राजस्थान में जज उतरे सड़कों पर: 9 लग्जरी बसें जब्त, 15 वाहनों के चालान; फलोदी-दौसा हादसों के बाद SLSA का सख्त अभियान
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) के न्यायिक अधिकारी गुरुवार, 10 जुलाई 2025 को कोर्टरूम छोड़कर सड़कों पर उतरे और लग्जरी स्लीपर बसों तथा स्कूल वाहनों की औचक जांच की। फलोदी और दौसा में बसों में आग लगने से यात्रियों की जान जाने की घटनाओं के बाद यह विशेष अभियान शुरू किया गया है। पूरे राज्य में हुई इस कार्रवाई में 9 बसें जब्त की गईं और 15 वाहनों के चालान काटे गए।
अभियान की पृष्ठभूमि और कारण
जयपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पवन कुमार जीनवाल ने बताया कि बसों में आग लगने की बार-बार हो रही घटनाओं को SLSA ने बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा, "हमने पाया कि कई स्लीपर लग्जरी बसें सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर रही थीं। जरूरी चार इमरजेंसी एग्जिट के बजाय, अधिकतर बसों में सिर्फ एक ही एग्जिट था। ऑपरेटर तय मानकों का उल्लंघन करके अतिरिक्त सामान रखने की जगह बनाने के लिए सीटों के बीच की दूरी में भी छेड़छाड़ कर रहे थे। कई मामलों में बस की असली बॉडी में भी बदलाव किया गया था।"
गौरतलब है कि फलोदी और दौसा में हुए जानलेवा बस अग्निकांडों में निर्दोष यात्रियों की जलकर मृत्यु हो गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बस सुरक्षा मानकों की अनदेखी एक गंभीर चिंता बनती जा रही है।
मुख्य उल्लंघन और कार्रवाई
जांच में सामने आया कि कई लग्जरी बसों में इमरजेंसी एग्जिट और खिड़कियों को कथित तौर पर अनधिकृत सीटों और स्लीपर बर्थ से ब्लॉक कर दिया गया था। कुछ बसों में अवैध रूप से केबिन बनाए गए थे, जो आपात स्थिति में बाहर निकलने में बाधा बन सकते थे। अधिकारियों ने बसों के डाइमेंशन मापे, स्लीपर बर्थ के बीच की दूरी जांची और सामान कंपार्टमेंट की भी जांच की ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बसों का उपयोग कमर्शियल सामान ढोने के लिए नहीं किया जा रहा।
जयपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (मेट्रोपॉलिटन-2) की सचिव (जज) पल्लवी शर्मा ने चोमू पुलिया और नंबर 14 बस स्टैंड पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मध्य प्रदेश में पंजीकृत एक बस कथित तौर पर राजस्थान रजिस्ट्रेशन प्लेट के साथ चलती पाई गई, जिस पर तत्काल कार्रवाई की गई।
जब्त बसों और यात्रियों की व्यवस्था
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब्त बसों में सवार यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। जब्त वाहनों को या तो अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस स्टेशन भेजा जाएगा, या संबंधित बस का लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा। जांच टीम में न्यायिक अधिकारी, परिवहन विभाग के अधिकारी और ट्रैफिक पुलिसकर्मी शामिल थे, जिन्होंने संयुक्त रूप से वाहनों के दस्तावेज और सुरक्षा सुविधाओं की जांच की।
आगे का अभियान: 12 शहरों में होगी जांच
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम शर्मा अत्री के अनुसार, अभियान का पहला चरण लंबी दूरी की लग्जरी बसों पर केंद्रित है। अगले एक महीने में न्यायिक अधिकारी जयपुर, उदयपुर, कोटा, जोधपुर, भरतपुर, बीकानेर, अजमेर, श्रीगंगानगर, अलवर, भीलवाड़ा, राजसमंद और सीकर सहित प्रमुख अंतर-राज्यीय परिवहन केंद्रों पर इसी तरह की जांच करेंगे। सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर जुर्माना और जब्ती की कार्रवाई जारी रहेगी।