राजस्थान सूखा: गहलोत बोले — हजारों गायें मरीं, सरकार बेखबर; मदन राठौड़ से माफी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 18 अक्टूबर 2026 को राजस्थान में गहराते सूखे संकट पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जैसलमेर में हजारों गायें मर चुकी हैं और सरकार को अभी तक इसकी कोई सुध नहीं है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकार से केंद्र से तत्काल राहत माँगने का आग्रह किया।
सूखे की गंभीरता: बीकानेर से जैसलमेर तक हाहाकार
गहलोत ने कहा कि उन्होंने हाल ही में बीकानेर का दौरा किया, जहाँ हालात अत्यंत चिंताजनक हैं। जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर सहित कई जिलों में स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। उनके अनुसार, जैसलमेर के एक पूर्व विधायक ने उन्हें बताया कि वहाँ हजारों गायें मर चुकी हैं।
गहलोत ने आरोप लगाया, 'राजस्थान इकलौता ऐसा राज्य है जहाँ सरकार को अभी तक यह भी नहीं पता कि गाँवों में सूखा कितना गंभीर है।' उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्तर पर निगरानी सुनिश्चित नहीं की गई तो पूरे राज्य की जनता को भुगतना पड़ेगा।
चारे और पानी का संकट
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि इस समय चारे की कीमत ₹20 प्रति किलो तक पहुँच चुकी है, जबकि सरकार की ओर से कोई इंतज़ाम नहीं किया जा रहा। पूरे राज्य में पीने के पानी की भी भारी किल्लत है। उन्होंने कहा कि कम बारिश के कारण राजस्थान और उत्तर भारत में जल संकट और गहरा गया है और प्रदेश के बाँध भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की विदाई के बाद पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पशुपालकों के सामने साल की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी है।
गहलोत ने गिनाया अपना 'काम के बदले अनाज' का रिकॉर्ड
गहलोत ने अपनी पूर्व सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उनके शासनकाल में सूखे की स्थिति आने पर 16 अगस्त से ही राहत कार्य शुरू कर दिए गए थे, जो करीब 10-11 महीने तक चले। उन्होंने याद दिलाया कि तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और उन्होंने केंद्र से मदद लेकर 'काम के बदले अनाज' योजना लागू की थी।
उन्होंने वर्तमान सरकार पर तंज कसते हुए कहा, 'यह तो डबल इंजन की सरकार है, फिर वे केंद्र से बात क्यों नहीं करते?'
मदन राठौड़ पर निशाना — 'बिना अगर-मगर माफी माँगें'
गहलोत ने BJP के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के विवादित बयान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राठौड़ को 'बिना किसी अगर-मगर के' स्पष्ट रूप से खेद जताना चाहिए। गहलोत ने कहा कि राठौड़ जितनी सफाई देने की कोशिश करते हैं, उतनी ही गहरी अपनी कब्र खोदते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत के संदर्भ में पाकिस्तान का ज़िक्र जनता में गहरा आक्रोश पैदा करता है और BJP इस स्थिति को तब तक नहीं सँभाल पाएगी जब तक राठौड़ सार्वजनिक रूप से माफी नहीं माँगते।
आगे क्या होगा
गहलोत ने माँग की है कि राज्य सरकार तत्काल सूखा राहत के लिए केंद्र सरकार से संपर्क करे और मुख्यमंत्री स्तर पर स्थिति की निगरानी की जाए। गौरतलब है कि स्थानीय निकाय चुनावों में अनियमितताओं और पुलिस द्वारा धमकाने के उनके आरोपों ने सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस सूखे संकट पर क्या ठोस कदम उठाती है।