राजस्थान में डीएपी की कमी: गहलोत ने भजनलाल सरकार और केंद्र पर साधा निशाना, ब्लैक मार्केट में ₹2,200 तक पहुँचा बैग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 9 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरसों की बुवाई के अहम मौसम में राज्य में डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद की कथित कमी के चलते किसान ब्लैक मार्केट में मजबूरन ऊँचे दाम चुकाने पर विवश हैं, और भाजपा की 'डबल-इंजन सरकार' पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में विफल रही है।
मुख्य आरोप और ज़मीनी स्थिति
गहलोत के अनुसार, डीएपी का एक बैग, जिसकी सरकारी कीमत आमतौर पर ₹1,350 होती है, वह ब्लैक मार्केट में ₹2,100 से ₹2,200 तक में बेचा जा रहा है — यानी सामान्य मूल्य से करीब 63% अधिक। उन्होंने दावा किया कि सहकारी समितियों ने अपनी खाद की ज़रूरतें पहले ही बता दी थीं, लेकिन आपूर्ति अब तक नहीं पहुँची।
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में गहलोत ने कहा कि सितंबर 2026 से ही कई जिलों से खाद की कमी की शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसानों पर सामान्य डीएपी के साथ-साथ नैनो डीएपी जैसे उत्पाद भी खरीदने का दबाव डाला जा रहा है।
गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा, 'यह कैसा विकास है, जहाँ अन्नदाता को बुआई के लिए ब्लैक मार्केट से खाद खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है?' उन्होंने भाजपा सरकार से तत्काल पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और कालाबाजारी में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की।
भाजपा के भीतर भी असंतोष
खबरों के मुताबिक, खाद की कमी से उपजी समस्याएँ केवल विपक्ष की आवाज़ तक सीमित नहीं हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कैबिनेट मंत्री और विधायक भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से संपर्क कर कथित तौर पर इस मुद्दे पर ध्यान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। यह संकेत देता है कि ज़मीनी दबाव दलीय सीमाओं से परे जा रहा है।
राज्य सरकार का जवाब
राज्य सरकार ने गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रबी 2026–27 सीजन के दौरान किसानों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए खाद की उपलब्धता पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, राजस्थान में इस समय 3.72 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 97,000 मीट्रिक टन एनपीके और 2.08 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है।
कृषि और बागवानी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने स्पष्ट किया कि खाद का स्टॉक पर्याप्त है और उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के आधार पर अनावश्यक खरीदारी या भंडारण न करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर राजस्थान की माँग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटी है।
टास्क फोर्स बैठक और वितरण रणनीति
हाल ही में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में राज्य-स्तरीय उर्वरक वितरण नियामक टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में रबी सीजन के दौरान उच्च गुणवत्ता की खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और जमाखोरी व कालाबाजारी को रोकने पर विशेष ज़ोर दिया गया। विभाग ने कहा कि जिन जिलों और ब्लॉकों में उपलब्धता कम और खपत अधिक है, उनकी पहचान की जा रही है।
फसल क्षेत्र और खाद योजना
राज्य सरकार ने फसल विविधीकरण पर भी ज़ोर दिया है। रबी 2025–26 में तिलहन की खेती 39.82 लाख हेक्टेयर, दलहन 20.69 लाख हेक्टेयर और अनाज फसलें 42.77 लाख हेक्टेयर पर हुईं। रबी 2026–27 के लिए तिलहन हेतु 40.06 लाख हेक्टेयर, दलहन हेतु 21.95 लाख हेक्टेयर और अनाज फसलों हेतु 38.50 लाख हेक्टेयर का प्रस्ताव है। इन प्रस्तावित क्षेत्रों और पोषक तत्वों की आवश्यकता के आधार पर खाद वितरण की योजना तैयार की गई है।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राजस्थान में सरसों की बुवाई का मौसम चरम पर है और हर दिन की देरी किसानों की उत्पादकता पर सीधा असर डाल सकती है। आने वाले हफ्तों में आपूर्ति श्रृंखला पर सरकार की पकड़ की असली परीक्षा होगी।