18 अक्टूबर 2026
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राजस्थान सूखा: गहलोत बोले — हजारों गायें मरीं, सरकार बेखबर; मदन राठौड़ से माफी की मांग

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राजस्थान सूखा: गहलोत बोले — हजारों गायें मरीं, सरकार बेखबर; मदन राठौड़ से माफी की मांग

सारांश

राजस्थान में सूखा अब सियासी अखाड़ा बन चुका है। पूर्व CM गहलोत ने जैसलमेर में हजारों गायों की मौत और ₹20/किलो चारे का हवाला देते हुए BJP सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया — और साथ में मदन राठौड़ से बिना शर्त माफी की माँग भी कर डाली।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 18 अक्टूबर 2026 को राजस्थान में सूखे की गंभीर स्थिति पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया।
जैसलमेर में हजारों गायें मर चुकी हैं — एक पूर्व विधायक का हवाला देते हुए गहलोत ने यह जानकारी दी।
चारे की कीमत ₹20 प्रति किलो तक पहुँची; राज्य के बाँध नहीं भरे, पीने के पानी की भारी किल्लत।
गहलोत ने अपने कार्यकाल में 16 अगस्त से राहत कार्य शुरू करने और 10-11 महीने जारी रखने का उदाहरण दिया।
BJP प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से 'बिना अगर-मगर' स्पष्ट माफी की माँग की।
राज्य सरकार से केंद्र से तत्काल सूखा राहत माँगने और मुख्यमंत्री स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करने का आग्रह।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 18 अक्टूबर 2026 को राजस्थान में गहराते सूखे संकट पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जैसलमेर में हजारों गायें मर चुकी हैं और सरकार को अभी तक इसकी कोई सुध नहीं है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकार से केंद्र से तत्काल राहत माँगने का आग्रह किया।

सूखे की गंभीरता: बीकानेर से जैसलमेर तक हाहाकार

गहलोत ने कहा कि उन्होंने हाल ही में बीकानेर का दौरा किया, जहाँ हालात अत्यंत चिंताजनक हैं। जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर सहित कई जिलों में स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। उनके अनुसार, जैसलमेर के एक पूर्व विधायक ने उन्हें बताया कि वहाँ हजारों गायें मर चुकी हैं।

गहलोत ने आरोप लगाया, 'राजस्थान इकलौता ऐसा राज्य है जहाँ सरकार को अभी तक यह भी नहीं पता कि गाँवों में सूखा कितना गंभीर है।' उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्तर पर निगरानी सुनिश्चित नहीं की गई तो पूरे राज्य की जनता को भुगतना पड़ेगा।

चारे और पानी का संकट

पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि इस समय चारे की कीमत ₹20 प्रति किलो तक पहुँच चुकी है, जबकि सरकार की ओर से कोई इंतज़ाम नहीं किया जा रहा। पूरे राज्य में पीने के पानी की भी भारी किल्लत है। उन्होंने कहा कि कम बारिश के कारण राजस्थान और उत्तर भारत में जल संकट और गहरा गया है और प्रदेश के बाँध भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की विदाई के बाद पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पशुपालकों के सामने साल की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी है।

गहलोत ने गिनाया अपना 'काम के बदले अनाज' का रिकॉर्ड

गहलोत ने अपनी पूर्व सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उनके शासनकाल में सूखे की स्थिति आने पर 16 अगस्त से ही राहत कार्य शुरू कर दिए गए थे, जो करीब 10-11 महीने तक चले। उन्होंने याद दिलाया कि तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और उन्होंने केंद्र से मदद लेकर 'काम के बदले अनाज' योजना लागू की थी।

उन्होंने वर्तमान सरकार पर तंज कसते हुए कहा, 'यह तो डबल इंजन की सरकार है, फिर वे केंद्र से बात क्यों नहीं करते?'

मदन राठौड़ पर निशाना — 'बिना अगर-मगर माफी माँगें'

गहलोत ने BJP के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के विवादित बयान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राठौड़ को 'बिना किसी अगर-मगर के' स्पष्ट रूप से खेद जताना चाहिए। गहलोत ने कहा कि राठौड़ जितनी सफाई देने की कोशिश करते हैं, उतनी ही गहरी अपनी कब्र खोदते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत के संदर्भ में पाकिस्तान का ज़िक्र जनता में गहरा आक्रोश पैदा करता है और BJP इस स्थिति को तब तक नहीं सँभाल पाएगी जब तक राठौड़ सार्वजनिक रूप से माफी नहीं माँगते।

आगे क्या होगा

गहलोत ने माँग की है कि राज्य सरकार तत्काल सूखा राहत के लिए केंद्र सरकार से संपर्क करे और मुख्यमंत्री स्तर पर स्थिति की निगरानी की जाए। गौरतलब है कि स्थानीय निकाय चुनावों में अनियमितताओं और पुलिस द्वारा धमकाने के उनके आरोपों ने सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस सूखे संकट पर क्या ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'हजारों गायों की मौत' का दावा एक पूर्व विधायक के कथन पर आधारित है, जिसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना बाकी है। असली सवाल यह है कि राज्य सरकार ने अब तक सूखा घोषित क्यों नहीं किया और केंद्रीय राहत के लिए औपचारिक अनुरोध कब तक भेजा जाएगा। मदन राठौड़ वाला प्रकरण इस ज़रूरी बहस को पटरी से उतार सकता है — जबकि लाखों पशुपालकों की जीविका दाँव पर है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में सूखे की स्थिति इस समय कितनी गंभीर है?
अशोक गहलोत के अनुसार जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर और बीकानेर सहित कई जिलों में स्थिति बेहद खराब है। चारे की कीमत ₹20 प्रति किलो तक पहुँच चुकी है और राज्य के बाँध पूरी तरह नहीं भरे हैं।
जैसलमेर में गायों की मौत का दावा किसने किया?
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने बताया कि जैसलमेर के एक पूर्व विधायक ने उन्हें जानकारी दी कि वहाँ हजारों गायें मर चुकी हैं। यह दावा अभी तक सरकारी आँकड़ों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
गहलोत ने मदन राठौड़ से माफी की माँग क्यों की?
गहलोत ने BJP के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ पर एक विवादित बयान देने का आरोप लगाया जिसमें पाकिस्तान का ज़िक्र था। गहलोत का कहना है कि राठौड़ को बिना किसी शर्त के सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए।
गहलोत ने अपनी सरकार के सूखा प्रबंधन की क्या मिसाल दी?
उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने 16 अगस्त से राहत कार्य शुरू कर दिए थे जो करीब 10-11 महीने तक चले। तब अटल बिहारी वाजपेयी की केंद्र सरकार से सहयोग लेकर 'काम के बदले अनाज' योजना लागू की गई थी।
राजस्थान सरकार से गहलोत की क्या माँग है?
गहलोत ने माँग की है कि राज्य सरकार तत्काल केंद्र से सूखा राहत के लिए संपर्क करे और मुख्यमंत्री स्तर पर स्थिति की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए।
राष्ट्र प्रेस
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