9 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजस्थान में डीएपी की कमी: गहलोत ने भजनलाल सरकार और केंद्र पर साधा निशाना, ब्लैक मार्केट में ₹2,200 तक पहुँचा बैग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजस्थान में डीएपी की कमी: गहलोत ने भजनलाल सरकार और केंद्र पर साधा निशाना, ब्लैक मार्केट में ₹2,200 तक पहुँचा बैग

सारांश

सरसों की बुवाई के ऐन मौसम में राजस्थान में डीएपी खाद की कथित किल्लत ने सियासी संग्राम छेड़ दिया है। गहलोत का आरोप है कि ₹1,350 का बैग ब्लैक मार्केट में ₹2,200 तक पहुँच गया है, जबकि सरकार 1.06 लाख मीट्रिक टन स्टॉक का दावा कर रही है। किसान और भाजपा विधायक — दोनों मुख्यमंत्री का दरवाज़ा खटखटा रहे हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने 9 अक्टूबर 2026 को भजनलाल शर्मा सरकार और केंद्र पर डीएपी की कमी का आरोप लगाया।
डीएपी का सरकारी मूल्य ₹1,350 प्रति बैग; ब्लैक मार्केट में कथित तौर पर ₹2,100–₹2,200 तक वसूला जा रहा है।
कृषि विभाग के अनुसार राजस्थान में अभी 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी स्टॉक उपलब्ध है।
श्रीनिवास की अध्यक्षता में राज्य उर्वरक वितरण टास्क फोर्स की बैठक हो चुकी है।
किरोड़ी लाल मीणा ने स्टॉक पर्याप्त बताया; किसानों को अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी।
सत्तारूढ़ BJP के मंत्री और विधायक भी कथित तौर पर मुख्यमंत्री से खाद आपूर्ति पर संपर्क कर रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 9 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरसों की बुवाई के अहम मौसम में राज्य में डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद की कथित कमी के चलते किसान ब्लैक मार्केट में मजबूरन ऊँचे दाम चुकाने पर विवश हैं, और भाजपा की 'डबल-इंजन सरकार' पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में विफल रही है।

मुख्य आरोप और ज़मीनी स्थिति

गहलोत के अनुसार, डीएपी का एक बैग, जिसकी सरकारी कीमत आमतौर पर ₹1,350 होती है, वह ब्लैक मार्केट में ₹2,100 से ₹2,200 तक में बेचा जा रहा है — यानी सामान्य मूल्य से करीब 63% अधिक। उन्होंने दावा किया कि सहकारी समितियों ने अपनी खाद की ज़रूरतें पहले ही बता दी थीं, लेकिन आपूर्ति अब तक नहीं पहुँची।

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में गहलोत ने कहा कि सितंबर 2026 से ही कई जिलों से खाद की कमी की शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसानों पर सामान्य डीएपी के साथ-साथ नैनो डीएपी जैसे उत्पाद भी खरीदने का दबाव डाला जा रहा है।

गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा, 'यह कैसा विकास है, जहाँ अन्नदाता को बुआई के लिए ब्लैक मार्केट से खाद खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है?' उन्होंने भाजपा सरकार से तत्काल पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और कालाबाजारी में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की।

भाजपा के भीतर भी असंतोष

खबरों के मुताबिक, खाद की कमी से उपजी समस्याएँ केवल विपक्ष की आवाज़ तक सीमित नहीं हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कैबिनेट मंत्री और विधायक भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से संपर्क कर कथित तौर पर इस मुद्दे पर ध्यान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। यह संकेत देता है कि ज़मीनी दबाव दलीय सीमाओं से परे जा रहा है।

राज्य सरकार का जवाब

राज्य सरकार ने गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रबी 2026–27 सीजन के दौरान किसानों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए खाद की उपलब्धता पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, राजस्थान में इस समय 3.72 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 97,000 मीट्रिक टन एनपीके और 2.08 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है।

कृषि और बागवानी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने स्पष्ट किया कि खाद का स्टॉक पर्याप्त है और उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के आधार पर अनावश्यक खरीदारी या भंडारण न करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर राजस्थान की माँग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटी है।

टास्क फोर्स बैठक और वितरण रणनीति

हाल ही में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में राज्य-स्तरीय उर्वरक वितरण नियामक टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में रबी सीजन के दौरान उच्च गुणवत्ता की खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और जमाखोरी व कालाबाजारी को रोकने पर विशेष ज़ोर दिया गया। विभाग ने कहा कि जिन जिलों और ब्लॉकों में उपलब्धता कम और खपत अधिक है, उनकी पहचान की जा रही है।

फसल क्षेत्र और खाद योजना

राज्य सरकार ने फसल विविधीकरण पर भी ज़ोर दिया है। रबी 2025–26 में तिलहन की खेती 39.82 लाख हेक्टेयर, दलहन 20.69 लाख हेक्टेयर और अनाज फसलें 42.77 लाख हेक्टेयर पर हुईं। रबी 2026–27 के लिए तिलहन हेतु 40.06 लाख हेक्टेयर, दलहन हेतु 21.95 लाख हेक्टेयर और अनाज फसलों हेतु 38.50 लाख हेक्टेयर का प्रस्ताव है। इन प्रस्तावित क्षेत्रों और पोषक तत्वों की आवश्यकता के आधार पर खाद वितरण की योजना तैयार की गई है।

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राजस्थान में सरसों की बुवाई का मौसम चरम पर है और हर दिन की देरी किसानों की उत्पादकता पर सीधा असर डाल सकती है। आने वाले हफ्तों में आपूर्ति श्रृंखला पर सरकार की पकड़ की असली परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी खुद भाजपा विधायकों का मुख्यमंत्री के दरवाज़े तक पहुँचना बताता है कि वितरण तंत्र में कहीं न कहीं चूक है। ₹1,350 के बैग का ₹2,200 तक पहुँचना सिर्फ कालाबाजारी नहीं, यह निगरानी तंत्र की विफलता का प्रमाण भी है। टास्क फोर्स की बैठकें और मंत्रियों के बयान तब तक अर्थहीन हैं जब तक किसान के खेत तक सही दाम पर खाद न पहुँचे।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में डीएपी खाद की कमी क्यों हो रही है?
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत के अनुसार, सितंबर 2026 से ही कई जिलों में डीएपी की किल्लत की शिकायतें आ रही हैं और सहकारी समितियों की माँग के बावजूद आपूर्ति नहीं पहुँची। हालाँकि राज्य सरकार इससे असहमत है और 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी स्टॉक उपलब्ध होने का दावा कर रही है।
ब्लैक मार्केट में डीएपी का बैग कितने में बिक रहा है?
गहलोत के बयान के अनुसार, डीएपी का एक बैग जिसकी सामान्य सरकारी कीमत ₹1,350 है, वह कथित तौर पर ब्लैक मार्केट में ₹2,100 से ₹2,200 तक में बेचा जा रहा है। यह सामान्य मूल्य से लगभग 63% अधिक है।
राजस्थान सरकार ने डीएपी की कमी के आरोपों पर क्या कहा?
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि खाद का स्टॉक पर्याप्त है और किसानों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में उर्वरक वितरण टास्क फोर्स की बैठक हो चुकी है, जिसमें जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने पर ज़ोर दिया गया।
अशोक गहलोत ने 'डबल-इंजन सरकार' पर क्या आरोप लगाए हैं?
गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा की केंद्र और राज्य दोनों सरकारें सरसों की बुवाई के अहम मौसम में किसानों को पर्याप्त डीएपी उपलब्ध कराने में विफल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों पर नैनो डीएपी जैसे अतिरिक्त उत्पाद खरीदने का दबाव डाला जा रहा है।
रबी 2026–27 सीजन के लिए राजस्थान में कितना खाद स्टॉक है?
कृषि विभाग के अनुसार, राजस्थान में अभी 3.72 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 97,000 मीट्रिक टन एनपीके और 2.08 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। विभाग कम उपलब्धता वाले जिलों की पहचान कर माँग के अनुसार आपूर्ति प्राथमिकता तय कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले