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राजस्थान में 100 लग्जरी स्लीपर बसें जब्त, RALSА अभियान से ऑपरेटरों में हड़कंप — वर्कशॉप में लगी कतारें

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राजस्थान में 100 लग्जरी स्लीपर बसें जब्त, RALSА अभियान से ऑपरेटरों में हड़कंप — वर्कशॉप में लगी कतारें

सारांश

राजस्थान में न्यायाधीश अदालत छोड़कर सड़कों पर उतरे और 100 से अधिक लग्जरी स्लीपर बसें जब्त कीं। दौसा में 8 और फलोदी में 24 से अधिक यात्रियों की बस आग में मौत के बाद आरएएलएसए का यह अभियान राज्य के परिवहन उद्योग को हिला रहा है।

मुख्य बातें

आरएएलएसए के एक महीने के अभियान में राजस्थान के 12 जिलों में 100 से अधिक लग्जरी स्लीपर बसें जब्त की गईं।
अभियान राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के निर्देशों पर शुरू हुआ; निगरानी जस्टिस हरिओम अत्री कर रहे हैं।
1 जुलाई 2026 को दौसा में बस आग से 8 मौतें ; नवंबर 2025 में फलोदी में 24 से अधिक मौतें — इन हादसों ने अभियान की पृष्ठभूमि तैयार की।
मुख्य उल्लंघनों में एकमात्र इमरजेंसी एग्जिट , गैरकानूनी स्लीपर लेआउट, अतिरिक्त सामान डिब्बे और एआईएस-119:2016 मानकों का उल्लंघन शामिल।
एक बस राजस्थान नंबर से मध्य प्रदेश में पंजीकृत मिली; एफआईआर दर्ज।
अधिकारियों का लक्ष्य — एक महीने में 80 प्रतिशत बसें सुरक्षा मानकों के अनुरूप।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (आरएएलएसए) के एक महीने के राज्यव्यापी प्रवर्तन अभियान ने 14 जुलाई 2026 तक 100 से अधिक लग्जरी स्लीपर बसों को सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के आधार पर जब्त कर लिया है। जयपुर, जोधपुर और राज्य के 12 जिलों में चलाई गई अचानक जाँच ने बस उद्योग में हलचल मचा दी है, और हजारों ऑपरेटर अपनी गाड़ियों को मंजूरशुदा मानकों के अनुरूप बनाने के लिए वर्कशॉप की ओर दौड़ पड़े हैं।

अभियान की पृष्ठभूमि और मकसद

यह अभियान राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के निर्देशों पर शुरू किया गया था और इसकी निगरानी आरएएलएसए के सदस्य सचिव जस्टिस हरिओम अत्री कर रहे हैं। राजस्थान में स्लीपर बसों की लगातार हो रही घातक दुर्घटनाओं और आग की घटनाओं ने न्यायिक तंत्र को अदालत कक्ष से बाहर निकलकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया। 1 जुलाई 2026 को दौसा में एक लग्जरी बस में आग लगने से आठ यात्रियों की जलकर मौत हो गई थी। इससे पहले नवंबर 2025 में फलोदी में बस अग्निकांड में 24 से अधिक लोगों की जान गई थी। इन त्रासदियों ने यह अभियान शुरू करने की तात्कालिकता को रेखांकित किया।

मुख्य उल्लंघन जो सामने आए

जाँच में पकड़ी गई बसों में गंभीर खामियाँ पाई गईं। इनमें केवल एक इमरजेंसी एग्जिट होना, स्लीपर लेआउट में गैरकानूनी बदलाव, यात्री सीटों की जगह अतिरिक्त सामान डिब्बे बनाना, वाहन का अनुमति से अधिक ओवरहैंग, छत पर सामान कैरियर लगाना और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 तथा एआईएस-119:2016 सुरक्षा मानकों का उल्लंघन शामिल था। जयपुर जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रवीण कुमार जीनवाल ने कहा, 'हरिओम अत्री और अन्य सहयोगी उन घटनाओं से बहुत दुखी थे जिनमें यात्री जलकर मर गए, क्योंकि उनके पास निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं था। इसीलिए न्यायिक अधिकारी खुद इस प्रवर्तन अभियान की निगरानी कर रहे हैं।'

वर्कशॉप में उमड़ी भीड़, 80% सुधार का लक्ष्य

अभियान की सख्ती के बाद पूरे राजस्थान में बस वर्कशॉप पर ऑपरेटरों की भीड़ उमड़ पड़ी है। जीनवाल ने बताया, 'कई बसों को गैरकानूनी तरीके से बढ़ाया या बदला गया था ताकि सामान रखने की अतिरिक्त जगह बनाई जा सके, जिससे यात्रियों की सुरक्षा से समझौता हुआ। ऑपरेटर अब उन्हें परिवहन नियमों के मुताबिक ठीक कर रहे हैं।' अधिकारियों का अनुमान है कि एक महीने के भीतर लगभग 80 प्रतिशत बसें मानकों के अनुरूप कर ली जाएंगी।

रजिस्ट्रेशन फर्जीवाड़ा भी उजागर

अभियान के दौरान रजिस्ट्रेशन से जुड़ी गड़बड़ियाँ भी सामने आईं। राजस्थान का नंबर प्लेट दर्शाने वाली एक गाड़ी वास्तव में मध्य प्रदेश में पंजीकृत पाई गई, जिस पर एफआईआर दर्ज की गई। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पंजीकृत दो बसें भी नियमों का उल्लंघन करते हुए राजस्थान में संचालित होती पाई गईं और उन्हें जब्त कर लिया गया। अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया कि जब्ती की कार्रवाई से पहले सभी यात्री अपनी मंजिल तक पहुँच जाएं।

आगे की राह

यह महीने भर चलने वाला अभियान राजस्थान के 12 जिलों में जारी रहेगा और इसका लक्ष्य यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा अनुपालन न करने वाली बसों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में बस अग्निकांड की घटनाएँ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी हैं। न्यायिक निगरानी में चलाए जा रहे इस अभियान को परिवहन सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि अभियान समाप्त होने के बाद अनुपालन बना रहे या नहीं। बिना स्थायी निगरानी तंत्र और कड़े परमिट नवीनीकरण नियमों के, यह कार्रवाई अगले हादसे तक की राहत मात्र बनकर रह सकती है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरएएलएसए का लग्जरी बस अभियान क्या है?
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (आरएएलएसए) द्वारा चलाया जा रहा यह एक महीने का राज्यव्यापी सड़क सुरक्षा अभियान है, जिसके तहत 12 जिलों में 100 से अधिक लग्जरी स्लीपर बसें जब्त की जा चुकी हैं। इसका मकसद मोटर वाहन अधिनियम और एआईएस-119:2016 मानकों का उल्लंघन करने वाली बसों पर कार्रवाई करना है।
यह अभियान क्यों शुरू किया गया?
1 जुलाई 2026 को दौसा में बस आग से 8 और नवंबर 2025 में फलोदी में 24 से अधिक यात्रियों की मौत के बाद राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के निर्देश पर यह अभियान शुरू हुआ। बसों में पर्याप्त इमरजेंसी एग्जिट न होने से हताहतों की संख्या बढ़ी, जो इस कार्रवाई की मुख्य वजह बनी।
बसों में कौन-कौन से उल्लंघन पाए गए?
जाँच में पकड़ी गई बसों में केवल एक इमरजेंसी एग्जिट, गैरकानूनी स्लीपर लेआउट, यात्री सीटों की जगह अतिरिक्त सामान डिब्बे, अनुमति से अधिक ओवरहैंग और छत पर सामान कैरियर जैसी खामियाँ मिलीं। ये सभी मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और एआईएस-119:2016 का उल्लंघन हैं।
ऑपरेटरों पर इस अभियान का क्या असर हुआ?
हजारों बस ऑपरेटर अपनी गाड़ियों को मंजूरशुदा आकार और मानकों के अनुरूप बनाने के लिए वर्कशॉप में कतार में खड़े हैं। अधिकारियों का लक्ष्य है कि एक महीने के भीतर लगभग 80 प्रतिशत बसें सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो जाएं।
क्या फर्जी रजिस्ट्रेशन वाली बसें भी पकड़ी गईं?
हाँ, राजस्थान नंबर प्लेट वाली एक बस मध्य प्रदेश में पंजीकृत मिली, जिस पर एफआईआर दर्ज की गई। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पंजीकृत दो बसें भी राजस्थान में अवैध रूप से चलती पाई गईं और जब्त कर ली गईं।
राष्ट्र प्रेस
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