नेतृत्व में आगे बढ़ाने के उनके प्रयासों में। डॉ. लीलावती ने कहा कि उन्हें यही गुण राहुल गांधी और प्रियंका गांधी में भी नजर आते हैं। उन्होंने कहा, "मैं चाहती हूं कि दोनों सत्ता के शीर्ष पर पहुंचें। शायद मैं यह नहीं देख पाऊं, लेकिन इसकी कल्पना कर सकती हूं।"

डॉ. एम लीलावती एक प्रतिष्ठित लेखिका, साहित्य आलोचक और शिक्षाविद हैं। उन्होंने कई कॉलेजों में पढ़ाया और गवर्नमेंट ब्रेनन कॉलेज, थलासेरी के प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त हुईं। उनके प्रभावशाली साहित्यिक जीवन को साहित्य अकादमी पुरस्कार और केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया है।

Point of View

जो न केवल साहित्य बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। यह घटना दर्शाती है कि साहित्य का सम्मान करना और विचारों को साझा करना हमारे समाज की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

डॉ. एम लीलावती को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
उन्हें प्रियदर्शिनी साहित्य पुरस्कार से नवाजा गया।
राहुल गांधी ने डॉ. लीलावती के बारे में क्या कहा?
राहुल गांधी ने उन्हें प्रेरणास्रोत और आइकन बताया।
डॉ. लीलावती की उम्र क्या है?
उनकी उम्र 98 वर्ष है।
यह पुरस्कार किसके नाम पर दिया जाता है?
यह पुरस्कार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर दिया जाता है।
डॉ. लीलावती ने किस कॉलेज से सेवानिवृत्त हुईं?
उन्होंने गवर्नमेंट ब्रेनन कॉलेज, थलासेरी से सेवानिवृत्त हुईं।
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