20 अक्टूबर 2026
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गहलोत की राजस्थान सरकार को चेतावनी: पानी-चारे का संकट गहराया, पशुधन और ग्रामीण रोज़गार खतरे में

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गहलोत की राजस्थान सरकार को चेतावनी: पानी-चारे का संकट गहराया, पशुधन और ग्रामीण रोज़गार खतरे में

सारांश

राजस्थान में पानी और चारे का संकट तेज़ होने से पहले ही पूर्व CM गहलोत ने अलार्म बजा दिया है — सूखाग्रस्त घोषणा, चारा डिपो और राहत शिविरों की माँग के साथ। यह ऐसे समय में आया है जब आगामी पंचायत चुनावों में ग्रामीण असंतोष को भुनाने की कोशिश भी साफ़ दिखती है।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 20 अक्टूबर 2026 को जोधपुर में मीडिया से बात करते हुए राजस्थान में पानी और चारे के संभावित संकट की चेतावनी दी।
बांधों में कम जलभराव, फसल नुकसान और चारे के घटते उत्पादन को संकट की तीन मुख्य वजहें बताया।
सरकार से माँग — प्रभावित तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित करें, चारा डिपो बनाएँ और पशु राहत शिविर खोलें।
दिहाड़ी मज़दूरों और भूमिहीन किसानों पर पड़ने वाले आर्थिक असर की भी चिंता जताई।
रितु बराला मामले में एफआईआर देरी और नगर निगम चुनावों की कथित अनियमितताओं पर भी सरकार को घेरा।
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को धरना देना पड़ा — गहलोत ने इसे प्रशासनिक विफलता बताया।

कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 20 अक्टूबर 2026 को राज्य में पेयजल और पशु चारे के बढ़ते संकट को लेकर भाजपा सरकार को आगाह किया और माँग की कि संकटग्रस्त ज़िलों में तत्काल राहत कार्य शुरू किए जाएँ। जोधपुर से जयपुर रवाना होने से पहले हवाई अड्डे पर मीडिया से मुखातिब गहलोत ने कहा कि बांधों में पानी की घटती आवक, फसल नुकसान और चारे के कम उत्पादन ने मिलकर ऐसी स्थिति बना दी है जो पशुधन और ग्रामीण आजीविका दोनों के लिए गंभीर खतरा है।

संकट का स्वरूप और प्रभावित क्षेत्र

गहलोत ने बताया कि जोधपुर में पानी की समस्या पहले ही सिर उठा चुकी है। उनके अनुसार राजस्थान के अनेक ज़िलों में सूखे जैसे हालात हैं और यदि अभी से कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि चारे की बढ़ती कीमतें पशुपालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ाएँगी, जो पहले से फसल नुकसान की मार झेल रहे हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान में मानसून की अनियमितता और बांधों में अपेक्षित जलसंग्रह न होने की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन इस बार का संकट एक साथ पेयजल, पशु चारे और ग्रामीण रोज़गार तीनों को प्रभावित कर रहा है — जो इसे विशेष रूप से गंभीर बनाता है।

गहलोत की माँगें: सूखाग्रस्त घोषणा से राहत शिविर तक

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से सूखे से प्रभावित तहसीलों और गाँवों की पहचान कर उन्हें आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी माँग की कि चारे के डिपो स्थापित किए जाएँ, अन्य राज्यों से चारे की आपूर्ति जुटाई जाए और पशुधन संरक्षण के लिए राहत शिविर खोले जाएँ।

गहलोत ने सुझाव दिया कि प्रभावित परिवारों को सब्सिडी और अन्य राहत उपाय मिलने चाहिए तथा पेयजल, चारे और पशुधन सुरक्षा के लिए एक व्यापक कार्य योजना अविलंब तैयार की जाए, ताकि ग्रामीण समुदायों की तकलीफ़ और न बढ़े।

ग्रामीण रोज़गार पर मंडराता खतरा

गहलोत ने फसल नुकसान के ग्रामीण आजीविका पर दूरगामी असर की भी चर्चा की। उनके अनुसार जिन गरीब परिवारों के पास कृषि भूमि नहीं है और जो दिहाड़ी मज़दूरी पर निर्भर हैं, उन्हें कृषि कार्य घटने से गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

'विकसित भारत रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)' का उल्लेख करते हुए उन्होंने आशंका जताई कि इस योजना के तहत रोज़गार के अवसर बंद होने से स्थिति और जटिल हो जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि फसल नुकसान और दिहाड़ी रोज़गार के घटते अवसरों के बीच ग्रामीण मज़दूर अपनी आजीविका कैसे चलाएँगे।

नगर निगम चुनाव और रितु बराला मामले पर भी निशाना

गहलोत ने नगर निगम चुनावों के संचालन और कथित अनियमितताओं पर भी सरकार को घेरा। जोधपुर और जयपुर के उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि स्थानीय निकायों के गठन के नतीजे कांग्रेस को मिले वास्तविक वोट शेयर को नहीं दर्शाते। उन्होंने ग्रामीण मतदाताओं से आगामी पंचायत और जिला परिषद चुनावों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

गहलोत ने रितु बराला मामले में एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पार्टी नेताओं को धरने पर नहीं बैठना पड़ता। उनके अनुसार यह प्रकरण सरकार के कामकाज और पुलिस प्रशासन की शिकायत-निपटान प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

आगे क्या होगा

यदि राजस्थान सरकार गहलोत की माँगों पर ध्यान नहीं देती, तो राज्य में विपक्षी दबाव और बढ़ सकता है — खासतौर से आगामी पंचायत चुनावों के मद्देनज़र। पशुधन और पेयजल संकट की स्थिति में केंद्र से सूखा राहत पैकेज माँगने की नौबत भी आ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तथ्यात्मक ज़मीन को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। राजस्थान में सूखे की चक्रीय मार और पशुधन पर पड़ने वाला असर दशकों पुरानी समस्या है, जिसे हर सरकार — कांग्रेस की भी — पर्याप्त ढाँचागत सुधार से नहीं सुलझा सकी। असली परीक्षा यह है कि भाजपा सरकार सूखाग्रस्त घोषणा और राहत वितरण में पारदर्शिता दिखाती है या नहीं — क्योंकि राजस्थान में यही देरी पिछले संकटों को महासंकट में बदलती रही है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक गहलोत ने राजस्थान में किस संकट की चेतावनी दी है?
गहलोत ने राजस्थान में पेयजल और पशु चारे की कमी का संकट गहराने की चेतावनी दी है। उनके अनुसार बांधों में कम जलभराव, फसल नुकसान और चारे का कम उत्पादन मिलकर पशुधन और ग्रामीण आजीविका दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं।
गहलोत ने राजस्थान सरकार से क्या माँगें की हैं?
उन्होंने माँग की है कि सूखे से प्रभावित तहसीलों और गाँवों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया जाए, चारे के डिपो बनाए जाएँ, अन्य राज्यों से चारा आपूर्ति जुटाई जाए और पशुधन के लिए राहत शिविर खोले जाएँ। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए सब्सिडी और राहत उपायों की भी अपील की।
राजस्थान में यह संकट ग्रामीण रोज़गार को कैसे प्रभावित करेगा?
गहलोत के अनुसार भूमिहीन परिवार जो दिहाड़ी मज़दूरी पर निर्भर हैं, उन्हें कृषि कार्य घटने से गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। 'विकसित भारत रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)' के तहत रोज़गार अवसर बंद होने से यह स्थिति और बिगड़ सकती है।
रितु बराला मामले में गहलोत ने क्या आरोप लगाए?
गहलोत ने आरोप लगाया कि रितु बराला मामले में एफआईआर दर्ज करने में अनावश्यक देरी हुई। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती, तो राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पार्टी नेताओं को धरने पर नहीं बैठना पड़ता।
गहलोत ने नगर निगम चुनावों को लेकर क्या चिंता जताई?
गहलोत ने जोधपुर और जयपुर के उदाहरण देते हुए दावा किया कि स्थानीय निकायों के गठन के नतीजे कांग्रेस को मिले वास्तविक वोट शेयर को नहीं दर्शाते। उन्होंने ग्रामीण मतदाताओं से आगामी पंचायत और जिला परिषद चुनावों में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की।
राष्ट्र प्रेस
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