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राजस्थान में जज उतरे सड़कों पर: 9 लग्जरी बसें जब्त, 15 वाहनों के चालान; फलोदी-दौसा हादसों के बाद SLSA का सख्त अभियान

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राजस्थान में जज उतरे सड़कों पर: 9 लग्जरी बसें जब्त, 15 वाहनों के चालान; फलोदी-दौसा हादसों के बाद SLSA का सख्त अभियान

सारांश

कोर्टरूम से सड़क पर — राजस्थान के न्यायिक अधिकारियों ने खुद बसें रोककर जांच की। फलोदी और दौसा के जानलेवा अग्निकांडों के बाद SLSA का यह कदम संकेत देता है कि कागज़ी नियम अब जमीन पर लागू होंगे — 9 बसें जब्त, 15 चालान, और 12 शहरों में अभियान जारी।

मुख्य बातें

राजस्थान में न्यायिक अधिकारी गुरुवार को कोर्टरूम छोड़कर सड़कों पर उतरे और लग्जरी बसों की औचक जांच की।
पूरे राज्य में 9 बसें जब्त और 15 वाहनों के चालान काटे गए।
अधिकांश बसों में 4 इमरजेंसी एग्जिट के नियम की जगह सिर्फ एक एग्जिट पाया गया; सीटों और बॉडी में अवैध बदलाव भी मिले।
जयपुर में मध्य प्रदेश की एक बस कथित तौर पर राजस्थान की फर्जी नंबर प्लेट के साथ पकड़ी गई।
अभियान का अगला चरण जयपुर, उदयपुर, कोटा, जोधपुर समेत 12 प्रमुख शहरों में एक माह के भीतर होगा।
यह अभियान फलोदी और दौसा में हुए बस अग्निकांडों के बाद SLSA ने शुरू किया है।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) के न्यायिक अधिकारी गुरुवार, 10 जुलाई 2025 को कोर्टरूम छोड़कर सड़कों पर उतरे और लग्जरी स्लीपर बसों तथा स्कूल वाहनों की औचक जांच की। फलोदी और दौसा में बसों में आग लगने से यात्रियों की जान जाने की घटनाओं के बाद यह विशेष अभियान शुरू किया गया है। पूरे राज्य में हुई इस कार्रवाई में 9 बसें जब्त की गईं और 15 वाहनों के चालान काटे गए।

अभियान की पृष्ठभूमि और कारण

जयपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पवन कुमार जीनवाल ने बताया कि बसों में आग लगने की बार-बार हो रही घटनाओं को SLSA ने बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा, "हमने पाया कि कई स्लीपर लग्जरी बसें सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर रही थीं। जरूरी चार इमरजेंसी एग्जिट के बजाय, अधिकतर बसों में सिर्फ एक ही एग्जिट था। ऑपरेटर तय मानकों का उल्लंघन करके अतिरिक्त सामान रखने की जगह बनाने के लिए सीटों के बीच की दूरी में भी छेड़छाड़ कर रहे थे। कई मामलों में बस की असली बॉडी में भी बदलाव किया गया था।"

गौरतलब है कि फलोदी और दौसा में हुए जानलेवा बस अग्निकांडों में निर्दोष यात्रियों की जलकर मृत्यु हो गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बस सुरक्षा मानकों की अनदेखी एक गंभीर चिंता बनती जा रही है।

मुख्य उल्लंघन और कार्रवाई

जांच में सामने आया कि कई लग्जरी बसों में इमरजेंसी एग्जिट और खिड़कियों को कथित तौर पर अनधिकृत सीटों और स्लीपर बर्थ से ब्लॉक कर दिया गया था। कुछ बसों में अवैध रूप से केबिन बनाए गए थे, जो आपात स्थिति में बाहर निकलने में बाधा बन सकते थे। अधिकारियों ने बसों के डाइमेंशन मापे, स्लीपर बर्थ के बीच की दूरी जांची और सामान कंपार्टमेंट की भी जांच की ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बसों का उपयोग कमर्शियल सामान ढोने के लिए नहीं किया जा रहा।

जयपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (मेट्रोपॉलिटन-2) की सचिव (जज) पल्लवी शर्मा ने चोमू पुलिया और नंबर 14 बस स्टैंड पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मध्य प्रदेश में पंजीकृत एक बस कथित तौर पर राजस्थान रजिस्ट्रेशन प्लेट के साथ चलती पाई गई, जिस पर तत्काल कार्रवाई की गई।

जब्त बसों और यात्रियों की व्यवस्था

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब्त बसों में सवार यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। जब्त वाहनों को या तो अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस स्टेशन भेजा जाएगा, या संबंधित बस का लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा। जांच टीम में न्यायिक अधिकारी, परिवहन विभाग के अधिकारी और ट्रैफिक पुलिसकर्मी शामिल थे, जिन्होंने संयुक्त रूप से वाहनों के दस्तावेज और सुरक्षा सुविधाओं की जांच की।

आगे का अभियान: 12 शहरों में होगी जांच

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम शर्मा अत्री के अनुसार, अभियान का पहला चरण लंबी दूरी की लग्जरी बसों पर केंद्रित है। अगले एक महीने में न्यायिक अधिकारी जयपुर, उदयपुर, कोटा, जोधपुर, भरतपुर, बीकानेर, अजमेर, श्रीगंगानगर, अलवर, भीलवाड़ा, राजसमंद और सीकर सहित प्रमुख अंतर-राज्यीय परिवहन केंद्रों पर इसी तरह की जांच करेंगे। सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर जुर्माना और जब्ती की कार्रवाई जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

या बस ऑपरेटरों पर दीर्घकालिक दबाव बनाएगा। फलोदी और दौसा जैसी त्रासदियाँ पहली बार नहीं हुईं, और हर बार जांच अभियान के बाद ढिलाई लौट आती है। जब तक परिवहन विभाग और पुलिस की नियमित निगरानी को न्यायिक निगरानी से नहीं जोड़ा जाता, तब तक यात्री सुरक्षा केवल संकट के समय की प्राथमिकता बनकर रहेगी।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में न्यायिक अधिकारियों ने बसों की जांच क्यों की?
फलोदी और दौसा में बसों में आग लगने से यात्रियों की मौत के बाद राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) ने यह विशेष अभियान शुरू किया। न्यायिक अधिकारी खुद सड़कों पर उतरे ताकि सुरक्षा नियमों का जमीनी स्तर पर पालन सुनिश्चित किया जा सके।
इस जांच में कितनी बसें जब्त की गईं और क्या उल्लंघन पाए गए?
पूरे राजस्थान में 9 बसें जब्त की गईं और 15 वाहनों के चालान काटे गए। मुख्य उल्लंघनों में अनिवार्य 4 इमरजेंसी एग्जिट की जगह सिर्फ एक एग्जिट होना, सीटों के बीच अवैध बदलाव, अनधिकृत केबिन निर्माण और बस बॉडी में फेरबदल शामिल हैं।
जब्त बसों में सवार यात्रियों का क्या होगा?
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब्त बसों में यात्रा कर रहे यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। जब्त वाहन को पुलिस स्टेशन भेजा जाएगा या संबंधित ऑपरेटर का लाइसेंस निलंबित किया जाएगा।
SLSA का यह अभियान आगे कहाँ-कहाँ चलेगा?
अगले एक महीने में न्यायिक अधिकारी जयपुर, उदयपुर, कोटा, जोधपुर, भरतपुर, बीकानेर, अजमेर, श्रीगंगानगर, अलवर, भीलवाड़ा, राजसमंद और सीकर सहित 12 प्रमुख अंतर-राज्यीय परिवहन केंद्रों पर जांच करेंगे। अभियान का पहला चरण लंबी दूरी की लग्जरी बसों पर केंद्रित है।
क्या स्कूल बसों की भी जांच की गई?
हाँ, इस अभियान में स्कूल ट्रांसपोर्ट वाहनों की भी सुरक्षा मानकों के पालन के लिए जांच की गई। जांच दल में न्यायिक अधिकारी, परिवहन विभाग के अधिकारी और ट्रैफिक पुलिसकर्मी शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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